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डाटा शेयरिंग पर रोक से बिगड़ेगा विदेशी निवेशकों का सेंटीमेंट, शेयर मार्केट पर होंगे ये असर

नई दिल्ली. मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने विदेश से चलने वाले किसी भी स्टॉक एक्सचेंज को इंडियन स्टॉक मार्केट से डाटा देने पर रोक लगा दी है। एक्सपर्ट्स बाजार की मौजूदा हालत को देखते हुए इसे सेबी द्वारा डिफेंसिव कदम मान रहे हैं। लेकिन सेबी के इस कदम से फिलहाल विदेशी निवेशकों का मार्केट को लेकर सेंटीमेंट बिगड़ सकता है। इसकी वजह से वॉल्यूम घटने का डर है। वहीं, बिकवाली बढ़ने से मार्केट को शॉर्ट टर्म में नुकसान होगा। हालांकि लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो 6 महीने बाद इस कदम का फायदा बाजार को होगा। 

 

बता दें कि बीएसई, एनएसई और एमएसईआई (MSEI) तीनों प्रमुख एक्सचेंज ने विदेशी स्टॉक एक्सचेंज में भारतीय स्टॉक मार्केट से जुड़े कॉन्ट्रेक्ट और डेरीवेटिव की ट्रेडिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इनका मानना है कि डाटा पर रोक न होने से भारतीय पूंजी विदेशी बाजारों में जा रही थी, जिससे बाजार में आने वाले लिक्विडिटी पर असर पड़ रहा था। डाटा पर रोक लगने से लिक्विडिटी भारत से विदेशों में जाने से बचेगी। 


बाजार पर होगा ये असर  

- फार्च्युन फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि सेबी के इस फैसले निश्चित रूप से विदेशी निवेशकों में निगेटिव सेंटीमेंट बनेगा। उन्होंने बताया कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब शेयर से होने वाली इनकम पर 10 फीसदी LTCG टैक्‍स लगाया गया है। वहीं, डेरिवेटिव्स के लिए इंडिया में निवेशकों को 30 फीसदी कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है, जबकि सिंगापुर में कोई टैक्स नहीं है। ऐसे में अब विदेशी निवेशकों को ट्रेडिंग पर पहले से ज्यादा टैक्स देना होगा, जो उनके लिए निगेटिव खबर है। 

- लाइसेंसिंग एग्रीमेंट के तहत अभी एक महीने का समय दिया गया है, इस दौरान ग्रांडफादरिंग का लाभ भी मिलेगा। ऐसे में नोटिस पीरिड के दौरान विदेशी निवेशकों द्वारा टैक्स से बचने के लिए सेलिंग बढ़ने की उम्मीद है। इसका असर इंडियन मार्केट पर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले कुछ दिनों में भले ही दुनियाभर के बाजारों में सेंटीमेंट बेहतर दिखें, इंडियन मार्केट में इस फैसले का निगेटिव असर दिखेगा। 

 

विदेशी निवेशकों में बनेगा डर 

जगदीश ठक्कर का कहना है कि सिंगापुर से चलने वाले एसजीएक्स निफ्टी में 24 घंटे ट्रेडिंग होती है। ऐसे में अगर दुनियाभर के बाजारों में कुछ होता है तो सिंगापुर से चलने वाले एक्सचेंज पर निवेशकों को अपनी पोजिशन घटाने या बढ़ाने का मौका मिल जाता है। जबकि इंडियन मार्केट 3:30 बजे तक बंद हो जाता है। ऐसे में जो फायदा विदेशी निवेशकों को सिंगापुर या दुबई स्टॉक एक्सचेंज पर मिलता था, वह एनएसई या बीएसई पर नहीं मिलेगा। ऐसे में निवेशक दूरी बना सकते हैं। 

 

लंबी अवधि के लिए बेहतर कदम 

SMC इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के टेक्निकल एनालिस्ट सचिन सर्वदे का कहना है कि फॉरेन स्टॉक्स एक्सचेंज पर भारतीय स्टॉक की ट्रेडिंग पर रोक लगाना लंबी अवधि के लिहाज से बेहतर कदम है। इससे भारतीय मार्केट की लिक्विडिटी बचाने में मदद मिलेगी। शुरू में वॉल्यूम को लेकर कुछ चिंता हो सकती है, लेकिन आगे इसका फायदा बाजार को मिलेगा। जो विदेशी निवेशक इंडियन मार्केट में ट्रेडिंग करना चाहेंगे, उन्हें यहां के मौजूदा नियमों के अनुसार ट्रेडिंग करनी होगी। बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी। वहीं, सरकार को भी टैक्स मिलेगा। उनका कहना है कि यह कदम नहीं उठाया जाता तो घरेलू मार्केट को और नुकसान हो सकता था।

 

विदेश में जा रही थी लिक्विडिटी   

सिंगापुर एक्सचेंज से पिछले कई सालों से इंडियन इक्विटी इंडेक्स में ट्रेडिंग हो रही है। सेबी की ही एक रिपोर्ट के अनुसार टर्नओवर के मामले में पिछले साल सिंगापुर एक्सचेंज के जरिए निफ्टी फ्यूचर में करीब 51 लाख करोड़ रुपए की ट्रेडिंग हुई। मार्केट शेयर के लिहाज से यह 46 फीसदी से ज्यादा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेबी की एक चिंता इस बात को लेकर भी थी। विदेशी बाजारों में भारतीय सिक्योरिटीज और डेरिवेटिव में कारोबार बढ़ रहा था। रेश्‍यो के लिहाज से यह डोमेस्टिक मार्केट से अधिक हो गया था। ऐसे में डोमेस्टिक मार्केट से लिक्विडिटी विदेशों में जा रही थी।

 

इंडियन मार्केट की छवि पर उठेंगे सवाल

सीएमसी मार्केट्स की एनालिस्ट मारगरेट यांग के अनुसार ऑशोर मार्केट के लिए ऑफशोर चैनल को बंद करने से इंडियन मार्केट को फायदा नहीं होगा, बल्कि इससे इंडियन मार्केट के इंटरनेशनलाइजेशन बनने की राह में अवरोध पैदा होगा। इससे विदेशी निवेशक दूसरी इमर्जिंग मार्केट की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में इंडियन मार्केट में इस कदम की वजह से उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। 

 

फैसला कमर्शियल इंट्रेस्ट से जुड़ा: सेबी 

सेबी चेयरमैन अजय त्यागी के अनुसार विदेशी एक्सचेंज को डाटा शेयर नहीं होने से घरेलू एक्सचेंजों पर कारोबार बढ़ेगा और ये फैसला पूरी तरह से कमर्शियल इंट्रेस्ट से जुड़ा है। वहीं, एनएसई के सीईओ और एमडी, विक्रम लिमये के अनुसार इस फैसले से भारतीय शेयर बाजार को फायदा होगा और लिक्विडिटी विदेशों में जाने से बचेगी। 

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