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खास खबर: क्यों दिवालिया होने की कगार पर पहुंची RCom, कभी टेलिकॉम इंडस्‍ट्री को सिखाया था नया बिजनेस मॉडल

जानकार मान रहे हैं कि जैसे आर-कॉम पर कर्ज बढ़ा है, इसके भविष्‍य को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता है।

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नई दिल्ली। 2002 के समय जब मोबाइल फोन एक लग्‍जरी हुआ करता था, रिलायंस इंफोटेक (अब रिलायंस कम्युनिकेशंस) ने महज 500 रुपए में लोगों को मोबाइल की सुविधा उपलब्ध करा दी। इंडस्ट्री में जब कॉम्पिटिशन बढ़ा तो सस्ती कॉल दरें, अट्रैक्टिव ऑफर्स देकर इंडस्ट्री में नए बिजनेस मॉडल की शुरुआत की। बाद में इसी मॉडल को सभी बड़ी टेलिकॉम कंपनियों ने अपनाया। हालांकि एयरटेल, जियो, आइडिया और वोडाफोन जैसी कंपनियां तो आज भी मार्केट में मजबूती से टिकी हैं, लेकिन आर-कॉम अब दिवालिया होने की कगार पर आ गया है। इंडस्‍ट्री के जानकार मान रहे हैं कि जिस तरह से आर-कॉम पर कर्ज बढ़ा और सब्‍सक्राइबर्स लगातार दूर हुए, इसके भविष्‍य को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता है। 

 

 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो ऑर-कॉम अनिल अंबानी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी थी, गलत एक्सपेंशन प्लान की वजह से परेशानी में पड़ गई। कंपनी पर कर्ज बढ़ता गया, जो कंपनी चुका नहीं पाई। वहीं, बाद में जब टेलिकॉम इंडस्ट्री में रिलायंस जियो के आने के बाद प्राइसिंग वार शुरू हुआ, कैश न होने से आर-कॉम इस प्रतियोगिता में टिकी नहीं रह पाई। इसी वजह से वह दूसरी बड़ी कंपनियों से पीछे होती गई। आज वह सब्‍सक्राइबर्स के मामले में टॉप 5 में शामिल नहीं है। 

 

2010 के बाद से शुरू हुई गिरावट
फॉर्च्‍युन फिस्‍कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी में जब बिजनेस को लेकर बंटवारा हुआ था तो अनिल अंबानी के हिस्से में टेलिकॉम कंपनी आई थी। साल 2010 तक यह एडीएजी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी थी। 2010 तक आर-कॉम का मार्केट शेयर टेलिकॉम इंडस्ट्री में 17 फीसदी था और वह दूसरी बड़ी कंपनी थी। कंपनी के सब्सक्राइबर्स की संख्‍या भी अच्छी खासी थी। उसी दौरान कंपनी के विस्तार को लेकर कर्ज बढ़ना शुरू हुआ और उसका सही मैनेजमेंट नहीं हो पाया। इससे कर्ज बढ़ता गया, लेकिन उसे चुकाया नहीं जा सका, और कंपनी का वहीं से डिक्लाइन शुरू हो गया। फाइनेंशियल ईयर 2010 में कंपनी पर 25 हजार करोड़ कर्ज था, अब बढ़कर 45 हजार करोड़ हो चुका है। 

 

रही सही कसर डाटा वार में पूरी हुई
टेलिकॉम इंडस्ट्री से जुड़े एक एक्सपर्ट ने बताया कि आर-कॉम पर कर्ज बढ़ा और कंपनी के पास कैश की कमी होती गई। ऐसे में रिलायंस जियो के आने के बाद से टेलिकॉम इंडस्ट्री में जो डाटा वार चला, उसमें आर-कॉम का टिकना मुश्किल होता गया। जियो, एयरटेल और आइडिया व वोडाफोन जैसी कंपनियां ने अपना कस्टमर बेस बनाए रखने के लिए खर्च बढ़ा दिया। जिससे उनका कस्टमर बेस अभी भी बचा हुआ है। वहीं आर-कॉम इस खेल में पीछे हो गई। उसके प्राइम और एवरेज कस्टमर सभी उससे दूर होते गए। 

 

10 साल में 1.61 लाख करोड़ घटी मार्केट कैप 
ऑर-कॉम में गिरावट का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि पिछले 10 साल में कंपनी का मार्केट कैप 97 फीसदी से ज्यादा घट गया है। जनवरी 2008 में ऑर-कॉम का मार्केट कैप 1.66 लाख करोड़ रुपए के करीब था, जो 18 मई 2018 को घटकर 4245 करोड़ रुपए पर आ गया। इस दौरान कंपनी का मार्केट कैप 1.61 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा घट गया। 11 जनवरी 2008 को एक शेयर का भाव 792 रुपए था, जो घटकर 18 मई 2018 को 15 रुपए के स्तर पर आ गया। 

 

ADAG ग्रुप में कमजोरी 
कुछ एक्सपर्ट आर-कॉम में गिरावट को अनिल अंबानी की अनिल धीरू भाई अंबानी ग्रुप में लगातार आ रही कमजोरी का भी हिस्‍सा मान रहे हैं। ब्लूमबर्ग के डाटा के अनुसार पिछले 10 साल के कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट की बात करें तो एडीएजी ग्रुप की सेल्स तो पॉजिटिव रही है, लेकिन प्रॉफिट और रिटर्न निगेटिव में चला गया हे। इस दौरान सेल्स ग्रोथ 9.4 फीसदी तो प्रॉफिट ग्रोथ माइनस 12.6 फीसदी और रिटर्न ग्रोथ माइनस 1.7 फीसदी रहा है। वहीं, दूसरी ओर मुकेश अंबानी के रिलायंस ग्रुप का इसी दौरान सेल्स ग्रोथ 11.2 फीसदी, प्रॉफिट ग्रोथ 9.4 फीसदी और रिटर्न रेट 17.8 फीसदी रहा है। 

 

किसका कितना मार्केट शेयर
ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार, भारती एयरटेल अभी भी 29.16 करोड़ कंज्यूमर्स के साथ भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बनी हुई है। दूसरी वहीं, वोडाफोन इंडिया के कंज्यूमर्स की संख्‍या 21.38 करोड़ और तीसरी बड़ी कंपनी आइडिया सेल्‍यूलर के कंज्यूमर्स की संख्‍या 19.76 करोड़ है।  जनवरी अंत तक मुकेश अंबानी की जियो के कंज्यूमर्स की संख्‍या 16.83 करोड़ हो चुकी है। 

 

कंज्यूमर्स में एयरटेल अभी भी नं. 1
एयरटेल का मार्केट शेयर 25.32 फीसदी है। वोडाफोन इंडिया का मार्केट शेयर जनवरी के अंत तक 18.56 फीसदी और आइडिया सेल्‍यूलर का मार्केट शेयर 17.16 फीसदी है। रिलायंस जियो की अब कुल हिस्सेदारी टेलिकॉम इंडस्ट्री में करीब 14 फीसदी हो गई है। वहीं, बीएसएनएल का मार्केट शेयर दिसंबर के मुकाबले 9.24 फीसदी से बढ़कर जनवरी में 9.40 फीसदी हो गया है। 

 

दिवालिया होने की कगार पर 
हालात यहां तक आ पहुंचे हैं कि रिलायंस कम्युनिकेशंस दिवालिया घोषित होने की कगार पर खड़ी है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी एनसीएलटी ने टेलिकॉम इक्यूपमेंट बनाने वाली स्वीडन की कंपनी एरिक्सन की रिलायंस कम्युनिकेशंस और इसकी सहयोगी कंपनियों के खिलाफ कर्ज वसूली के लिए ट्रिब्यूनल में 3 याचिकाएं दाखिल की थी, जिन्हें मंजूर कर लिया गया। एरिक्शन ने 2014 में कंपनी के साथ 7 साल की एक डील साइन की थी। इस डील के तहत उसने रिलायंस कम्युनिकेशंस का नेशनवाइड टेलीकॉम नेटवर्क संभालने का जिम्मा हासिल किया था। एरिक्सन अब आरकॉम और इसकी दो सब्स‍िडियरी कंपनियों से 1155 करोड़ रुपए का दावा कर रही है।   

 

आगे पढ़ें, बिजनेस को पटरी पर लाने की कोशिश .....

 

 

सुलह की कोशिश में आर-कॉम
करोड़ों के बकाए को लेकर 8 महीने से चल रही कानूनी लड़ाई खत्म करने के लिए आरकॉम ने स्वीडन की टेलिकॉम फर्म एरिक्सन से सुलह की पेशकश की है जिसके बाद कंपनी के शेयरों में तेजी आई है। आरकॉम के शेयर में दो दिन में 100 फीसदी का उछाल आया। 

 

20 फीसदी टूटा था शेयर
NCLT की मुंबई बेंच ने 8 महीने की कानूनी लड़ाई के बाद मंगलवार को आरकॉम और उसकी सब्सडियरीज के खिलाफ स्वीडन की टेलिकॉम गियर कंपनी एरिक्सन की तीन याचिकाओं को स्वीकार किया था। इससे बुधवार को बीएसई पर स्टॉक 20 फीसदी टूटकर 9.95 रुपए पर आ गया था। 

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