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बढ़ते निवेश से म्‍युचुअल फंड कंपनियां परेशान, तय करने लगीं इन्‍वेस्‍टमेंट लिमिट

बढ़ती लिक्विडिटी अब म्‍युचुअल फंड कंपनियों को परेशान करने लगी है। इसके चलते अब निवेश की लिमिट तय कर रही हैं।

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नई दिल्‍ली. बढ़ती लिक्विडिटी अब म्‍युचुअल फंड कंपनियों को परेशान करने लगी है। इसके चलते अब अच्‍छा रिटर्न देने वाली स्‍कीम्‍स में कंपनियां निवेश की लिमिट तय कर रही हैं। 11 दिसम्‍बर से एलएंडटी इमर्जिंग बिजनेस फंड में निवेश पर कुछ लिमिट लागू कर रही है। इसके बाद लोग इसमें बड़ा निवेश एक बार में नहीं कर सकेंगे। कुछ ऐसी ही लिमिट 4 दिसबंर को आईडीएफसी फोकस इक्विटी फंड पर भी लागू की गई है। यह फंड निवेशकों को अच्‍छा रिटर्न दे रहे हैं, लेकिन निवेश के विकल्‍प सीमित होने के चलते अब इन फंड्स के मैनेजर बड़ा निवेश लेने से हिचक रहे हैं।

 

 

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निवेशकों के हित में लिया फैसला

कंपनी ने एलएंडटी इमर्जिंग बिजनेस फंड के बार में लिए इन फैसलों पर कहा है कि यह निवेशकों के हित में किया जा रहा है। इस संबंध में दिए गए विज्ञापन में कंपनी ने कहा है कि ज्‍यादा निवेश आने से फंड के वर्तमान निवेशकों के हित प्रभावित हो सकते हैं। च्‍वॉइस ब्रोकिंग के वाइस प्रेसीडेंट अजय केजरीवाल के अनुसार म्‍युचुअल फंड अपने बैंचमार्क के आधार पर ही निवेश करते हैं। लेकिन एक लिमिट से ज्‍यादा पैसा आ जाए तो फंड मैनेजर्स के लिए दिक्‍कत बन जाता है। कैश रखना निवेश करने वालों के अच्‍छा नहीं होता है और बिना अच्‍छी कंपनी को छांटे निवेश बाद में नुकसान भी करा सकता है। इसलिए इन फंड्स के वर्तमान निवेशकों के‍ हित में कंपनियों ने ऐसे फैसले लिए हैं।

 

क्‍या लगाई गईं हैं लिमिट

-एक बार में 2 लाख रुपए से बड़ा निवेश नहीं हो सकेगा

-दूसरे फंड से स्विच इन की सुविधा नहीं मिलेगी

-सिस्‍टेमेटिक ट्रांसफर प्‍लान की सुविधा नहीं मिलेगी

 

चालू सिप पर नहीं लागू होंगे प्रतिबंध

-हालांकि अगर पहले से SIP चल रही है तो निवेश जारी रखा जा सकता है

-आसेट 30 नवंबर को 2,892 करोड़ रुपए

-एक साल में दिया है 56.37 फीसदी रिटर्न

 

आईडीएफसी फोकस इक्विटी फंड  में भी लागू हुई लिमिट

आईडीएफसी फोकस इक्विटी फंड में भी इन्‍हीं लिमिट को लागू किया गया है। यह लिमिट 4 दिसबंर से लागू हो गई है। यह फंड भी अच्‍छा रिटर्न दे रहा है। इसी के चलते इस फंड की आसेट अंडर मैनेजमेंट जहां अ्प्रैल में 117 करोड़ रुपए थी जो अब 900 करोड़ रुपए के पार निकल गई है। बीते एक साल में इस फंड ने 51 फीसदी से ज्‍यादा का रिटर्न दिया है।

 

पहले भी लग चुकी हैं ऐसी लिमिट

शेयरखान के वाइस प्रेसीडेंट मृदुल कुमार वर्मा के अनुसार अच्‍छी योजनाओं में निवेश बढ़ता ही है, लेकिन कई म्‍युचुअल फंड की योजनाएं ऐसी होती हैं, जिनके पास निवेशकों का पैसा लगाने के विकल्‍प सीमित होते हैं। इन योजनाओं के बैंचमार्क ऐसे होते हैं कि म्‍युचुअल फंड स्‍कीम्‍स के फंड मैनेजर्स ज्‍यादा पैसा आने पर निवेश नहीं कर पाते हैं। इसीलिए यह लिमिट लगाई जाती हैं। उन्‍होंने बताया कि पहले भी ऐसी लिमिट कई स्‍कीम्‍स में लगाई जा चुकी हैं, जिन्‍हें स्‍ि‍थतियां सामान्‍य होने पर हटा लिया गया था।

 

 

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(नोट-निवेश सलाह ब्रोकरेज हाउस और मार्केट एक्सपर्ट्स के द्वारा दी गई हैं। कृपया अपने स्तर पर या अपने एक्सपर्ट्स के जरिए किसी भी तरह की सलाह की जांच कर लें। मार्केट में निवेश के अपने जोखिम हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है।)

 

 

 

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