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गली-गली घूम साड़ी बेचने वाला बन गया 50 करोड़ की कंपनी का मालिक, कभी 2.50 रु दिहाड़ी पर करता था काम

बसाक ने अपना घर गिरवी रखकर 10 हजार रुपए का लोन ले शुरू किया था बिजनेस।

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नई दिल्ली. कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो गरीबी या किसी तरह की मजबूरी भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती है। यह कहावत कोलकाता के रहने वाले बिरेन कुमार बसाक पर बिल्‍कुल सटीक बैठती है। चार दशक पहले बिसाक अपने कंधे पर साड़ियों का बंडल लादकर गली-गली घूम हरेक घर का दरवाजा खटखटाकर साड़ी बेचा करते थे, तो कभी एक बुनकर के यहां 2.50 रुपए दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का काम किया करते थे। लेकिन आज वो अपनी मेहनत के दम पर बिरेन बसाक एंड कंपनी के मालिक बन गए हैं, जिसका सालाना टर्नओवर 50 करोड़ रुपए है।

 

गरीबी में गुजरा बचपन

बिरेन कुमार बसाक ने मनीभास्कर को अपनी संघर्ष की कहानी बताई। उन्होंने बताया कि उनका बचपन काफी गरीबी में गुजारा। बुनकर के परिवार में जन्मे बसाक के पिता के पास उतने पैसे नहीं थे कि परिवार का भरण-पोषण हो सके। उनके परिवार के पास एक एकड़ जमीन थी जिस पर अनाज उपजाकर कुछ खाने को मिल जाता था। पैसे की वजह से वो ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाए।

 

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2.50 रुपए दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का किया काम 

 

उन्होंने बताया, कोलकाता के नादिया जिले के फुलिया में उन्हें एक बुनकर के यहां 2.50 रुपए दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का काम मिला। इस कंपनी में उन्होंने करीब 8 साल काम किए। इसके बाद उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू करने की ठानी और इसके लिए अपना घर गिरवी रखकर 10 हजार रुपए का लोन उठाया। अपने बड़े भाई के साथ मिलकर वो बुनकर के यहां से साड़ी खरीद कर उसे बेचने के लिए कोलकाता जाते थे। कुछ सालों तक यही सिलसिला चलता रहा। इस बिजनेस में कमाई होने लगी और दोनों भाई मिलकर करीब 50 हजार रुपए हरेक महीने कमाने लगे थे।

 

उन्होंने 1987 में साड़ी की अपनी पहली दुकान खोली। उस वक्त उनके पास सिर्फ 8 लोग काम करते थे। धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ता गया। आज वो हर महीने हाथ से बनी 16 हजार से ज्यादा साड़ियां देश भर में बेच रहे  हैं। यहीं नहीं, अब उनके यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 24 हो गई और वो करीब 5 हजार बुनकरों के साथ काम कर रहे हैं।


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भाई से अलग होकर शुरू किया बिजनेस

 

कमाई बढ़ने के साथ बसाक और उनके भाई ने कोलकाता में एक दुकान खरीदी और साड़ियां बेचने का काम शुरू किया। अगले एक साल में उनकी दुकान का टर्नओवर 1 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। लेकिन जल्दी ही वो अपने भाई से अलग होकर गांव लौट गए और यहीं पर साड़ी बेचने का बिजनेस शुरू किया। फिर उन्होंने बिरेन बसाक एंड कंपनी की नींव रखी। बुनकरों से साड़ियां खरीद होलसेल रेट में साड़ी डीलर को बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ता गया और अब उनकी कंपनी का टर्नओवर 50 करोड़ रुपए हो गया है।

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