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वीडियोकॉन-ICICI बैंक लोन मामले में हो सकती है फॉरेंसिक जांच, RBI से कंसल्ट करेगा सेबी

वीडियोकॉन ग्रुप को आईसीआईसीआई द्वारा लोन दिए जाने के मामले में फॉरेंसिक जांच हो सकती है।

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नई दिल्ली। वीडियोकॉन ग्रुप को आईसीआईसीआई द्वारा लोन दिए जाने के मामले में फॉरेंसिक जांच हो सकती है। इस बारे में मार्केट रेग्युलेटर सेबी द्वारा विचार किया जा रहा है। पिछले कुछ सालों में आईसीआईसीआई बैंक के फाइनेंशियल स्टेटमेंट और डिस्क्लोजर इस जांच के दायरे में रहेंगे। टॉप ऑफिशियल के अनुसार इस मामले में सेबी जल्द रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से भी कंसल्ट कर सकता है। 

 

टॉप ऑफिशियल के अनुसार फॉरेंसिक जांच के फोकस में बैंक द्वारा पिछले कुछ साल के फाइनेंशियल स्टेटमेंट और डिस्क्लोजर रहेंगे। वहीं, वीडियोकॉन ग्रुप को लोन मामले में कंट्रोवर्सी सामने आने के बाद बैंक से सेबी ने जो सवाल पूछू थे, उन क्लेरिफिकेशन को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा। इसके अलावा चंदा कोचर के आईसीआईसीआई बैंक की एमडी व सीईओ बनने के दौरान बैंक डिस्क्लोजर भी जांच के दायरे में रहेंगे। अगर जरूरज हुई तो सेबी बैंक के उन बिजनेस डील के मामलों में जानकारी मांग सकता है, जिनमें चंदा कोचर सहित टॉप ऑफिशियल इन्वाल्व रहे हों।  

 

RBI को नहीं मिले थे लेन-देन के सबूत 
बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को 2 साल पहले वीडियोकान ग्रुप को ICICI बैंक से लोन मामले में किसी तरह के लेन-देन का सबूत नहीं मिले थे। 2 साल पहले आरबीआई ने वीडियोकॉन ग्रुप को मिले लोन पर उठे सवाल के बाद विस्तार से जांच की थी। RBI डॉक्यूमेंट्स के अनुसार उसने यह जांच 2016 के मिड में की थी। आरबीआई ने यह जांच तब की थी, जब प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने पास आई कुछ शिकायतें आरबीआई को रेफर्ड की थीं। इन शिकायतों में आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर पर सवाल उठाया गया था।  

 

जुलाई 2016 में आया था पहला कमेंट 
डॉक्यूमेंट्स और मामले को सीधे जानने वाले सूत्रों के अनुसार आरबीआई ने इस मामले में जुलाई 2016 के मिड में अपना पहला कमेंट करते हुए कहा था कि आईसीआईसीआई बैंक ने कुछ बैंकों के कंसोर्टियम के साथ मिलकर एक डेट कंसोलिडेशन प्रोग्राम के तहत वीडियोकान ग्रुप को 1730 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था। बैंक कंसोर्टियम को एसबीआई ने लीड किया था।

 

आरबीआई ने कहा कि उसे इस मामले में हितों के टकाराव का कोई मामला नहीं दिखा। हालांकि रिजर्व बैंक ने यह भी कहा था कि दीपक कोचर की कंपनी नूपावर को मिले धन के कुछ सोर्सेज को लेकर वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है।

 

चंदा कोचर पर उठे थे सवाल
#मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि वीडियोकॉन ग्रुप को आईसीआईसीआई बैंक ने 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया था। यह लोन पूरा नहीं चुकाया गया। बाद में वीडियोकॉन की मदद से बनी एक कंपनी आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की अगुवाई वाले ट्रस्ट के नाम कर दी गई।

 

#रिपोर्ट में दावा किया गया है, ‘‘वीडियोकॉन ग्रुप की पांच कंपनियों को अप्रैल 2012 ने 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया गया था। ग्रुप ने इस लोन में से 86% यानी 2810 करोड़ रुपए नहीं चुकाए। इसके बाद लोन को 2017 में एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग असेट्स) घोषित कर दिया गया।’’ 

 

#दिसंबर 2008 में वीडियोकॉन ग्रुप के मालिक वेणुगोपाल धूत ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के साथ मिलकर एक कंपनी न्यूपावर रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड बनाई। इसमें कोचर के परिवार और धूत की हिस्सेदारी 50-50 फीसदी की थी। दीपक कोचर को इस कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया। 

 

#जनवरी 2009 में धूत ने इस कंपनी में डायरेक्टर का पद छोड़ दिया। उन्होंने ढाई लाख रुपए में अपने 24,999 शेयर्स भी न्यूपावर में ट्रांसफर कर दिए।

 

#आरोप हैं कि 2010 से 2012 के बीच धूत की कंपनी ने कोचर की कंपनी को लोन दिया। आखिर में 94.99 फीसदी होल्डिंग वाले शेयर महज 9 लाख रुपए में चंदा कोचर के पति की अगुआई वाली कंपनी को मिल गए।

 

आगे पढ़ें, बैंक ने किया था बचाव

 

 

वीडियोकॉन ग्रुप को 3250 करोड़ रुपए लोन देने के मामले में आईसीआईसीआई बैंक मैनेजमेंट ने बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर का बचाव करते हुए कहा था कि वीडियोकॉन ग्रुप को लोन देने  का फैसला क्रेडिट पैनल ने लिया था। चंदा कोचर उस पैनल की हिस्सा थीं, न कि हेड। बैंक मैनेजमेंट का कहना है कि चंदा कोचर ने जो कुछ भी किया, नियमों में रहकर ही किया है।  

 

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