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जरूरत पर तुरंत मिलेगा पैसा, SIP-इंश्योरेंस पॉलिसी से उठाएं एक्सट्रा फायदा

म्‍युचुअल फंड और लाइफ इंश्‍योरेंस पॉलिसी के जरिए भी आप लोन हासिल कर सकते हैं।

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नई दिल्‍ली. अक्‍सर ऐसा होता है कि हमें इमरजेंसी में पैसों की जरूरत होती है। इसके लिए हम अपने दोस्‍तों या रिश्‍तेदारों से उधार मांगना पड़ता है, लेकिन कई बार उनसे भी नहीं मिल पाता है। ऐसे में शर्मिंदगी तो उठानी ही पड़ती है साथ ही पैसे न मिल पाने से काम भी बिगड़ जाता है। इसलिए जब भी ऐसी स्थिति आए तो अपनी म्‍युचुअल फंड और इंश्‍योरेंस पॉलिसी की मदद लें।

 

कम ही लोगों को पता होगा कि म्‍यूचुअल फंड और लाइफ इंश्‍योरेंस पॉलिसी के जरिए भी आप लोन हासिल कर सकते हैं। ये लोन आपको आपकी इंश्‍योरेंस कंपनी, NBFC या फिर बैंक से प्राप्‍त हो सकता है। आइए आपको बताते हैं कि आप म्‍युचुअल फंड और इंश्‍योरेंस के बदले कैसे और कितने तक का लोन मिल सकता है।

 

म्युचुअल फंड पर कैसे मिलता है लोन

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की गाइडलाइंस के अनुसार, आपको इस प्रकार का लोन लेने के लिए बैंक या फाइनेंस कंपनी के पास अपनी म्युचुअल फंड यूनिट्स को गिरवी रखना पड़ेगा। म्‍युचुअल फंड की यूनिट्स के नेट आसेट वैल्‍यू (एनएवी) के आधार पर आपको लोन मिलेगा। बैंक या कंपनी आपको एक साल तक के लिए लोन देंगे, जो आपको इसी पीरियड में चुकाना होगा।

 

पॉलिसी पर कितना होगा लोन का अमाउंट

अगर आप इंश्‍योरेंस पॉलिसी पर लोन ले रहे हैं तो आपको कितना लोन मिलेगा, यह पॉलिसी के टाइप और उसकी सरेंडर वैल्‍यू पर निर्भर करता है। सरेंडर वैल्‍यू वह है, जो पॉलिसी पीरियड खत्‍म होने से पहले पॉलिसी बंद करने पर इंश्‍योरेंस कंपनी आपको देती है। आपको मनीबैक या इंडाओमेंट इंश्‍योरेंस के मामले में सरेंडर वैल्‍यू का 80 से लेकर 90 फीसदी अमाउंट लोन के तौर पर मिल सकता है। वहीं, कुछ इंश्‍योरेंस कंपनियां भुगतान किए गए कुल प्रीमियम के 50 फीसदी को आधार बनाकर लोन के मैक्सिमम अमाउंट को कैलकुलेट करती हैं। 


आगे पढ़ें- किन पॉलिसी पर नहीं मिलता लोन

इन पॉलिसी पर नहीं मिलेगा लोन

बता दें कि इंश्‍योरेंस के बदले लोन की सुविधा ऐसे टर्म इंश्‍योरेंस या यूलिप्‍स पर उपलब्‍ध नहीं है, जो इक्विटी या इक्विटी ओरिएंटेड सिक्‍योरिटीज में इन्‍वेस्‍ट हों।

 

कौन से डॉक्‍युमेंट्स होते हैं जरूरी

 

पॉलिसी पर लोन लेने के लिए पॉलिसी होल्‍डर को एक एप्‍लीकेशन फॉर्म भरना होता है। इस फॉर्म के साथ आपको ऑरिजनल पॉलिसी डॉक्‍यूमेंट लगाना होता है। इसके अलावा कैंसिल्‍ड चेक की कॉपी भी लगानी होती है। लोन देते समय इंश्‍योरेंस कंपनी या फाइनेंसिंग इंस्‍टीट्यूशन आपसे लोन प्रोसेसिंग फीस ले सकते हैं।

 

पर्सनल लोन से कम इंटरेस्‍ट


- आमतौर पर इंश्‍योरेंस पॉलिसी और म्‍युचुअल फंड पर मिलने वाले लोन पर इंटरेस्‍ट रेट पर्सनल लोन से कम होती है। पॉलिसी के मामले में अगर लोन पर बकाया इंटरेस्‍ट सरेंडर वैल्‍यू से ज्‍यादा हो जाता है तो पॉलिसीहोल्‍डर के लिए इंश्‍योरेंस कवर खोने का खतरा पैदा हो जाता है। इसलिए कोशिश करें कि आपका इंटरेस्‍ट बकाया न रहे। 

 

- म्‍युचुअल फंड पर बैंक और NBFC कंपनियां लोन अमाउंट, फंड में मौजूद यूनिट्स की NAV और आपके द्वारा पहले लिए गए किसी लोन की रिपेमेंट हिस्‍ट्री को देखकर इंटरेस्ट लेती हैं।

 

आगे पढ़ें- लोन नहीं चुकने तक नहीं बेच सकते म्‍युचुअल फंड

लोन चुकाने तक बेच नहीं सकते म्‍युचुअल फंड 


म्‍युचुअल फंड पर लोन लेने पर आप जब तक अमाउंट चुका नहीं देते, तब तक आप म्‍युचुअल फंड बेच नहीं सकते है। अगर ऐसा करना चाहते हैं तो आपको बैंक से संपर्क करना होगा। बैंक आपकी म्‍युचुअल फंड स्‍कीम को बेचकर पैसा लेगा और लोन अमाउंट काट कर बचा हुआ पैसा आपको लौटा देगा।

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