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इस स्कीम से 25 हजार तक मंथली कमा रहे हैं लोग, बजट में बताई खासियत

बजट में कुछ खास योजनाओं का जिक्र हुआ, जिससे आम लोगों को फायदा हो रहा है।

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नई दिल्ली। बजट में कुछ खास योजनाओं का जिक्र हुआ, जिससे आम लोगों को फायदा हो रहा है। इसमें मुद्रा योजना के अलावा प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना मुख्‍य रूप से शामिल है। वित्त मंत्री जेटली ने मोदी सरकार की महात्वाकांक्षी जनऔषधि योजना का जिक्र करते हुए इसकी खासियत बताई। उन्होंने बताया कि किस तरह से लोगों को करीब 800 दवाएं बाजार से 80-85 फीसदी तक सस्ती दरों पर मिल रही हैं। 


असल में सरकार ने इस खास योजना के जरिए आम लोगों को हर महीने रेग्युलर कमाई का भी मौका दिया है, जिसके जरिए बहुत से लोग हर महीने 25 से 30 हजार रुपए तक कमाई कर रहे हैं। खास बात है कि इस योजना के जरिए सैंकड़ों लोग ऐसे हैं जो अपने गांव, कस्बे या शहर में ही रहकम अच्छी इनकम कर रहे हैं। सरकार इस योजना से जुड़ने वालों को कई तरह की सुविधाएं भी उपलब्ध करा रही है। वहीं, आगे इस योजना का और भी विस्तार किए जाने की उम्मीद है। 

 

UPA सरकार की स्कीम को मोदी ने किया हिट


ऐसे हिट हुई योजना
 -यह स्कीम यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई थी, लेकिन यूपीए के कार्यकाल में यह योजना फलॉप साबित हुई। वहीं, मोदी ने सत्ता संभालते ही इस योजना पर खासतौर से फोकस किया। 
-मोदी सरकार ने जनऔषधि योजना के तहत ग्रांट 1.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए कर दिया।
-दुकानदारों को दवा की बिक्री पर मिलने वाला कमिशन 15 फीसदी से 20 फीसदी हो गया।
-आवेदन फीस और प्रॉसेसिंग फीस को खत्म कर दिया। आवेदन की प्रक्रिया आसान हुई।
-हर महीने कमिशन के अलावा दवा की बिक्री पर इंसेटिव भी दिया जा रहा है।
-मेडिकल स्टोर की संख्‍या 80 से बढ़कर 3000 हो गई। 
आगे पढ़ें, कौन है इस योजना के लिए योग्य, कैसे हो रही है इनकम

कौन खोल सकता है जनऔषधि सेंटर 


-जनऔषधि सेंटर खोलने के लिए सरकार ने तीन कैटेगरी बनाई है।
-पहली कैटेगरी में कोई भी व्यक्ति, बेरोजगार फार्मासिस्ट, डॉक्टर, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर शामिल है। 
-दूसरी कैटेगरी में ट्रस्ट, एनजीओ, प्राइवेट हॉस्पिटल, सोसायटी और सेल्फ हेल्प ग्रुप शामिल हैं। 
-वहीं तीसरी कैटेगरी में राज्य सरकारों द्वारा नॉमिनेट की गई एजेंसियां हैं। 
-दुकान खोलने के लिए 120 वर्गफुट एरिया में दुकान होनी जरूरी है।
-सेंटर खोलने वालों को सरकार की ओर से 800 से ज्यादा दवाओं के अलावा 100 से ज्यादा इक्यूपमेंट सेल करने के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। जो उन्हें जनऔषधि डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए मिल रहा है। 
आगे पढ़ें, कैसे हो रही है 25-30 हजार मंथली इनकम

 

25 से 30 हजार तक मंथली इनकम
 
-जनऔषधि सेंटर के जरिए महीने में जितनी दवाएं सेल होंगी, उसका 20 फीसदी सरकार कमिशन के रूप में दे रही है। यानी अगर 1 लाख रुपए की सेल है तो 20 हजार रुपए कमिशन मिल रहा है। 1.5 लाख की सेल पर कमिशन 30 हजार हो सकता है। 
-ट्रेड मार्जिन के अलावा सरकार मंथली सेल पर 10 फीसदी इंसेंटिव भी देती है, जो आपके बैंक अकाउंट में आ जाएगा। इंसेटिव हर महीने होने वाली दवाइयों की सेल पर डिपेंड होगा और इसे कुल सेल का 10 फीसदी रखा गया है। हालांकि, इसकी लिमिट 10 हजार मैक्सिमम रखी गई है। 
-इस तरह से दुकानदार को ट्रेड मार्जिन के अलावा इंसेटिव के रूप में डबल मुनाफा होगा। यानी अगर वह एक महीने में सिर्फ 1 लाख रुपए तक की दवा सेल करता है तो उसे मंथली 25 से 30 हजार रुपए तक इनकम होगी।
-कमिशन की कोई लिमिट नहीं है, जितनी दवा सेल होगी, कमिशन उतना ज्यादा बनेगा।
 
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2.5 लाख रुपए का ग्रांट 


दु‍कान खोलने वालों को 2.5 लाख रुपए सरकार की ओर से ग्रांट दिया गया है। वैसे भी दुकान खोलने में सरकार को जो एस्टीमेट है, वह 2.5 लाख रुपए का खर्च है। यानी यह पूरा खर्च ग्रांट के रूप में सरकार दे दे रही है। सेंटर शुरू करने पर 1 लाख रुपए की दवाएं पहले खरीदनी होती है, जिसे सरकार इसे मंथली बेसिस पर रीइंबर्समेंट कर देती है। उसी तरह से इंफ्रा का खर्च 6 महीने के अंदर वापस करने का नियम है। जनऔषधि सेंटर खोलने के लिए कंप्यूटर आदि के सेटअप पर 50 हजार रुपए तक के खर्च पर भी सरकार पैसा रिटर्न करेगी।

 

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