Advertisement
Home » मार्केट » स्टॉक्सknow about piram group head ajay piramal

ये हैं ईशा अंबानी के होने वाले ससुर, एक फैसले से बदली फार्मा बिजनेस की सूरत

अजय पीरामल के फार्मा इंडस्ट्री के टॉयकून बनाने की कहानी आसान नहीं रही है।

1 of

 

नई दिल्ली. देश के सबसे अमीर बिजनेसमैन मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी की शादी दिसंबर में होने जा रही है। ईशा की शादी मशहूर बिजनेसमैन अजय पीरामल के बेटे आनंद पीरामल से होगी। फोर्ब्स मैंगजीन के अनुसार पीरामल ग्रुप के हेड अजय पीरामल की दौलत 490 करोड़ डॉलर (33 हजार करोड़ रुपए) है। आज वह न केवल देश के टॉप अमीरों में शामिल हैं, बल्कि उनके फॉर्मास्युटिकल्स, पैकेजिंग, रीयल एस्टेट और फाइनेंशियल सर्विसेज का कारोबार दुनियाभर के 100 से ज्यादा शहरों में फैल चुका है। लेकिन अजय पीरामल को यह उपलब्धि रातोंरात हासिल नहीं हुई है। इसके पीछे भी संघर्ष की एक लंबी कहानी है। ऐसे में हम आपको बताते हैं कि कौन हैं अजय पीरामल, भारत के टॉप अमीरों में कैसे हुए शामिल....



 

भारत के 22वें सबसे अमीर शख्‍स

फोर्ब्स के अनुसार उनकी संपत्ति 490 करोड़ डॉलर यानी 33 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है और वे भारत में 22वें और दुनिया में 404वें सबसे अमीर आदमी हैं। पीरामल इंटरप्राइजेज का कारोबार दुनियाभर के करीब 30 देशों के 100 से ज्यादा शहरों में है। अजय पीरामल की पत्नी स्वाति कंपनी की उप-चेयरमैन हैं जबकि उनकी बेटी नंदिनी और बेटा आनंद बोर्ड मेंबर्स में हैं।

Advertisement

 

 

आसान नहीं था मुकाम हासिल करना

अजय पीरामल ने शुरू में अपने पारिवारिक टेक्सटाइल बिजनेस में काम शुरू किया। यह 1977 की बात है, जब उन्होंने अपनी एमबीए की पढ़ाई पूरी की थी। उस दौरान वह सिर्फ 22 साल के थे। उन्होंने जमनालाल बजाज इंस्‍टीट्यूट से एमबीए की पढ़ाई की थी। 2 साल तक तो सबकुछ ठीक चला, लेकिन उसके बाद अजय पीरामल के लिए संघर्ष के दिन शुरू हो गए। 1979 में उनके पिता की डेथ हो गई। जिसके बाद उनके पिता के कुछ करीबियों ने भी साथ छोड़ दिया। इस घटना के 16 दिन बीते थे कि टेक्सटाइल मिलों में स्ट्राइक शुरू हो गई, जो लंबे समय तक चली। मुश्किलें यहीं नहीं खत्म हुई, कुछ दिन बाद ही उनके एक मात्र सपोर्टर उनके भाई की भी कैंसर से डेथ हो गई। इसके बाद पूरे बिजनेस की जिम्मेदारी अजय पीरामल के कंधों पर आ गई।

Advertisement

 

 

यहां से शुरू हुआ टर्निंग प्वॉइंट

अजय पीरामल ने इस दौरान गुजरात ग्लास लिमिटेड का अधिग्रहण किया जो फार्मास्युटिकल्स की पैकेजिंग में थी। यहीं से फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्री का महत्व उनके समझ में आया। इसके बाद से उन्होंने 1988 में ऑस्ट्रेलियन कंपनी निकोलस लैबोरेटरी का भारतीय कारोबार खरीद लिया। कंपनी उस दौरान टॉप फार्मा कंपनियों में शामिल थी। उस समय कंपनी का कुल मार्केट कैप 6 करोड़ के आस-पास था। ऐसे में यह डील ज्यादा मुश्किल नहीं रही। बाद में निकोलस लैब का नाम बदलकर पीरामल हेल्थकेयर लिमिटेड कर दिया।

Advertisement

 

 

एक फैसले ने बदली तकदीर

पीरामल हेल्थकेयर ने 2010 में अपना डोमेस्टिक फॉर्म्युलेशन बिजनेस को विदेशी कंपनी अबॉट लैब्स को बेचने का फैसला किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस डील से कंपनी को 15 हजार करोड़ रुपए हासिल हुए, जिसमें से कंपनी ने 6000 करोड़ रुपए फार्मा सेग्मेंट में निवेश कर दिया। बस यही फैसला अजय पीरामल को फार्मा इंडस्ट्री का बड़ा टॉयकून बनाने वाला साबित हुआ। पिछली रिपोर्ट के अनुसार फार्मा बिजनेस से आने वाला रेवेन्यू 4000 करोड़ रुपए के आस-पास तक पहुंच चुका है। यह पिछले 6 साल में तकरीबन दोगुना हो चुका है।

 
 


prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
Advertisement
Don't Miss