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ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर के पार, 4 रुपए और महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल

अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में गुरुवार को ब्रेंट क्रूड के भाव 80 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए।

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नई दिल्‍ली. अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में गुरुवार को ब्रेंट क्रूड के भाव 80 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए। नवंबर 2014 के बाद यह पहला मौका है, जब क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। जानकारों का कहना है कि एक ओर ओपेक और रूस ने प्रोडक्शन घटा दिया है। वहीं, मार्केट में ईरान की ओर से भी सप्लाई घटने का डर बन गया है। जिसका असर कीमतों पर देखा जा रहा है। वहीं, जानकार यह भी कह रहे हैं कि क्रूड की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल-डीजल मौजूदा स्तर से 4 रुपए प्रति लीटर और महंगा हो सकता है।  

 

जून 2017 के बाद क्रूड 79% महंगा

पिछले एक साल में क्रूड के दाम 60 फीसदी से ज्‍यादा चढ़ गए हैं। वहीं, साल 2018 में अबतक क्रूड में 20 फीसदी की तेजी आ चुकी है। जून 2017 के बाद की बात करें तो क्रूड 79 फीसदी महंगा हो चुका है। जून 2017 में क्रूड के भाव 44.82 डॉलर प्रति बैरल पर थे, वहीं गुरूवार को क्रूड 80.18 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं, एक साल पहले क्रूड 52.21 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था। 2018 के शुरू में क्रूड 66.57 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था। 

 

4 रुपए प्रति लीटर महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल
ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक, अगर सरकारी तेल कंपनियों को कर्नाटक चुनाव से पूर्व की मार्जिन स्थिति में पहुंचना है तो पेट्रोल-डीजल की कीमत में प्रति लीटर 4 रुपए तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है। असल में कर्नाटक चुनाव के दौराल तेल कंपनियों ने 19 दिन पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाईं। जिसके बाद 3 बार बढ़ोत्तरी की जा चुकी है। तब से पेट्रोल 69 पैसे प्रति लीटर महंगा हो चुका है, इसमें आज हुई 22 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी हुई है। हालांकि इसमें 4 रुपए प्रति लीटर बढ़ोत्तरी होगी, तब कंपनियां चुनाव पूर्व मार्जिन की स्थिति में होंगी। 

 

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?  
एंजेल ब्रोकिंग के अनुज गुप्ता का कहना है कि ओपेक देश लगातार क्रूड प्रोडक्शन में कटौती कर रहे हैं। जिससे मार्केट में सप्लाई की स्थिति टाइट है। रूस ने भी प्रोडक्शन घटा दिया है। वहीं, ईरान पर अमेरि‍की प्रतिबंध की घोषणा के बाद, तेल की कीमतें नई ऊंचाई पर आ रही हैं। ईरान की ओर से भी सप्लाई घटने का डर बन गया है। क्रूड की कीमतें अब 80.18 डॉलर प्रति बैरल आ गई हैं। यह नवंबर 2014 के बाद का उच्‍चतम स्‍तर है। वहीं, जियोपॉलिटिकल टेंशन से भी कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। हालांकि अमेरिका में ऑयल रिग्स की काउंटिंग बढ़ी है, लेकिन पिछले दिनों रिग्स में कमी आई थी। 

 

इन स्तरों से बढ़ेगा दबाव
एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के अनुसार क्रूड का भाव 80 डॉलर प्रति बैरल पर आने का मतलब है कि इन स्तरों से अब दबाव बढ़ेगा। इससे इंटरनेशनल मार्केट में राजनीति भी तेज हो जाएगी। उनका कहना है कि जो मौजूदा स्थिति है, उससे लगता है कि क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर आ सकता है। 

 

 

बिगड़ेगी सरकार की बैलेंसशीट 
क्रूड की कीमतों में तेजी से देश के ऑयल इंपोर्ट बिल पर असर दिखने लगा है। अप्रैल में सालाना आधार पर ऑयल इंपोर्ट बिल 41.49 फीसदी बढ़कर 1041 करोड़ डॉलर हो गया है। बता दें कि भारत अपनी जरूरतों का 82 फीसदी क्रूड इंपोर्ट करता है। दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतें इंटरनेशनल मार्केट में लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में इस मोर्चे पर सरकार को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, रुपए में भी कमजोरी के चलते सरकार को क्रूड के बदले डॉलर में ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। इससे बैलेंसशीट और बिगड़ने का खतरा बना हुआ है। 

 

महंगाई बढ़ने की आशंका
- क्रूड की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ने का भी डर होता है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड महंगा होने से इंडियन बास्केट में भी क्रूड महंगा हो जाता है। इससे तेज कंपनियों पर मार्जिन का दबाव भी बढ़ता है।
- तेल कंपनियां क्रूड की कीमतों में होने वाली बढ़ोत्तरी को कंज्यूमर्स पर पास ऑन करती हैं। बता दें कि देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी आसमान पर पहुंच गई हैं। दिल्ली में पेट्रोज जहां 75 रुपए प्रति लीटर पार कर गया है, वहीं डीजल रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से महंगाई बढ़ने का भी डर होता है। हाल ही में फॉरेन ब्रोकरेज हाउस यूबीएस ने रिपोर्ट में कहा था कि अगर क्रूड की कीमतें 10 % बढ़ती हैं तो सीपीआई इन्फलेशन में 25 बेसिस प्वॉइंट की बढ़ोत्तरी हो सकती है।

 

 

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क्रूड में 10 डॉलर की बढ़ोत्तरी से ग्रोथ में 0.3% कमी

 

पिछले दिनों इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती हैं तो उस रेश्‍यो में ग्रोथ में 0.2 से 0.3 फीसदी तक कमी आती है। वहीं, डबल्यूपीआई इनफ्लेशन में 1.7 फीसदी की बढ़ोत्तरी होती है। इसी तरह से करंट अकाउंट डेफिसिट 1000 करोड़ डॉलर बढ़ सकता है। देखा जाए तो जून 2017 के बाद से कच्चे तेल की कीमतें 44.52 डॉलर से बढ़कर 80.18 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई हैं। यानी कीमतों में 36 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा हो चुका है। वहीं, आगे इसमें और इजाफा होने का अनुमान है जो इकोनॉमी के लिए निगेटिव संकेत है। 

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