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कॉरपोरेट गवर्नेंस कड़े होने से ऑडीटर्स का बढ़ा इस्तीफा, लिस्टेड कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव

साल 2018 में ऑडीटर्स द्वारा लिस्टेड कंपनियों का साथ छोड़ने के मामले बढ़ गए हैं।

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नई दिल्ली। साल 2018 में ऑडीटर्स द्वारा लिस्टेड कंपनियों का साथ छोड़ने के मामले बढ़ गए हैं। जानकार इसके पीछे सरकार द्वारा कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर सख्‍ती और कंपनियों के अंदरूनी मामलों का वजह मान रह हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि कंपनियों द्वारा फाइनेंशियल स्टेटस की सही सूचना न मिलने पर ऑडीटर्स को अपनी जवाबदेही का डर है। जिसकी वजह से वे कंपनियों का साथ छोड़ने में हिचकिचाहट नहीं दिखा रहे हैं। इससे लिस्टेड कंपनियों पर आगे दबाव बढ़ेगा कि वे सही सूचना ऑडीटर्स तक पहुंचाएं। 

 

बता दें कि हाल के दिनों में मनपसंद बेवरेजेस, वकरांगी, अटलांटा के ऑडीटर्स ने इनका साथ छोड़ दिया है। इस साल 30 के करीब ऐसे मामले आ चुके हैं। आगे इस तरह के कई और इस्तीफे आ सकते हैं। जांच में सख्‍ती होने से ऑडीटर्स किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। नए कंपनी कानून के साथ आईसीएआई की सख्ती है। ऐसे में कोई ऑडिट कंपनी जोखिम लेने को तैयार नहीं है। इसी वजह से ऑडिट फर्म सावधानी बरत रही हैं। 

 

ऑडीटर्स अब पहले से ज्यादा मुखर हुए
RSM एसट्यूट कंसल्टिंग ग्रुप के सुरेश सुराना के अनुसार रेग्युलेटरी कंसर्न कह लें या कुछ और इनफॉर्मेशन रिक्वायरमेंट को लेकर ऑडीटर्स अब पहले से ज्यादा मुखर हो रहे हैं। कंपनी के वित्तीय स्थिति पर वे अब ज्यादा मुखरता से अपने विचार रखते हैं। चाहे वह एसेट इम्पेयरमेंट हो, नॉन प्रोविजनिंग रेवेन्यू हो या कोई और कंसर्न। उनका कहना है कि नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स और इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन को लेकर हाल ही में हुए डेवलपमेंट ने भी ऑडीटर्स की भूमिका को फोकस में ला दिया है। 

 

निवेशकों का हित सही रिपोर्ट पर 
इंडियन लॉयर एंड एलाइड सर्विसेज की चीफ कंसल्टेंट सुशीला राम वर्मा के अनुसार किसी कंपनी का सही फाइनेंशियल रिजल्ट निवेशकों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। फाइनेंशियल रिजल्ट देखकर कई बार निवेशक यह तय करते हैं कि कहां उनका निवेश सेफ हो सकता है। ऐसे में ऑडीटर्स की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि सुरेश सुराना के अनुसार स्टेक होल्डर्स को भी ऑडीटर्स और ऑडिट प्रॉसेस की लिमिटेशंस को समझना चाहिए। उन्हें यह भी समझना चाहिए कि ऑडीटर इंश्‍योरर नहीं होता है। 

 

क्यों दिया इस्तीफा
ऑडिट फर्म प्राइस वाटरहाउस ने हाल ही में टेक्नोलॉजी फर्म वकरांगी और अटलांटा का साथ छोड़ा है। वकरांगी का साथ छोड़ने के पीछे वजह यह है कि कंपनी ने अपने बुलियन और ज्वेलरी बिजनेस और इलेक्शन बुक को लेकर ऑडिट फर्म को पूरी जानकारी नहीं उपलब्ध करवाई। वहीं, अटलांटा ने इनकम टैक्स इनवेस्टिगेशन और इंडीपेंडेट डायरेक्टर्स के इस्तीफे को लेकर सही जानकारी नहीं दी। 
वहीं, ऑडिटिंग मेजर डेलोइट हैस्किन एंड सेल्स ने मनपसंद बेवरेजेज का साथ छोड़ दिया। इसके पीछे वजह यह रही कि कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2018 को लेकर सही जानकारी नहीं दी। 

 

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