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SEBI ने PNB को दी चेतावनी, कहा- नीरव मोदी फ्रॉड मामले के डिसक्लोजर में हुई देरी

सेबी ने कहा है कि पीएनबी ने नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप फ्रॉड मामले की स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी देने में देरी की।

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नई दिल्ली। मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने पंजाब नेशनल बैंक को चेतावनी दी है। सेबी ने कहा है कि पीएएनबी ने नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप फ्रॉड मामले की स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी देने में देरी की। नियम के तहत बैंक को जो शिकायत करनी चाहिए थी, वह भी नहीं की है। वहीं, सेबी ने पीएसयू बैंकों से ऐसे फ्रॉड को लेकर भविष्‍य में सतर्क रहने को भी कहा है। सेबी द्वारा यह वार्निंग पीएनबी में करीब 14 हजार करोड़ के फ्रॉड मामले में दी गई है, जिसमें हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चौकसे मुख्‍य आरोपी हैं। 

 

1 से 6 दिनों की देरी हुई

सेबी का कहना है कि दिसंबर 2017 को खत्म होने वाली तिमाही के लिए फाइनेंशियल स्टेटमेंट में 280 करोड़ रुपए के फ्रॉड का खुलासा करने में बैंक से 1 से 6 दिनों की देरी हुई है। सेबी ने पीएनबी को एक लेटर के जरिए ये बातें कही हैं। नियम के तहत बैंक में जो 280 करोड़ रुपए का फ्रॉड हुआ था, उसके बारे में PNB को दिसंबर तिमाही के नतीजों में डिस्कलोजर देना जरूरी था। लेकिन बैंक ने ऐसा नहीं किया। सेबी ने PNB के इस असहयोग को गंभीरता से लिया है और बैंक को भविष्य में इस तरह के काम से बचने की चेतावनी और सलाह दी है।

 

अधिकारी फ्रॉड रोकने में फेल रहे

जांच एजेंसी सीबीआई द्वारा फाइल चार्जशीट में भी कहा गया है कि बैंक के टॉप ऑफिशियल ने लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग (LoUs) को लेकर रिजर्व बैंक को गलत जानकारी दी। यह भी कहा गया है कि एमडी और सीईओ ऊषा अनंतसुब्रमण्यन और वरिष्‍ठ अधिकारी मॉडस ऑपरेंडी की जानकारी के बाद भी इस फ्रॉड को रोकने में फेल रहे हैं। 

 

कैसे सामने आया PNB फ्रॉड?
- पंजाब नेशनल बैंक ने पिछले दिनों स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि उसने 1.8 अरब डॉलर (करीब 11,356 करोड़ रुपए) का संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पकड़ा है।
- इस घोटाले की शुरुआत 2011 से हुई। 7 साल में हजारों करोड़ की रकम फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (LoUs) के जरिए विदेशी अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई।
- बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। 
- इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।

 

घोटाले में कौन-कौन हैं आरोपी?
हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप्स के मालिक मेहुल चौकसी इस घोटाले के मुख्‍य आरोपी हैं। इन दोनों ने गोकुलनाथ शेट्टी के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया। मामले में सीबीआई ने घोटाले में शामिल कई लोगों को गिरफ्तार किया। नीरव मोदी और चोकसी फरार हैं। सभी का नाम चार्जशीट में शामि‍ल है। इस घोटाले में सीबीआई ने दो अलग अलग एफआईआर दर्ज की हैं और ज्‍यादातार आरोपि‍यों का नाम दोनों चार्जशीट में है। पहली एफआईआर में मोदी, एमी, नि‍शाल और मोदी के चाचा मेहुल चोकसी सहि‍त अन्‍य का नाम है। दूसरी एफआईआर में चोकसी, गीतांजली जेम्‍स और अन्‍य पर फोकस है। 

 

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