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निफ्टी के लिए अहम होगा 10276 का स्तर, ग्लोबल सेलऑफ से अभी मार्केट में रहेगा उतार-चढ़ाव

एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा सेंटीमेंट्स के हिसाब से शेयर मार्केट में आने वाले 25 से 30 दिनों तक पैनिक रहेगा।

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नई दिल्ली। पिछले हफ्ते से ही मार्केट में हाई लेवल वोलेटैलिटी रही है। वहीं, सोमवार को हल्की रिकवरी दिखी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा सेंटीमेंट्स के हिसाब से शेयर मार्केट में आने वाले 25 से 30 दिनों तक पैनिक रहेगा। इस उतार-चढ़ाव के दौरान मार्केट अपना बॉटम सेट कर लेगा, जिसके बाद फिर से रिकवरी देखने को मिलेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस दौरान निफ्टी के लिए नीचे की ओर से 10276 का लेवल अहम होगा, जो 6 फरवरी को इंट्राडे लो लवेल बना था। यह लेवल टूटा तो निफ्टी 9800 तक आ सकता है। वहीं, ऊपर की ओर 10600 से 10700 के लेवल से रजिस्टेंस रहेगा। 

 

 

VIX अभी भी 17 के स्तर से ऊपर
सोमवार को निफ्टी पर वोलैटिलिटी इंडेक्स में 7 फीसदी रिकवरी रही है, लेकिन अभी भी यह 17 के स्तर से ऊपर बना हुआ है। पिछले हफ्ते इंडेक्स 23.15 के लेवल पर पहुंच गया था जो 15 महीनों का टॉप था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वोलैटिलिटी इंडेक्स में इतनी बड़ी गिरावट कमजोर ग्लोबल संकेतों की वजह से हुआ है। इंडेक्स का यह लेवल इस बात के संकेत है कि मार्केट में अभी और उतार-चढ़ाव होना है।

 

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FII ने की 7025 करोड़ की बिकवाली
दुनियाभर के बड़े बाजारों में ग्लोबल सेलऑफ का दौर जारी है, जिसका असर डोमेस्टिक मार्केट पर भी पड़ रहा है। पिछले 8 ट्रेडिंग सेशन की बात करें तो विदेशी निवेशकों ने मार्केट से 7025 करोड़ रुपए की बिकवाली की है। जबकि जनवरी के महीने में उन्होंने मार्केट में 9568 करोड़ रुपए निवेश किए थे। बॉन्ड यील्ड में तेजी से यह बिकवाली आगे भी जारी रहने की आशंका है। ऐसे में मार्केट के लिए यह बड़ा निगेटिव सेंटीमेंट बना हुआ है। 
डेल्टा ग्लोबल पार्टनर्स के फाउंडर एंड प्रिंसिपल पार्टनर देवेंद्र नेगी के अनुसार ग्लोबल मार्केट में सेलिंग प्रेशर से उतार-चढ़ाव अभी बना हुआ है। इंडियन मार्केट से भी एफआईआई लगातार पैसे निकाल रहे हैं। ऐसे में अगर डीआईआई का सपोर्ट नहीं मिला तो मार्केट के लिए बड़ा निगेटिव फैक्टर होगा। 

 

ग्लोबल सेलऑफ जारी
-दुनियाभर के कई बाजारों में बिकवाली का प्रेशर बना हुआ है। 13 फरवरी को मार्केट खुलते ही यूएस मार्केट नैसडैक लाल निशान में चला गया। वहीं, यूरोप के बाजारों में भी गिरावट है। निक्केई भी 125 अंक कमजोर हुआ। इसका असर बुधवार को डोमेस्टिक मार्केट पर भी दिख सकता है। असल में अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 4 साल के टॉप लेवल पर है। यूरोप में भी बॉन्ड की यील्ड बढ़ी है। ऐसे में विदेशी निवेशक इंडिया इक्विटी मार्केट से पैसे निकालकर बॉन्ड में लगा रहे हैं। वहीं, भारत में LTCG भी एक कंसर्न बना हुआ है।  

 

-बॉन्ड यील्ड बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न होता है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब बॉन्ड से ज्यादा कमाई होना है। असल में ब्याज दरें बढ़ने से शेयर महंगे और बॉन्ड अट्रैक्टिव लगते हैं। वहीं, ब्याज दरें बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ती है। ऐसे में उनके मार्जिन और मुनाफे पर दबाव बन सकता है। 

 

नीचे की ओर 10276 का लेवल है अहम 
-एचडीएफसी सिक्युरिटीज के हेड ऑफ रिटेल रिसर्च दीपक जसानी के अनुसार मार्केट में शॉर्ट टर्म के लिए ट्रेंड डाउन साइड दिख रहा है। हालांकि निफ्टी को नीचे की ओर से 10276 के लेवल का अहम सपोर्ट है। अगर यह लेवल टूटा तो मार्केट में एक और गिरावट बनेगी। वहीं, अगर रैली दिखती है तो इसे ऊपर की ओर से 10703 के लेवल से रजिस्टेंस मिल रहा है। फिलहाल मार्केट अभी कुछ दिन इससे ऊपर जाता हुआ नहीं दिख रहा है। 
-स्टैलियन एसेट्स डॉट कॉम के सीआईओ अमीत जेसवानी का कहना है कि अगले कुछ ट्रेडिंग सेशन में मार्केट सेंटीमेंट निगेटिव दिख रहे हैं। इस दौरान निफ्टी अगर 10276 के लेवल से नीचे की ओर से तोड़ता है तो यह 9800 के स्तर तक टूट सकता है। वहीं, अगले कुछ ट्रेडिंग सेशन में निफ्टी को ऊपर की ओर 10750 के लेवल से रेजिस्टेंस मिलता दिख रहा है। 

आगे पढ़ें, क्या करें निवेशक

 

 

निवेशकों को इंतजार करना चाहिए
ट्रेडस्विफ्ट ब्रोकिंग के डायरेक्टर संदीप जैन ने कहा कि फिलहाल बाजार में निवेश करने के लिए कुछ इंतजार करना चाहिए। पिछले लंबे समय से मार्केट महंगा चल रहा था, ऐसे में बाजार में गिरावट ड्यू थी। यह गिरावट निवेशकों को अच्छा मौका देगा। कई अच्दे शेयरों का वैल्युएशन बेहतर हो जाएगा।  

 

 

लंबी अवधि में लौटेगी तेजी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि फंडामेंटल लेवल पर मार्केट को लेकर कोई परेशानी नहीं दिख रही है। आगे मार्केट फिर तेज होगा। लंबी अवधि में मार्केट को बजट और रिफॉर्म्स का सपोर्ट मिलेगा। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के अनुसार कॉरपोरेट अर्निंग में रिकवरी है जो आगे के लिए अच्छे संकेत हैं। महंगाई को लेकर कंसर्न है, लेकिन उम्मीद है कि आगे असका हल निकलेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्लोबल मार्केट से बेहतर संकेत आने के साथ ही मार्केट में रिकवरी दिखने लगेगी। ऐसे में लंबी अवधि के नजरिए से ज्यादा चिंता नहीं है। 

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