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​रुपए में थमी गिरावट , 5 पैसे मजबूत होकर 66.42 के भाव पर खुला

मंगलवार को रुपया 5 पैसे मजबूती के साथ 66.42 प्रति डॉलर के भाव पर खुला।

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नई दिल्ली.  डॉलर के मुकाबले रुपए में पिछले 6 ट्रेडिंग सेशन से हो रही गिरावट मंगलवार को थम गई है। मंगलवार को रुपया 5 पैसे मजबूती के साथ 66.42 प्रति डॉलर के भाव पर खुला। सोमवार को रुपया 66.47 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था। सोमवार को पूरे दिन रुपए में 35 पैसे की गिरावट देखी गई। 

 

 

2 साल की लंबी गिरावट थमी
सोमवार को लगातार छठें दिन रुपए में गिरावट के साथ यह 2 साल की सबसे लंबी गिरावट बन गई। सोमवार को रुपया 8 पैसे कमजेार होकर 66.20 प्रति डॉलर के भाव पर खुला। वहीं, कारोबार के अंत में यह 66.47 प्रति डॉलर के भाव पर पहुंच गया। रुपए का यह एक साल से ज्यादा समय का लो लेवल है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बॉन्ड यील्ड में मजबूती, क्रूड की बढ़ती कीमतों और एफआईआई द्वारा लगातार बिकवाली का असर रुपए पर दिख रहा है। 

 

पिछले 9 दिनों में रुपए की चाल

11 अप्रैल 65.31/डॉलर
12 अप्रैल 65.26/डॉलर
13 अप्रैल 65.20/डॉलर
16 अप्रैल 65.49/डॉलर
17 अप्रैल 65.64/डॉलर
18 अप्रैल 65.66/डॉलर
19 अप्रैल 65.79/डॉलर
20 अप्रैल 66.12/डॉलर
23 अप्रैल 66.47/डॉलर
24 अप्रैल 66.42/डॉलर*

नोट: 24 अप्रैल को रुपए का शुरूआती भाव

 

 

रुपए में गिरावट की वजह
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल कीमतों में तेजी से डॉलर की डिमांड बढ़ी है, जिससे रुपए पर निगेटिव असर हुआ है। एफआईआई की बिकवाली से भी रुपए में कमजोरी आई है। जिससे रुपया पिछले 13 महीनों के निचले स्तर पर आ चुका है। वहीं, जियो पॉलिटिकल टेंशन और ट्रेड वार के बढ़ने का भी डर बना हुआ है। दूसरी ओर 10 साल के बॉन्ड यील्ड में तेजी है। बॉन्ड यील्ड और रुपए का मूवमेंट एक दूसरे के अपोजिट होता है। 

 

रुपए की गिरावट का असर

#रुपए की गिरावट से महंगाई बढ़ने का डर हो जाता हे। इससे एक्सपोर्ट महंगा होता है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं। रुपए में कमजोरी से देश के सरकारी घाटे पर दबाव बढ़ने का डर रहता है जिसके चलते सरकार को खर्च कंट्रोल करना पड़ सकता है, इसका सीधा असर देश की विकास दर पर हो सकता है। भारत के इंपोर्ट का बहुत बड़ा हिस्सा पेट्रोलियम उत्पादों के इंपोर्ट में जाता है और ये डॉलर में भुगतान किया जाता है। ऐसे में रुपए में गिरावट की वजह से क्रूड का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हो सकता है।

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