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स्टॉक मार्केट में गिरावट के बीच क्या करें इन्वेस्टर्स, ऐसे बनाएं स्ट्रैटजी

क्रूड में उछाल व रुपए में कमजोरी का असर

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नई दिल्ली। भारतीय बाजार में पैनिक सेलिंग स्टार्ट हो गई है। सभी बड़े इंडेक्स और सेक्टोरियल इंडेक्स में भारी गिरावट आई है। भारतीय शेयर बाजार के मार्केट कैपिटलाइजेशन में लगातार गिरावट हो रही है। लगातार गिरावट के क्या कारण है इसे समझना जरूरी है।

 

क्रूड में उछाल व रुपए में कमजोरी का असर

बड़े ग्लोबल फैक्टर्स जो मार्केट की गिरावट के लिए जिम्मेदार हैं वो हैं- ग्लोबल क्रूड ऑयल की प्राइस में बढ़ोतरी, ग्लोबल करेंसी जैसे कि डॉलर, यूरो और पाउंड के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट। ईरान पर और कई क्रूड ऑयल प्रोडुसिंग कन्ट्रीज के ऊपर अमेरिकी प्रतिबंध और अमेरिका व चीन में ट्रेड वॉर से पूरे ग्लोबल मार्केट में घबराट है।

 

कई मैक्रो डोमेस्टिक फैक्टर्स भी करंट मार्केट में गिरावट कई लिए जिम्मेदार हैं जैसे-

 

- नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों में लिक्विडिटी क्राइसिस
- करंट अकाउंट डेफिसिट में लगातार बढ़ोतरी
- हाई इंटरेस्ट रेट, लो डिमांड

 

अभी जो इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंस सर्विसेज मे लोन डिफॉल्ट के कारण जो क्राइसिस हुआ है उसने मार्केट में जबरदस्त घबराहट पैदा किया है। इस ग्रुप में 24 डायरेक्ट सब्सिडिरीज, 135 इनडायरेक्ट सब्सिडिरीज, 6 ज्वाइंट वेंचर्स और 4 ग्रुप कंपनियां मिलाकर करीब 91 हार करोड़ रुपए के आसपास का कर्ज है। जिसके डिफॉल्ट के कारण सरकार ने कंपनी का पूरा बोर्ड भांग करके नया बोर्ड बनाया है। इस नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का अप्रूवल मिल गया। अब ये बोर्ड इस कंपनी को इस क्राइसिस से निकालने को लेकर बैठक कर रहा है। इस ग्रुप में LIC, SBI और ओरिक्स कॉरपोरेशन ऑफ जापान मेजर शेयर्स होल्डर्स हैं।

 

IL&FS लॉन डिफॉल्ट का असर

इस कंपनी ने शार्ट टर्म और लॉन्ग टर्म डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे कमर्शियल पेपर्स, डिबेंचर पेपर्स और कॉर्पोरेट बांड्स के माध्यम से काफी फंड जुटाया है जिसके इंटरेस्ट और रेडेम्पशंस ओब्लिगेशंस मीट नहीं करने के कारण कंपनी को कई नोटिस प्राप्त हुए और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने रेटिंग डाउनग्रेड की और घबराहट शुरू हुई।

 

इनको होगा नुकसान

इसमें रिटेल इन्वेस्टर्स , इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स म्युचुअल फंड्स, इन्वेस्टमेंट बैंक, इंश्योरेंस कंपनियों आदि ने काफी पैसा इन्वेस्ट कर रखा है। बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस ने भी शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म में काफी लोन दे रखे हैं। अगर ये डिफॉल्ट बढ़ता है और कोई हल नहीं निकलता है तो कई कम्पनियां, म्युचुअल फंड्स और बैंक को भी काफी लॉस हो सकते है। इसके आलावा कंपनी ने जिन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और स्कीम्स में इन्वेस्ट कर रखा है वहां भी काफी लॉसे हो सकते हैं। इन सब बातों को लेकर ही मार्केट में और इन्वेस्टर्स में घबराहट देखने को मिल रही है।

 

सरकार ने पहले ही नया बोर्ड बना दिया है। इस मामले को जैसे पहले सत्यम के केस में सरकार ने क्राइसिस मैनेज किया था और स्टेबिलिटी लौटी थी। इसी तरीके का हल भी इस केस के निकलने की पूरी उम्मीद है।

 

आगे पढ़ें, क्या करें इन्वेस्टर्स

 

 

(नोट- इस आर्टिकल के लेखक कैपिटल स्टार्स फाइनेंशियल रिसर्च के फाउंडर एंड डायरेक्टर अभिषेक उपाध्याय हैं।)

ऐसे बनाएं स्ट्रैटजी

 

वर्तमान मार्केट में तो अभी इन्वेस्टर्स को डरने की जरूरत नहीं है। इन्वेस्टर्स को अभी सतर्क रहके मार्केट के स्टेबल होने का वेट करना चाहिए। घबराहट में किसी भी तरीके का इन्वेस्टमेंट निर्णय करना ठीक नहीं है। पहले भी हमने मंदी साइकिल देखे हैं मार्केट में और ये साइकिल भी निकल जाएगी। आज से दस साल पहले लेमन ब्रदर्स क्राइसिस भी मार्केट ने देखा है और उसके बाद रिकवर किया है। अलग-अलग स्ट्रैटजी ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स को मार्केट में रखना चाहिए जो इस प्रकार हो सकती है-

 

- इंट्रा-डे और शॉर्ट टर्म पोजिशनल ट्रेडर्स को मार्केट में फ्चूयर्स में सेल करके मौजूदा मार्केट में ट्रेडिंग करना चाहिए और वो ऑप्शंस मार्केट्स में पुट बाय करके भी ट्रेडिंग कर सकते हैं। इस स्थिति में ट्रेडर्स को स्ट्रिक्ट स्टॉप लॉस के साथ पोजीशन लेना चाहिए और जब तक पूरी जानकारी न हो किसी पोजीशन को ओवरनाइट होल्ड नहीं करना चाहिए।

 

- लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स को थोड़ा और करेक्शन का वेट करना चाहिए और साथ ही साथ RBI पॉलिसी और अमेरिका के पेरोल्स डाटा पैर भी नजर रखना चाहिए। इस महीने कंपनियों के करंट फाइनेंशियल ईयर के दूसरे क्वार्टर के रिजल्ट्स भी आने हैं, उन पर भी नज़र रखना चाहिए। इन्वेस्टर्स को अभी भी बहुत सारे अच्छे वैल्युएशन्स वाले स्टॉक्स में इन्वेस्ट करना चाहिए।

 

आगे पढ़ें, किन स्टॉक्स में करें निवेश

इनमें करें निवेश

 

कुछ शेयर्स जो इन्वेस्टर्स लॉन्ग टर्म के लिए अपने पोर्टफोलियो में करंट मार्केट में धीरे-धीरे खरीद सकते हैं:

 

- HDFC बैंक, अशोक लेलैंड, सन फार्मा, बजाज फाइनेंस ,TCS

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