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PNB फ्रॉड के बाद PSU बैंकों में निवेशकों के डूबे 56000 करोड़, स्टॉक्स से रहें दूर

PNB फ्रॉड सामने आने के बाद से 11 सरकारी बैंकों का मार्केट कैप में 56251 करोड़ रुपए की कमी आई है।

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नई दिल्ली। देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक में 12 हजार करोड़ से ज्यादा फ्रॉड का मामला आने के बाद सरकारी बैंकों के शेयरों में लगातार गिरावट है। 14 फरवरी को फ्रॉड सामने आने के बाद से 11 सरकारी बैंकों का मार्केट कैप में 56251 करोड़ रुपए की कमी आई है। सबसे ज्यादा नुकसान पंजाब नेशनल बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकारी बैंकों में आइटलुक न्यूट्रल बन गया है। कम से कम अगले 2 तिमाही तक सेक्टर पर दबाव रहेगा। फिलहाल नए निवेशकों को स्टॉक से दूर रहने और जिन्होंने निवेश किया है, उन्हें उसमें बने रहने की सलाह है। 

 

 

किस बैंक में निवेशकों के कितने डूबे

SBI 22490 करोड़ रुपए
PNB 14553 करोड़ रुपए 
बैंक ऑफ बड़ौदा 6924 करोड़ रुपए 
केनरा बैंक 2231 करोड़ रुपए 
आंध्रा बैंक 309 करोड़ रुपए 
बैंक ऑफ इंडिया 3770 करोड़ रुपए 
इंडियन बैंक 1868 करोड़ रुपए
एलाहाबाद बैंक 760 करोड़ रुपए
सिंडिकेट बैंक 520 करोड़ रुपए
OBC 478 करोड़ रुपए 

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया

2049 करोड़ रुपए 


एक महीने में 42% तक टूटे शेयर

पिछले एक महीने में निफ्टी पर पीएसयू बैंक इंडेक्स में 18 फीसदी से ज्यादा गिरावट रही है। सबसे ज्यादा गिरावट पीएनबी के शेयर में 42 फीसदी रही है। एसबीआई  में 16 फीसदी, बैंक ऑफ बड़ौदा में 15 फीसदी, केनरा बैंक में 16 फीसदी, आंध्रा बैंक में 16 फीसदी, बैंक ऑफ इंडिया में 31 फीसदी, इंडियन बैंक में 14 फीसदी, एलाहाबाद बैंक में 25 फीसदी, सिंडिकेट बैंक में 19 फीसदी, ओबीसी में 18 फीसदी और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 25 फीसदी गिरावट रही है। सिर्फ आईडीबीआई में 28 फीसदी की तेजी रही है। 

 

न्यूट्रल हुआ PSU बैंक सेक्टर का आउटलुक 
कैपिटेल सिंडिकेट के डायरेक्टर पशुपति सुब्रमण्‍यम का कहना है कि पीएसयू बैंकों में अभी अनिश्चितता बनी हुई है। पहले एनपीए और मैनेजमेंट का इश्‍यू था, वहीं अब पीएसयू बैंकों में घोटाले सामने आने लगे हैं। ये घोटाले कहां तक जाएंगे, अभी पता नहीं चल रहा है। फ्रॉड के मामले आने से सरकार के भी उन प्रयासों को झटका लगा है, जिनके जरिए सरकारी बैंकों के रिवाइवल का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल बैंकों का आउटलुक न्यूट्रल बन गया है। 

आगे पढ़ें, क्या करें निवेशक....

 

क्या करें निवेशक
पशुपति का कहना है कि अभी कम से चौथी तिमाही तक तो सरकारी बैंकों पर दबाव बना रहेगा। आगे उनकी अर्निंग कैसी रहती है, सरकार रिवाइवल के लिए और क्या करती है, बैड एसेट्स की दिक्कत कैसे दूर होती है, इन सभी बातों पर ही बैंकों का आउटलुक निर्भर है। फिलहाल नए निवेश को लेकर स्टॉक से निवेशकों को दूर रहना चाहिए। वहीं, जिनके पास पहले से बैंकों के शेयर हैं, उन्हें अभी होल्ड कर रिकवरी का इंतजार करना चाहिए। 

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