12 साल में छोटे भाई से 12 गुना अमीर हो गए मुकेश अंबानी, पलट गया खेल

2006 में जब मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी में बिजनेस का बंटवारा हुआ था, तो दोनों भाइयों की दौलत करीब-करीब बराबर थी। उस दौरान जहां अनिल अंबानी की कुल नेट वर्थ 4500 करोड़ डॉलर थी, बड़े भाई मुकेश अंबानी की नेटवर्थ 4900 करोड़ डॉलर थी। लेकिन बंटवारे के करीब 12 साल बाद आज मुकेश अंबानी अपने छोटे भाई अनिल अंबानी ने करीब 12 गुना ज्यादा अमीर हो गए हैं। मुकेश अंबानी को जहां अपना बिजनेस लगातार बढ़ाने में सफलता मिली, वहीं अनिल अंबानी की नेटवर्थ लगातार घटती रही।

moneybhaskar

May 21,2018 07:11:00 PM IST

नई दिल्ली। 2006 में जब मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी में बिजनेस का बंटवारा हुआ था, तो दोनों भाइयों की दौलत करीब-करीब बराबर थी। उस दौरान जहां अनिल अंबानी की कुल नेट वर्थ 4500 करोड़ डॉलर थी, बड़े भाई मुकेश अंबानी की नेटवर्थ 4900 करोड़ डॉलर थी। लेकिन बंटवारे के करीब 12 साल बाद आज मुकेश अंबानी अपने छोटे भाई अनिल अंबानी ने करीब 12 गुना ज्यादा अमीर हो गए हैं। मुकेश अंबानी को जहां अपना बिजनेस लगातार बढ़ाने में सफलता मिली, वहीं अनिल अंबानी की नेटवर्थ लगातार घटती रही। अनिल अंबानी ग्रुप की टेलिकॉम कंपनी आर-कॉम की हालत तो इतनी खस्ता हो गई कि वह दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गर्इ।

12 गुना पीछे रह गए अनिल अंबानी
12 साल पहले जहां दोनों भाइयों की नेटवर्थ करीब बराब थी, आज उसमें बहुत बड़ा फासला आ चुका है। फोर्ब्स के अनुसार 2018 में मुकेश अंबानी की नेट वर्थ 3800 करोड़ डॉलर है, वहीं अनिल अंबानी की नेटवर्थ महज 315 करोड़ डॉलर ही रह गई। यानी अनिल अंबानी बड़े भाई से 12 गुना पीछे रह गए।


रियल टाइम नेटवर्थ 21 मई 2018 को करीब 3930 करोड़ डॉलर है तो वहीं अनिल अंबानी की रियल टाइम नेटवर्थ 197 करोड़ डॉलर रह गई। यानी करीब 20 गुना पीछे रह गए छोटे भाई अनिल अंबानी। मुकेश अंबानी भारत के सबसे अमीर हैं, वहीं अनिल अंबानी का भारत के अमीरों में 45वां नंबर है। दुनियाभर के अमीरों में मुकेश अंबानी 19वें तो अनिल अंबानी उनसे 868 स्थान पीछे 887वें पोजिशन पर हैं।

कंपनियों के मार्केट कैप में 12 गुना पीछे
मुकेश अंबानी के आरआईएल की मार्केट कैप जहां 6 लाख करोड़ रुपए के आस-पास है, वहीं, अनिल अंबानी की सभी कंपनियों का मार्केट कैप 50 हजार करोड़ रुपए के करीब ही रह गया है।

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    अनिल अंबानी को मिला था मनपसंद बिजनेस साल 2006 में धीरूभाई अंबानी की कंपनियों का बंटवारा उनके दो बेटों मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच हुआ। मुकेश अंबानी के हिस्से में रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस इंडिया पेट्रोकेमिकल्स का बिजनेस आया था। वहीं, अनिल अंबानी को रिलायंस इंफोकॉम (अब रिलायंस कम्युनिकेशंस), रिलायंस एनर्जी, रिलायंस कैपिटल और रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज मिला। अनिल अंबानी को शुरू से टेलिकॉम बिजनेस में इंटरेस्ट भी था। मुकेश अंबानी के पास जो कंपनियां आईं वह रिलायंस ग्रुप के तहत रहीं। वहीं, अनिल अंबानी ने बाद में कुछ और भी कंपनियां शुरू कीं और सभी अनिल धीरू भाई अंबानी ग्रुप यानी ADAG ग्रुप कंपनियां कहलाईं। अनिल अंबानी ने किया विस्तार, बढ़ीं मुश्किलें अनिल अंबानी ने आगे चलकर कई सेक्टर में कारोबार करना शुरू किया। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, म्यूचुअल फंड्स, बीमा, डिफेंस, सिनेमा, डीटीएच, एफएम रेडियो आदि शामिल हैं। अनिल अंबानी के कारोबार का विस्तार तो होता गया, लेकिन यहीं से उनकी मुश्किलें भी बढ़ती गईं। इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि विस्तार में एडीएजी ग्रुप का खर्च बढ़ता गया, लेकिन कुछ सेक्टर्स में मुनाफा नहीं आया। बस यहीं से कर्ज बढ़ता गया। इस दौरान कुछ कारोबार बंद भी करने पड़े। आर-कॉम ने बढ़ाई ज्यादा परेशानी फोर्ब्स के अनुसार साल 2007 के शुरू में अनिल अंबानी की नेटवर्थ 4500 करोड़ डॉलर थी और इसमें सबसे अधिक 66 फीसदी हिस्सा रिलायंस कम्युनिकेशंस का था। यही आर-कॉम अब अनिल अंबानी के लिए परेशानी बन गई है। आर-कॉम के विस्तार में कर्ज बढ़ता गया लेकिन चुकाना मुश्किल होता गया। नतीजा यह कि कंपनी में गिरावट बढ़ने लगी। कंपनी पर 45 हजार करोड़ रुपए का कर्ज हो गया। पिछले 10 साल में कंपनी की दौलत 1.66 लाख करोड़ रुपए से घटकर सिर्फ 4245 करोड़ रुपए रह गई।
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