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भारत में दो साल में पैसा डबल, विदेशी कंपनी का हिट हुआ फॉर्मूला

ब्लैकस्टोन ने भारत में किए अपने एक निवेश पर हाल में दो साल में पैसा डबल किया है।

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नई दिल्ली. दुनिया की दूसरी बड़ी प्राइवेट इक्विटी कंपनी ब्लैकस्टोन ने भारत में किए अपने एक निवेश पर हाल में दो साल में पैसा डबल किया है। उतार-चढ़ाव भरे बाजार में किसी भी कंपनी द्वारा इतना रिटर्न हासिल करना हैरत में डालता है। हालांकि ब्लैकस्टोन के लिए यह कोई नई बात नहीं है। कंपनी का कमाई का फॉर्मूला भारत में इतना हिट हुआ है कि वह बीते 7-8 साल से भारत में सालाना 30 फीसदी रिटर्न कमा रही है। उसके लिए भारत दुनिया में सबसे ज्यादा कमाई वाला देश बन गया है।

 

 

यहां दो साल में डबल हुआ पैसा

दरअसल ब्लैकस्टोन ग्रुप ने 1484 करोड़ रुपए में भारत की आईटी कंपनी एमफैसिस की 8 फीसदी हिस्सेदारी बेची है। दिलचस्प यह है कि कंपनी ने महज दो साल के भीतर इस कंपनी में अपने निवेश को डबल किया है। पीई कंपनी एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ब्लैकस्टोन ने 926 रुपए प्रति शेयर की दर से एमफैसिस की 8 फीसदी हिस्सेदारी बेची है, जबकि अप्रैल, 2016 में उसने 430 रुपए प्रति शेयर और फिर 457 रुपए प्रति शेयर की दर से ओपन ऑफर लाकर 60 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। इस प्रकार पीई कंपनी ने बेची गई हिस्सेदारी पर महज दो साल के भीतर दोगुने से ज्यादा रिटर्न हासिल किया है।

 

 

भारत में कमा रही हर साल 30 फीसदी रिटर्न

ब्लैकस्टोन के लिए भारत सबसे ज्यादा कमाई कराने वाले देश के तौर पर सामने आया है। कंपनी अब बड़ी डील्स पर फोकस कर रही है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीई कंपनी 2011 के बाद से भारत में लगाए गए अपने पैसे पर सालाना 30 फीसदी की दर से रिटर्न हासिल कर रही है। यह रिटर्न दुनिया भर में उसके रिटर्न की तुलना में सबसे ज्यादा है। इसके बाद चीन का नंबर आता है, जहां ब्लैकस्टोन ने इस अवधि के दौरान सालाना 25 फीसदी रिटर्न हासिल किया है।

 

आगे पढ़ें - क्या है हिट फॉर्मूला

 

 

ब्लैकस्टोन के लिए हिट बना यह फॉर्मूला

ब्लैकस्टोन इंडिया के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर अमित दीक्षित ने हाल में एक रिपोर्ट में कहा, ‘कंपनी भारत में कंज्यूमर और इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी जैसे चुनिंदा सेक्टर्स पर फोकस कर रही है, जहां भारत में सबसे ज्यादा वेल्थ क्रिएट होने का अनुमान है।’ इससे कंपनी को ज्यादा रिटर्न हासिल करने में मदद मिली है।

दीक्षित के मुताबिक, 2011 से पहले तक कंपनी भारत में माइनॉरिटी स्टेक्स खरीदती थी, लेकिन उसके बाद कंपनी ने स्ट्रैटजी बदली और तब से कंपनी मेजॉरिटी स्टेक्स खरीद रही है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि कंपनी फाइनेंस, हैल्थकेयर और इंडस्ट्रियल जैसे अपनी डीप नॉलेज वाले एरियाज में ही ऐसा कर रही है।’

 
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