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मोदी के 4 साल में निवेशकों को मिला 41% रिटर्न, लेकिन आगे हैं बड़े चैलेंज

मोदी सरकार के 4 साल में निवेशकों को 41 फीसदी रिटर्न मिला है। उन्हें 72 लाख करोड़ की इनकम हुई है।

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नई दिल्ली। मोदी सरकार के 4 साल आज पूरे हो गए हैं। इन 4 सालों में दुनियाभर के बाजारों के रेश्‍यो में घरेलू शेयर बाजार ने आउटपरफॉर्म किया है। इस दौरान सेंसेक्स में 41 फीसदी ग्रोथ रही है, वहीं निफ्टी में करीब 43 फीसदी की     तेजी रही। वहीं, शेयरों में 1100 फीसदी तक रिटर्न निवेशकों को मिला है। 4 साल में जीएसटी जैसे टैक्स रिफॉर्म, नोटबंदी जैसे आर्थिक सुधारों के अलावा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स, पीएसयू बैंक रीकैप प्लान व अन्य सुधारों का भी शेयर मार्केट पर असर दिखा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले 4 साल का औसत देखें तो निवेशकों के लिहाज से बेहतर रहा है। लेकिन आने वाले साल में बाजार को लेकर कई बड़ी चुनौतियां दिख रही हैं। क्रूड में तेजी, रुपए में कमजोरी, इकोनॉमिक रिफॉर्म में सुस्ती, हॉयर वैल्युएशन और विदेशी निवेशकों का इंटरेस्ट कमजोर होना बडे चैलेंज हैं। 

 

 

4 साल और शेयर बाजार 
पिछले 4 साल की बात करें तो सेंसेक्स में 41 फीसदी तेजी रही है। 26 मई 2014 को सेंसेक्स 24716 के स्तर पर था, जो 25 मई 2018 को 34924 के स्तर पर पहुंच गया। 29 जनवरी 2018 को सेंसेक्स ने अपना ऑलटाइम हाई 36443 बनाया था। वहीं, इस दौरान निफ्टी ने 43 फीसदी ग्रोथ दिखाई। वहीं, जनवरी 2018 में निफ्टी ने पहली बार 11000 का स्ता भी पार किया। मोदी सरकार के चौथे साल में बीएसई सेंसेक्स ने 11.67 फीसदी का रिटर्न दिया है, जो तीसरे साले में 17.67 फीसदी था। पहले साल में बीएसई 11.4 फीसदी चढ़ा, जबकि दूसरे साल में इसमें 423 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

 

डेट  सेंसेक्स 
26 मई 2014 24716  
26 मई 2015 27531
26 मई 2016 26366
26 मई 2017 31028
25 मई 2018 34924

                                       

मिडकैप में 87.4% तेजी 

मोदी के 4 साल की बात करें तो मिडकैप इंडेक्स में 87.4 फीसदी तेजी रही है। 26 मई 2014 को बीएसई मिडकैप इंडेक्स 8485 के स्तर पर था जो 25 मई 2018 को 15908 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, 9 जनवरी 2018 को मिडकैप ने ऑल टाइम हाई 18321 का स्तर टच किया। 

 

स्मालकैप में 92% तेजी
मोदी के 4 साल की बात करें तो स्मालकैप इंडेक्स में 92.21 फीसदी तेजी रही है। 26 मई 2014 को बीएसई स्मालकैप इंडेक्स 8923 के स्तर पर था जो 25 मई 2018 को 17151 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, 15 जनवरी 2018 को इंडेक्स ने ऑल इम हाई 20183 का स्तर टच किया। 

 

मिडकैप और स्मालकैप में क्यों आई तेजी
फॉर्च्युन फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि मोदी सरकार ने देश में कई रिफॉर्म योजनाएं बनाईं और उन्हें लागू करवाया। वहीं, पिछले साल बड़े राज्यों में चुनाव जीतने से पॉलिटिकल स्टेबिलिटी का भी माहौल बना। इससे घरेलू स्तर पर मैक्रो इकोनॉमिक वातावरण अच्छा बन गया, जिसकी वजह से घरेलू निवेशकों ने मार्केट में जमकर पैसा लगाया। घरेलू निवेशकों का ज्यादा इंटरेस्ट मिडकैप और स्मालकैप शेयरों में रहता है, जिसका फायदा इन 2इंडेक्स को हुआ। 

 

4 साल में मार्केट कैप 72 लाख करोड़ बढ़ा 
मोदी के 4 साल की बात करें तो बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैप 96 फीसदी बढ़ गया है। 26 मई 2014 को कंपनियों का मार्केट कैप 75 लाख करोड़ था जो अब बढ़कर 147 लाख करोड़ हो गया है। यानी 4 साल में मार्केट कैप 72 लाख करोड़ बढ़ गया। 

 

मार्केट के लिए बेहतर रहा मोदी का 4 साल

 

#फॉर्च्युन फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि पहले 4 साल की बात करें तो 3 साल शेयर बाजार में बढ़त रही है। जबकि एक साल हल्की गिरावट रही। लेकिन औसतन 4 साल में निवेशकों को 40 फीसदी रिटर्न मिला है। इस दौरान शेयरों में  1100 फीसदी तक ग्रोथ दिखी है। 4 साल में 40 फीसदी रिटर्न किसी भी बाजार के लिहाज से मजबूत है। हालांकि पिछले कुछ महीनों में शेयर बाजार पर दबाव दिखा है। जनवरी में ऑलटाइम हाई बनाने के बाद से मार्केट में 4.5 फीसदी की गिरावट रही है, जिसकी वजह से चौथे साल का रिटर्न प्रभावित हुआ है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स, पीएसयू बैंकों में फ्रॉड के मामले सामने आने और यूएस में बॉन्ड यील्ड में ग्रोथ के अलावा ग्लोबल स्तर पर खराब सेंटीमेंट के चलते बाजार में गिरावट रही। 

 

#एचडीएफसी सिक्युरिटीज के हेड ऑफ बिजनेस प्राइवेट क्लाइंट ग्रुप वीके शर्मा का कहना है कि मोदी का चार साल का कार्यकाल मार्केट के लिए ठीक रहा है। इस दौरान बाजार में 40 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिला है। लेकिन बाजार में तेजी सितंबर 2013 से आई है जब मोदी बीजेपी के प्रधानमंत्री कैंडिडेट बने थे। अपने कार्यकाल में उन्होंने अच्छा काम किया है। कई कड़े फैसले लिए हैं। इसके बावजूद मार्केट बढ़ा है। अगले एक साल के कार्यकाल में उनके हाथ में कुछ नहीं हैं। मसलन क्रूड, करंसी और मानसून पर कंट्रोल। इन फैक्टर्स का मार्केट पर असर हो सकता है, जिसपर उनकी पकड़ नहीं है। जैसे-जैसे जीएसटी कलेक्शन बढ़ेगा मार्केट में तेजी बढ़ेगी।

 

कहीं रहे हिट तो कहीं चूक 
सैमको सिक्युरिटीज के फाउंडर एंड सीईओ जिमित मोदी का कहना है कि मोदी सरकार में अगला एक साल शेयर बाजार के लिहाज से चुनौती भरा रहने वाला है। उनका कहना है कि कई योजनाओं को लेकर प्लानिंग और उसे एग्जीक्यूट करने में मोदी सरकार का कार्यकाल यादगार रहा है, लेकिन उस लिहाज से मैक्रो इकोनॉमिक नंबर उतने अच्छे नहीं दिख रहे हैं। डीमोनेटाइजेशन को लेकर उतना फायदा नहीं मिला, जितना मिलना चाहिए। इसी तरह से प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और जॉब्स को लेकर भी सरकार टारगेट से पीछे रह गई। ओवरऑल जीडीपी ग्रोथ भी कमजोर रही। हालांकि इस दौरान जीएसटी जैसे टैक्स रिफॉर्म, बैंकों के लिए रीकैप प्लान और आईबीसी, डिफेंस और रेलवे इक्विपमेंट में एफडीआई और बिजनेस के लिए माहौल बेहतर करने में सफलता मिली।

 

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि‍ 4 साल में सेंसेक्स ओवरऑल 40 फीसदी बढ़ा है जो बहुत ज्यादा इंप्रेसिव नंबर नहीं दिख रहा है। पिछले कुछ तिमाही में अन्रिंग ग्रोथ अच्छी नहीं रही है। वहीं, अब मोदी सरकार जब अपने अंतिम साल में इंटर कर चुकी है, घरेलू मैक्रो इकोनॉमिक माहौल मिला-जुला दिख रहा है। क्रूड एक बड़ी  समस्या के रूप में सामने है। क्रूड से सरकार की बैलेंसशीट बिगड़ सकती है, जिससे ओवरऑल इकोनॉमी को नुकसान होगा। वहीं, महंगाई और रुपए की कमजोरी भी बड़े चैलेंज के रूप में सामने है।  

आगे पढ़ें, पांचवें साल किस तरह के हैं चैलेंज ......

 

आगे रहेंगे ये बड़े चैलेंज 
जगदीश ठक्कर का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार पर दबाव दिख रहा है। इसके पीछे शेयरों का हॉयर वैल्युएशन, राजनीतिक अनिश्चितता, क्रूड के ऊंचे भाव, रुपए में कमेजारी के साथ विदेशी निवेशकों को बाजार से निकलना बड़ा चैलेंज दिख रहा है। उनका कहना है कि क्रूड और करंसी बहुत हद तक सरकार के कंट्रोल में नहीं है। वहीं, कर्नाटक चुनाव के बाद आने वाले दिनों में आम चुनाव के पहले राज्यों में भी चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। रिफॉर्म के मोर्चे पर भी सुस्ती है। ऐसे में जब तक इन सब मामलों में क्लेरिटी नहीं आती है, रिफॉर्म तेज नहीं होते, विदेशी निवेशकों का बाजार में लौटना मुश्किल है। मानसून भी एक बड़ा फैक्टर साबित होगा। 

 

रुपए में कमजोरी, क्रूड में तेजी
मोदी के 4 साल में रुपए में कमजेारी देखने को मिली है। 26 मई 2014 को रुपया 58.59 प्रति डॉलर के भाव पर था। अब रुपया 68.21 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, क्रूड में भी गलातार तेजी हे। नवंबर 2014 से दिसंबर 2014 के बीच कच्चे तेल का अौसत भाव 67 डॉलर प्रति बैरल था जो जून 2017 में 46 डॉलर प्रति बैरल हो गया। वहीं, अब कच्चा तेल 78 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास बना हुआ है। रुपए में कमजेारी और क्रूड में तेजी, दोनों ही शेयर बाजार के लिए निगेटिव सेंटीमेंट हैं। 

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