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फेल होने जा रहा था मोदी सरकार का बड़ा प्लान, LIC ने ऐसे बचा ली फजीहत

कुछ मिनट ही बाकी थे और केंद्र सरकार का हजारों करोड़ रुपए का प्लान फेल होने जा रहा था।

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नई दिल्ली. कुछ मिनट ही बाकी थे और केंद्र सरकार का हजारों करोड़ रुपए का प्लान फेल होने जा रहा था। लेकिन एलआईसी के अंतिम समय में आगे आई और लगभग 3 हजार करोड़ रुपए लगाकर सरकार को उबार लिया। अगर एलआईसी आगे नहीं आती तो सरकार को 31 मार्च से पहले बड़ी फजीहत का सामना करना पड़ता। दरअसल सरकार का राजकोषीय घाटा काफी बढ़ चुका है, जिसकी भरपाई करने के लिए सरकार ने मार्च महीने में बड़ा दांव लगाया था।

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सरकार का 4200 करोड़ रु जुटाने का प्लान

दरअसल वित्त वर्ष 2017-18 में सरकार का राजकोषीय घाटा खासा बढ़ चुका है, जिसकी भरपाई के लिए सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है। इसमें डिफेंस सेक्टर की देश की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) का आईपीओ भी शामिल है। इसके माध्यम से सरकार की 4200 करोड़ रुपए जुटाने की योजना थी। यह आईपीओ 16 मार्च से 20 मार्च तक खुला था। आईपीओ की सफलता के लिए न्यूनतम 98 फीसदी सब्सक्रिप्शन जरूरी था। अगर ऐसा नहीं होता तो आईपीओ फेल हो जाता।

 

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अंतिम क्षणों में आगे आई एलआईसी
मंगलवार को दोपहर तक एचएएल के आईपीओ को आधा सब्सक्रिप्शन भी नहीं मिला था और सरकारी कंपनी के आईपीओ के फेल होने में कुछ ही मिनट बाकी थे। ऐसे में अचानक एलआईसी आगे आई और इस आईपीओ के लिए 3 हजार करोड़ रुपए की बिड लगा दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एलआईसी की इस पहल से एचएएल को न्यूनतम 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की शर्त को पूरा करने में मदद मिली, जो लिस्टिंग के लिए जरूरी शर्त है।

 

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सरकार को मिलेंगे 4 हजार करोड़ रुपए
इससे पहले केंद्र सरकार आईपीओ के माध्यम से एचएएल की 10.2 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना थी। हालांकि कम डिमांड के कारण कुछ कम हिस्सेदारी बिक पाएगी। सरकार को 1215-1240 रुपए प्राइस रेंज में लोअर बैंड पर भी इस आईपीओ से लगभग 4 हजार करोड़ रुपए मिलेंगे।

 

 

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विदेशी निवेशकों ने नहीं लगाया एक भी पैसा
आईपीओ को फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एफआईआई) की तरफ से एक भी बिड नहीं मिली। बड़े इश्यू के बावजूद एचएएल के आईपीओ को दो इन्वेस्टमेंट बैंकों एसबीआई कैप्स और एक्सिस कैपिटल द्वारा मैनेज किया गया। इससे पहले कुछ बड़े बैंकर्स के आईपीओ से पीछे हटने की खबर भी आ चुकी हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस आईपीओ को सुस्त रिस्पॉन्स की वजह मार्केट में जारी कमजोरी रही। साथ ही पीएसयू स्टॉक्स में जारी गिरावट का भी इस पर असर पड़ा।

 

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