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माल्या की नौकरी करता था यह शख्स, खड़ा किया दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शराब ब्रांड

हम यहां आपको छाबड़िया के लिकर किंग बनने के सफर के बारे में बता रहे हैं...

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नई दिल्ली.  वैसे तो शराब की बिक्री पूरे साल रहती है, लेकिन कुछ अवसरों पर इसकी बिक्री बढ़त जाती है, खासकर पर्व-त्योहारों जैसे होली पर। मौजूदा समय में बाजार में शराब के हजारों ब्रांड हैं। लेकिन केवल कुछ ही इतिहास में अपना दर्ज करवा सकते हैं। उनमें से एक ब्रांड है ऑफिसर्स च्वॉइस। इस ब्रांड को इस मुकाम तक पहुंचाने वाला शख्स कभी "किंग्स ऑफ गुड टाइम्स" कहने जाने विजय माल्या की नौकरी करता था। आज माल्या कहां हैं और यह शख्स कहां पहुंच गया। इस शख्स का नाम है- किशोर राजाराम छाबड़िया। आज छाबड़िया देश के लिकर किंग बन चुके हैं। हम यहां आपको छाबड़िया के लिकर किंग बनने के सफर के बारे में बता रहे हैं...

 

दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्प्रिट ब्रांड के चेयरमैन हैं छाबड़िया
 
आज छाबड़िया दुनिया की दूसरी टॉप लिकर कंपनी अलॉयड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स (एबीडी) के चेयरमैन हैं। इस कंपनी के पास देश के कई टॉप ब्रांड के स्वामित्व हैं। ऑफिसर्स च्वॉइस दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाली व्हिस्की और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्प्रिट्स ब्रांड है।
 
आगे पढ़ें- किशोर के पास है दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा व्हिस्की ब्रांड 

एबीडी के पास है दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा व्हिस्की ब्रांड 
 
देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली व्हिस्की ऑफिसर्स च्वॉइस छाबड़िया की कंपनी का ही ब्रांड है। अल्कोहलिक बेवरेज मार्केट की अग्रणी एनालिसिस कंपनी आईडब्ल्यूएसआर के मुताबिक, ऑफिसर्स च्वॉइस दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाला व्हिस्की है। यही नहीं, साउथ कोरिया के सोजू जिनरो के बाद दुनिया का दूसरे सबसे बड़ा स्प्रिट्स ब्रांड है।  आईडब्ल्यूएसआर के अनुसार, 2017 में कंपनी ने 3.29 करोड़ कैसज बेचे हैं। दुनिया के 155 देशों में इस ब्रांड की बिक्री है।
 
ये हैं कंपनी के प्रमुख ब्रांड
 
- ऑफिसर्स च्वॉइस
- ऑफिसर्स च्वॉइस ब्लू
- ऑफिसर्स च्वॉइस ब्लैक
- वोदका गोरबात्सकॉउ
- जॉली रोजर रम
- ऑफिसर्स च्वॉइस ब्रांडी
- लॉर्ड एंड मास्टर ब्रांडी

 

आगे पढ़ें- कभी 7500 रुपए महीने की नौकरी करते थे छाबड़िया

7,500 रुपए की नौकरी करते थे किशोर छाबड़िया
 
किशोर छाबड़िया के लिए 80 से 90 दशक के बीच का दौर ऐसा था, जब वह मामूली नौकरी करते थे। हालांकि, वह उस दौर के बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट मनु छाबड़िया के भाई थे, लेकिन उनके बिजनेस एंपायर में किशोर की कोई भागीदारी नहीं है। किशोर अपने भाई मनु की कंपनी बीडीए में 7,500 रुपए महीने पर नौकरी करते थे। उनके पास कंपनी का एक भी शेयर नहीं था। किशोर छाबड़िया ने अपने परिवार की सिक्युरिटी के लिए भाई मनु से कुछ करने के लिए कहा। कई बार मनाने पर मनु ने 1990 के दशक में उन्हें बीडीए दे दी, जो शराब के कारोबार से जुड़ी छोटी-सी और सेमी डिफंक्ट (मृत) कंपनी थी। मनु के पास उस दौर की बड़ी कंपनी शॉ वैलेस कंपनी (एसडब्ल्यूसी) का स्वामित्व था।
 
आगे पढ़ें- किशोर की सफलता से घबड़ाया बड़ा भाई मनु

किशोर की स्ट्रैटजी इतनी शानदार रही कि उन्होंने उस मृत-सी कंपनी बीडीए को पटरी पर ला दिया। इस कंपनी का डायरेक्टर स्पेशल तो देश के टॉप ब्रांडों में शुमार होने लगा। इसकी सफलता ने बड़े भाई मनु को डरा दिया। मनु ने फिर बीडीए का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिशें शुरू कर दीं और छोटे भाई किशोर को एक अन्य कंपनी की पेशकश की।

 

भाई के खिलाफ किशोर ने मिलाया माल्या से हाथ

किशोर इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं थे। उन्होंने उन हालात में अपने भाई मनु के बिजनेस राइवल विजय माल्या से हाथ मिलाना ही ठीक समझा। इस प्रकार किशोर बीडीए को माल्या ग्रुप में ले गए, जिसके एवज में उन्हें हर्बर्ट सन्स (माल्या की एक कंपनी) की 26 फीसदी हिस्सेदारी मिली।

 

आगे पढ़ें- माल्या-किशोर में हुई कंट्रोल करने की होड़

माल्या और किशोर के बीच क्यों ठनी

माल्या की मंशा किशोर को कंपनी का कंट्रोल देने की नहीं थी और उन्हें कोई जिम्मेदारी भी नहीं दी गई। किशोर काम में शुरू से तेज थे, इसलिए कंपनी चलाने को लेकर उनके माल्या से भी जल्द ही मतभेद होने लगे। दोनों के बीच कंपनी को कंट्रोल में लेने की होड़ शुरू हो गई। किशोर को खबर मिली कि माल्या ने ओपन मार्केट से हर्बर्ट सन्स के शेयर खरीदने शुरू कर दिए हैं। किशोर भी पीछे नहीं रहे, उन्होंने भी शेयर खरीदने शुरू कर दिए। आखिरकार, किशोर हर्बर्ट सन्स की 51 फीसदी हिस्सेदारी लेने में कामयाब रहे और कंपनी का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की स्थिति में आ गए। इसके बाद माल्या और किशोर दोनों के बीच हर्बर्ट सन्स का कंट्रोल हासिल करने के लिए कानूनी जंग शुरू हो गई। 

 

आगे पढ़ें- माल्या से जीती से कानूनी लड़ाई

किशोर आखिरकार कानूनी लड़ाई जीतने में कामयाब रहे। 2005 में हर्बर्ट सन्स और 7 अन्य कंपनियों का यूएसएल में विलय हो गया। इसके एवज में किशोर को माल्या से 130 करोड़ रुपये की मोटी रकम मिली। इसके साथ ही, किशोर शराब कंपनी बीडीए का मालिकाना हक पाने में कामयाब रहे, जिसके पास देश की दूसरी सबसे ज्यादा बिकने वाली व्हिस्की ऑफिसर्स च्वॉइस का स्वामित्व था। 2007 में कंपनी का डिमर्जर हुआ और कंपनी का नाम बदलकर एबीडी (अलायड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स) हो गया।

 

देश की टॉप लिकर कंपनी है एबीडी
 
रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में अलॉयड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स की रिटेल वैल्यू 14,950 करोड़ रुपए (230 करोड़ डॉलर) रहा। देश में कंपनी का मुख्य बाजार तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र है। इसकी सफलता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि देश भर के ओसी फ्रेंचाइजी में इस ब्रांड की 30 बोतलें प्रत्येक सेकंड में बिकती है।

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