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नॉर्थ-ईस्ट में BJP की जीत से शॉर्ट टर्म रैली के आसार, निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह

नॉर्थ ईस्ट राज्यों में बीजेपी की जीत से शेयर बाजार में पॉलिटिकल स्टेबिलिटी का संदेश गया है।

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नई दिल्ली। नॉर्थ ईस्ट राज्यों में बीजेपी की जीत से पॉलिटिकल स्टेबिलिटी का संदेश गया है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस सेंटीमेंट से सोमवार को स्टॉक मार्केट में तेजी के आसार दिख रहे हैं। उनका कहना है कि यह तेजी शॉर्ट टर्म के लिए होगी और इसे निवेशकों को बिकवाली के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। एक्सपर्ट्स ने शॉर्ट टर्म में तेजी के बीच नए निवेश को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अभी कुछ ऐसे फैक्टर हैं, जिनकी वजह से मार्केट में दबाव बना रहेगा। ऐसे में निवेशक लंबी अवधि का नजरिया लेकर ही मार्केट में आएं। 

 

 

ट्रैप होने से बचें निवेशक
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीजेपी की जीत के बाद सोमवार को मार्केट बढ़त के साथ खुल सकता है। लेकिन यह बढ़त शॉर्ट टर्म के लिए होगी, ऐसे निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। मार्केट एक्सपर्ट सचिन सर्वदे का कहना है कि मार्केट में शॉर्ट टर्म के लिए रैली के आसार हैं, लेकिन यह रैली बहुत ज्यादा नहीं होगी। ऐसे में निवेशकों को कॉसियस अप्रोच रखकर चलने की सलाह होगी। उन्हें इस रैली में ट्रैप होने से बचाना चाहिए। वहीं, हर बढ़त का इस्तेमाल सेलिंग के लिए किया जा सकता है। उनका कहना है कि जब तक ग्लोबल सेंटीमेंट नहीं सुधरेंगे, मार्केट में दबाव दिखेगा।

 
दुनियाभर के बाजारों में सुस्ती
शुक्रवार को यूएस मार्केट में मामूली बढ़त रही है, लेकिन यूरोप के प्रमुख 3 बाजार और एशिया के प्रमुख 6 बाजारों में गिरावट देखी गई। वहीं, गुरूवार को यूएस मार्केट में भी गिरावट रही थी। ग्लोबल सेलऑफ का असर घरेलू बाजार पर भी बना हुआ है।

 

निफ्टी के लिए 10650 का स्तर अहम
एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्टेट इलेक्शन को लेकर मार्केट के लिए पॉजिटिव खबर आई है। ऐसे में सोमवार को मार्केट पॉजिटिव मोड दिखा सकता है। लेकिन निफ्टी अगर 10650 का लेवल क्रॉस नहीं करता है तो यह रैली यहीं थम जाएगी। वहीं, अगर 10650 का लेवल ब्रेक होता है तो निफ्टी 10850 के लेवल तक आ सकता हे। निफ्टी को नीचे की ओर से 10300 के लेवल पर सपोर्ट है। आगे अगर यह लेवल टूटता है तो निफ्टी 9800 से 10000 का स्तर भी देख सकता है। 

 

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ग्लोबल सेंटीमेंट सहित ये हैं बड़ी चिंताएं 
एक्सपर्ट्स का कहना है कि निश्चित रूप से बीजेपी द्वारा स्टेट इलेक्शन में बेहतर प्रदर्शन से पॉलिटिकल स्टेबिलिटी को लेकर बेहतर सेंटीमेंट बनेगा। लेकिन, अभी भी मार्केट में कई कंसर्न हैं। मसलन दुनियाभर के बाजारों में अभी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। क्रूड की कीमतें बढ़ रही हैं, रुपया कमजोर हुआ है, विदेशी निवेशक लगातार मार्केट से दूर जा रहे हैं, पीएसयू बैंकों में गिरावट जारी है। ऐसे में जबतक इन फैक्टर्स को लेकर चिंता रहेगी, मार्केट में दबाव रहेगा।  

 

डेल्टा ग्लोबल पार्टनर्स के फाउंडर देवेंद्र नेवगी के अनुसार अगले कुछ ट्रेडिंग सेशन में मार्केट की निगाहें पीएसयू बैंकिंग सेक्टर के अलावा विदेशी निवेशकों और ग्लोबल मार्केट की चाल पर होंगी। अगर इनमें रिकवरी नहीं होती तो मार्केट में ज्यादा रैली की उम्मीद नहीं है। वहीं मार्केट के लिए घरेलू निवेशक भी अहम फैक्टर हैं, जिनके निवेश से फरवरी में सपोर्ट मिला है। 

 

दूर हो रहे FII लेकिन DII से सपोर्ट 
फरवरी में विदेशी निवेशकों ने घरेलू मार्केट से लगातार बिकवाली की है। इस दौरान विदेशी निवेशकों ने 11000 करोड़ रुपए मार्केट से निकाल लिए। FPI आउटफ्लो 5 महीने के हाई पर पहुंच गया। हालांकि इस दौरान डीआईआई ने मार्केट में 17813 करोड़ रुपए निवेश किए, जिससे लिक्विडिटी को लेकर सपोर्ट मिला है। 

 

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लंबी अवधि के नजरिए से आएं निवेशक 


फॉर्च्युन फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर कहना है कि देश में मैक्रो-इकोनॉमिक एन्वायरनमेंट को लेकर ज्यादा चिंता नहीं दिख रही है। डाटा बेहतर आ रहे हैं, जीडीपी ग्रोथ रेट में सुधार है। जिससे संकेत मिले हैं कि इकोनॉमी फिर पटरी पर है। वहीं, अब पॉलिटिकल स्टेबिलिटी को लेकर सेंटीमेंट बना है। पॉलिटिकल स्टेबिलिटी का मतलब है कि रिफॉर्म्स की गाड़ी तेजी से आगे बढ़ेगी। इकोनॉमी को आगे फायदा होगा। सरकार ने जो पॉलिसी बनाई है, उस पर काम होगा। ऐसे में घरेलू निवेशकों के साथ विदेशी निवेशकों में भी भरोसा बढ़ता है। जहां दुनियाभर के बाजारों में स्थिति सुधरी, मार्केट में फिर निवेश बढ़ेगा। लंबी अवधि के लिहाज से मार्केट को लेकर चिंता नहीं दिख रही है। 

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