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GST के तहत 3 गुना टैक्‍स वसूलने का जुबलिएंट फूडवर्क्स पर आरोप, रद हो सकता है लाइसेंस

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सेफगार्ड्स (डीजीएस) ने जुबलिएंट फूडवर्क्स को नोटिस दिया है।

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नई दिल्ली. डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सेफगार्ड्स (डीजीएस) ने जुबलिएंट फूडवर्क्स को नोटिस दिया है। कंपनी पर अाराेप है कि उसने पिछले साल नवंबर में जीएसटी दर घटने के बाद भी डोमिनोज पिज्जा की बिक्री पर कस्टमर्स से ज्यादा टैक्स वसूला। इस मामले में दो कस्टमर ने एंटी-प्रॉफिटिंग अथॉरिटी (एएफए) की स्टैंडिंग कमेटी से शिकायत की थी। डीजीएस ने मामले की जांच पूरी कर एएफए को रिपोर्ट सौंप दी है। एएफए कंपनी के खिलाफ जुर्माना लगाने और लाइसेंस रद करने की कार्रवाई भी कर सकती है। 

 

 

तीन गुना ज्‍यादा वसूला टैक्‍स 
कस्टमर ने अपनी शिकायत में कहा था कि सरकार ने नवंबर में जीएसटी को 15 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। लेकिन कंपनी ने डोमिनोज पिज्जा खरीदने पर उनसे 18 फीसदी जीएसटी वसूल किया। नवंबर 2017 में जीएसटी काउंसिल ने साढ़े सात हजार और उससे ज्यादा टैरिफ वाले होटलों में चल रहे रेस्टोरेंट्स को छोड़कर अन्य सभी के लिए जीएसटी दर घटाकर 5% कर दी थी। इससे पहले एयरकंडीशन वाले रेस्टोंमेंट के लिए 18% और साधारण रेस्टोरेंट के लिए 12% जीएसटी लागू था। डोमिनोज की फ्रेंचाइजी भारत में जुबलिएंट फूडवर्क्स के पास है।

 

 

कंपनी से मांगी गई है प्राइस लिस्ट
जांच के दौरान डीजीएस ने जुबलिएंट से मामले में अपना पक्ष रखने के लिए डॉक्यूमेंट देने को कहा था। इसमें डायरेक्टोरेट ने पिछले साल नवंबर की प्राइसलिस्ट की मांगी थी। लेकिन कंपनी ने इसे देने की जगह कहा है कि वह आगे के भी सवालों को लेकर अपना जवाब तैयार कर रही है।

 

 

कई कंपनियों को दिए जा चुके हैं नोटिस
टैक्स में कटौती का लाभ कस्टमर्स को न देकर ज्यादा वसूली करने के मामले में नवंबर से अब 15 नामी कंपनियों को नोटिस दिया गया है। इसमें मैक डोनाल्ड्स फैमिली रेस्टोरेंट, हार्डकैस्टल रेस्टोरेंट, लाइफ स्टाइल इंटरनेशल, होंडा और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियां शामिल हैं। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, नोटिस को लेकर जुबलिएंट से ई-मेल से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन कंपनी ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

 

 

ऐसे होती है मामलों की जांच
एफए में जीएसटी से जुड़े स्थानीय मामले पहले राज्यस्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी के पास भेजे जाते हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर के मामले स्टैंडिंग कमेटी के पास जाते हैं। यहां अगर शिकायत तथ्यपूर्ण पाई जाती है तो उसे डीजीएस के पास जांच के लिए भेजा जाता है। डीजीएस को मामले की जांच 3 महीने में पूरी करनी होती है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर स्टैंडिंग कमेटी से 3 माह का समय और बढ़वाया जा सकता है।

 

 

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