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इन्फोसिस ने लिया पनाया को बेचने का फैसला, कंपनी में बड़े भूचाल की बनी थी वजह

जिस कंपनी को खरीदने से इन्फोसिस में बवाल की शुरुआत हुई थी, अब उस कंपनी को बेचने का फैसला कर लिया गया है।

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बेंगलुरू. जिस कंपनी को खरीदने से इन्फोसिस में बवाल की शुरुआत हुई थी, अब उस कंपनी को बेचने का फैसला कर लिया गया है। इन्फोसिस ने शुक्रवार को अपनी सब्सिडियरी और इजरायल की कंपनी पनाया बेचने का फैसला कर लिया। इस कंपनी का अधिग्रहण इतना विवादित रहा था, जिसे खरीदने के बाद इन्फोसिस के फाउंडर्स और विशाल सिक्का की अगुआई वाले तत्कालीन मैनेजमेंट के बीच विवाद की शुरुआत हो गई थी। बेंगलुरू बेस्ड आईटी कंपनी अपनी अन्य सब्सिडियरीज कल्लीडस और स्कावा को बेचने पर भी विचार कर रही है।

 

 

3 कंपनियों को बेचेगी इन्फोसिस

इन्फोसिस ने एक रेग्युलेटरी फाइलिंग में कहा, ‘31 मार्च, 2018 को समाप्त क्वार्टर के दौरान कंपनी अपने बिजनेसेस के पोर्टफोलियो की समीक्षा के बाद अपनी सब्सिडियरीज कल्लीडस, स्कावा और पनाया के लिए संभावित खरीददारों की पहचान व मूल्यांकन का फैसला किया है।’ इन कंपनियों का उल्लेख डिस्पोजल ग्रुप के तौर पर किया गया है। कंपनी को उम्मीद है कि मार्च, 2019 तक इन कंपनियों की बिक्री की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

 

 

589 करोड़ रुपए जाएंगे बट्टे खाते में

इन्फोसिस ने कहा, ‘इस डिस्पोजल ग्रुप के संदर्भ में एसेट की कीमत 2,060 करोड़ रुपए और लायबिलिटीज 324 करोड़ रुपए है।’ इन्फोसिस ने इन कंपनियों का क्लासिफिकेशन ‘बिक्री के लिए तैयार’ के तौर पर किया है। इन्फोसिस ने कहा कि इस रिक्लासिफिकेशन से पनाया के मामले में 118 करोड़ रुपए का लॉस हुआ है। इसमें कहा गया कि पनाया की इन्वेस्टमेंट वैल्यू के संदर्भ में इन्फोसिस को लगभग 589 करोड़ रुपए का राइट डाउन (बट्टे खाते में) करने पड़े हैं।

 

 

पनाया डील पर उठे थे सवाल

बीते साल व्हिशल ब्लोअर की रिपोर्ट में 20 करोड़ डॉलर में इजरायली ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी फर्म पनाया के अधिग्रहण में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।

माना जाता है कि इस डील के बाद शुरू हुए बवाल के चलते विशाल सिक्का को  इन्फोसिस के सीईओ पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस डील पर व्हिसल ब्लोअर्स ने भी सवाल खड़े किए थे। व्हिसल ब्लोअर्स ने दावा किया था कि इस डील के लिए इन्फोसिस बोर्ड ने काफी ज्यादा कीमत लगाई है।

 

 

राजीव बंसल को दिया गया काफी ज्यादा सेवरैंस पैकेज

इसके साथ ही डील का विरोध कर रहे पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर राजीव बंसल को असामान्य रूप से काफी ज्यादा सेवरैंस पैकेज (विदाई पैकेज) देने पर भी सवाल खड़े किए गए थे, जिसका खुलासा बंसल के कंपनी से अलग होने के दौरान नहीं किया गया था।

इसके अलावा इन्फोसिस के जनरल लीगल काउंसिल को ऊंचा सेवरेंस पैकेज देने पर भी सवाल खड़े हुए थे, जिन्होंने कथित तौर पर सीईओ को भेजे एक ईमेल में लिखा था कि वह बंसल के सेवरेंस पैकेज को ज्यादा समय तक छिपा नहीं सकते।

 

 

मूर्ति ने एक्सचेंज को भेजा था लेटर

कंपनी बोर्ड की तरफ से सिक्का के इस्तीफे के लिए जिम्मेदार ठहराए जा रहे फाउंडर मूर्ति ने इस संबंध में स्टॉक एक्सचेंजेस को एक लेटर भी भेजा था। इसमें उन्होंने पनाया डील और टॉप इम्प्लाईज को हाई सेवरेंस पैकेज की जांच की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने के लिए कहा था। उनका लेटर पूरी तरह व्हिसल ब्लोअर की शिकायतों पर आधारित था।

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