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लोन लेकर शुरू किया बकरी पालन का बिजनेस, अब हर महीने 75 हजार कर रहा है कमाई

12 लाख रुपए लोन लेकर शुरू किया था बिजनेस।

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नई दिल्ली. एक ओर जहां नौजवान आईटी और मेडिकल में अपना करियर बनाने पर जोर दे रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे भी नौजवान हैं जो खेती और पशुपालन को अपनी आजीविका का साधन बना एक मिसाल खड़ा कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के सिहोर जिले के मट्ठागांव के रहने वाले तरुण कुमार यादव ऐसे ही युवा हैं, जिन्होंने एग्रीकल्चर में स्नातक करने के बाद बकरी पालन (Goat Farming) का बिजनेस शुरू किया। आज वह इसके जरिए सालाना 9 लाख रुपए का कमाई कर रहे हैं। साथ ही स्थानीय लोगों को नि:शुल्क प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।

 

बकरी ने बदली किस्मत

तरुण ने मनीभास्कर से बातचीत में बताया कि एग्रीकल्चर में ग्रैजुएशन करने के बाद उन्हें गांव में रहकर ही कुछ करने के बारे में ख्याल आया। उन्होंने देखा कि बाजार में बकरी के मांस की डिमांड ज्यादा है। बकरी और इसके प्रोडक्ट्स की डिमांड को देखते हुए उन्होंने बकरी पालन करने का फैसला किया। बकरियों में खासकर सिरोही ब्रीड की बकरी बि‍जनेस के लि‍हाज से काफी फायदे का सौदा मानी जाती है। इसका नाम राजस्‍थान के सि‍रोही जि‍ले के नाम पर पड़ा है। इस बकरी की खासि‍यत यह है कि‍ यह विपरीत मौसम में भी पल बढ़ जाती है। इसलिए उन्होंने सिरोही के साथ जमनापारी औऱ सोजट ब्रीड की बकरियों का पालन शुरू किया और आज वह इससे अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं।

 

 

खासतौर पर मीट के लि‍ए पालते हैं बकरी

सिरोही बकरी को खासतौर पर मीट के लि‍ए पाला जाता है। हालांकि‍ यह दूध भी ठीक-ठाक देती है। आम तौर पर सि‍रोही बकरी आधा लीटर से लेकर 700 एमएल तक दूध देती है। इसकी दो बड़ी खासि‍यत हैं एक तो यह गर्म मौसम को आराम से झेल लेती हैं और दूसरे यह बढ़ती बहुत तेजी से हैं। इसकी एक और खासि‍यत यह है कि‍ इस बकरी के वि‍कास के लि‍ए इसे चारागाह वगैरा में ले जाने की जरूरत बि‍ल्‍कुल नहीं है। यह बकरी फार्म में ही अच्‍छे से पल बढ़ सकती है। आम तौर पर एक बकरी का वजन 33 कि‍लो और बकरे का वजन 30 कि‍लो तक होता है।


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बैंक से लोन ले शुरू किया बकरी पालन

तरुण ने कहा, ग्रैजुएशन करने के बाद उन्होंने सरकारी संस्था एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस सेंटर्स स्कीम से मध्य प्रदेश में ही दो महीने की ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग के दौरान उद्यमशीलता स्किल डेवलप होने के बाद उन्होंने 2011 में 'कीर्ति एग्रोनॉमिक्स एंड लाइवस्टॉक फार्म' की नींव रखी। इसके लिए उन्होंने ग्रामीण बैंक से 12 लाख रुपए का लोन लिया। इसमें से 5 लाख रुपए बकरी खरीदने पर खर्च हुए और बाकी शेड्स के निर्माण और अन्य चीजों पर खर्च हुए।

 

 

350 से 400 रुपए प्रति किलो है बकरी की कीमत

उनका कहना है कि मोटे तौर 6 महीने में एक बकरी 20 किलो की तैयार हो जाती है। बाजार में इसकी कीमत 350 रुपए प्रतिकिलो है। दो-तीन बकरियां खरीदने वाले को वह 400 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से बेचते हैं। उनका दावा है कि वो बकरी को पूरी तरह वैक्सीन करके देते हैं। ताकि बकरी खरीदने वाले इसका पालन अच्छी तरह कर सकें।

 

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ऐसे होती है कमाई

तरुण के मुताबिक, कीर्ति एग्रोनॉमिक्स एंड लाइवस्टॉक्स फार्म का सालाना टर्नओवर 15 लाख रुपए है। वो बकरी की ब्रीडिंग के अलावा बकरी पालन की ट्रेनिंग भी देते हैं। इसके अलावा अगर किसी को बकरी पालन का बिजनेस शुरू करना है तो वो उसके लिए पूरा प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर देते हैं। साथ ही यदि वह शख्स सेटअप भी करना चाहता है, तो इसमें भी वह उसकी मदद करते हैं। इसके लिए वह कुछ चार्ज लेते हैं। ट्रेनिंग के लिए वह कमर्शियल लेवल पर 3 दिन के लिए 5 हजार रुपए प्रति व्यक्ति चार्ज करते हैं। वहीं एग्री बिजनेस की क्लास भी लेते हैं। पिछले साल उन्होंने बिजनेस से 9 लाख रुपए का मुनाफा कमाया था।

 

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