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प्रमोटर्स के शेयर जब्त कर सकेगा SEBI, लिस्टिंग रूल्स नहीं मानने पर होगी कार्रवाई

अब लिस्टिंग रूल्स का कंप्लायंस नहीं करने वाली कंपनियों को सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

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नई दिल्ली. अब लिस्टिंग रूल्स का कंप्लायंस नहीं करने वाली कंपनियों को सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने रूल्स का नॉन कंप्लायंस रोकनने के लिए एक सख्त मेकैनिज्म लागू किया है। इसके तहत एक्सचेंज को रूल्स नहीं मानने पर प्रमोटर की शेयरहोल्डिंग जब्त करने और ऐसी कंपनियों के शेयर डीलिस्ट करने का अधिकार होगा।

 

 

प्रमोटर्स की होल्डिंग जब्त कर सकेंगे एक्सचेंज

इसका उद्देश्य लिस्टिंग रेग्युलेशंस के चुनिंदा प्रोविजंस का पालन नहीं करने पर फाइन लगाने के मामले में सख्ती और एक समान नजरिया अपनाना है। सेबी ने एक सर्कुलर के माध्यम से कहा कि नए प्रेमवर्क के अंतर्गत एक्सचेंज को नियमों का पालन नहीं करने पर प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की लिस्टेड एंटिटी में पूरी शेयरहोल्डिंग व अन्य सिक्युरिटीज जब्त करने का भी अधिकार होगा।

 

 

हो सकते हैं ये एक्शन

इसके साथ ही एक्सचेंज नॉन कंप्लायंस पर कंपनी पर फाइन लगा सकता है और साथ ही ऐसी कंपनियों के स्टॉक्स को ट्रेडिंग से प्रतिबंधित कैटेगरी में डाल सकता है। एक्सचेंज ऐसी एंटिटीज के शेयरों की ट्रेडिंग भी सस्पेंड कर सकता है।

इसके अलावा एक्सचेंज सस्पेंशन के 6 महीने के भीतर आवश्यक शर्तों को पूरा करने या लगाया गया फाइन चुकाने में नाकाम रहने की स्थिति में एंटिटी के खिलाफ कम्पल्सरी डीलिस्टिंग की कार्रवाई शुरू करनी होगी।

 

 

जरूरी होगा इन शर्तों का पालन

नए नियम कंप्लायंस पीरियड खत्म होने पर या 30 सितंबर, 2018 के बाद लागू हो जाएंगे। लिस्टिंग से सस्पेंड करने के आधार में महिला डायरेक्टर की नियुक्ति सहित बोर्ड के स्वरूप से जुड़े नियम लागू नहीं करने और लगातार दो तिमाहियों में ऑडिट कमेटियों के गठन में नाकाम रहना, लगातार दो तिमाहियों तक कैपिटल ऑडिट से जुड़ी सूचना सबमिट करने में नाकाम रहना शामिल है।

 

 

1,000-5000 रुपए तक लगेगी पेनल्टी

नए नियमों के मुताबिक सेबी ने एक्सचेंजेस से कंपनी की फाइनेंशियल और शेयरहोल्डिंग डिटेल्स से संबंधित डॉक्युमेंट जमा नहीं करने या देरी से जमा करने, बोर्ड में महिला डायरेक्टर की नियुक्ति में नाकाम रहने जैसे लिस्टिंग एग्रीमेंट के क्लॉज के उल्लंघन पर पर प्रति दिन 1,000 से 5,000 रुपए तक पेनल्टी लगाने के लिए कहा है।

 

 

सूचना देने में देरी पर भी फाइन

इसके अलावा एक्सचेंज कंपनी की बोर्ड मीटिंग के बारे में पूर्व सूचना देने में देरी और रिकॉर्ड डेट या डिविडेंड की घोषणा के नॉन डिसक्लोजर में देरी के मामले में 10,000 रुपए तक फाइन लगा सकता है।

इसके अलावा एक से ज्यादा एक्सचेंज में नॉन कंप्लायंस करने वाली एंटिटी के खिलाफ संबंधित एक्सचेंजों द्वारा आपस में परामर्श के बाद समान एक्शन करना होगा। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को नॉन कंप्लायंस की सूचना देने की जरूरत होगी और उनकी टिप्पणियों को सार्वजनिक करना होगा, जिससे इन्वेस्टर्स को निवेश से जुड़े सही फैसले लेने में आसानी हो।

 
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