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पेड़ों से पैसा उगाता है यह शख्स, हर महीने कमाता है 5 लाख रुपए

पेड़ों को बचाने के लिए छोड़ी नौकरी, खड़ा किया करोड़ों का कारोबार।

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नई दिल्ली।  तेजी से बढ़ते शहरीकरण, सड़कों के चौड़ीकरण और मेट्रो के निर्माण के लिए पेड़ों को काट दिया जा रहा है। पेड़ों के कटने से पर्यावरण असंतुलित हो रहा है। पेड़ों के कटने से बचाने और उसको नया जीवदान देने के लिए हैदराबाद निवासी रामचंद्र अप्पारी ने सिर्फ अपनी नौकरी छोड़ी बल्कि उसने हरियाली को उजड़ने से बचाने का स्थाई तरीका ढूंढा और पर्यावरण के बचाव को बिजनेस की शक्ल देकर करोड़ों का कारोबार भी खड़ा किया। अब यह शख्स पेड़ों के नया जीवन देने के साथ मंथली 5 लाख रुपए की कमाई कर रहा है। 

 

कैसे हुई शुरुआत

हैदराबाद निवासी रामचंद्र अप्पारी ने मनीभास्कर को बताया कि हैदराबाद में सड़क चौड़ीकरण के दौरान पेड़ों की कटाई हो रही थी। यहीं से उनके मन में आया कि इन पेड़ों को कटने से बचाने का कोई तो तरीका होगा। पेड़ों को काटने की बजाए इसे दूसरे स्थान पर शिफ्ट करना एक विकल्प है क्योंकि शिफ्टिंग से एक ओर जहां पेड़ कटने से बच जाएंगे, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संतुलन भी बना रहेगा। इसके लिए उन्होंने ट्रांसलोकेशन के बारे में अध्ययन और रिसर्च किया। फिर पेड़ों का ट्रांसलोकेशन करने का आइडिया मिला।

 

पेड़ों को बचाने के लिए छोड़ी नौकरी

रामचंद्र ने एग्रीकल्चर में मास्टर डिग्री ली है और एग्री बिजनेस में एमबीए किया है, लेकिन कैंपस प्लेसमेंट में उनकी नौकरी एक प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में लगी। इस कंपनी में उन्होंने 3 साल काम किया, लेकिन उनका मन यहां नहीं लगा। आठ साल तक एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने के बाद उससे अलग कुछ करना उन्हें समझ नहीं आ रहा था, इसीलिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। रामचंद्र ने ग्रीन मॉर्निंग हॉर्टीकल्चर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी बनाई है जो पेड़ों के ट्रांसलोकेशन यानी एक जगह से हटाकर दूसरी जगह पर लगाने का काम करती है। ट्री-ट्रांसलोकेशन एक प्रक्रिया है जिसमें पेड़ को काटने के बजाय उसे जड़ से उखाड़ लिया जाता है और फिर दूसरी जगह पर उसे जैसे का तैसा लगा दिया जाता है।

 

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हैदराबाद मेट्रो से मिला पहला काम

 

हैदराबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के अंतर्गत जब काम शुरू हुआ तब रामचंद्र की कंपनी ने प्रस्तावित ट्रैक पर गिरने वाले पेड़ों को स्थानांतरित करने के लिए कहा। इस दौरान हमने 800 पेड़ों को एक जगह से हटाकर दूसरी जगह लगाया और इस दौरान हमारी कंपनी सबकी नज़रों में आ गई। रामचंद्र कहते हैं कि नए पौधे लगाना जरूरी है लेकिन पुराने पेड़ों को कटने से बचाना भी उतना ही ज़रूरी है। ट्रांसलोकेशन से पेड़ 4 से 5 साल में फिर से पूरी तरह बड़ा हो जाता है। 

 

ऐसे होती है शिफ्टिंग

 

रामचंद्र अपने काम से अबतक 7000 से ज्यादा पेड़ों को नया जीवन दे चुके हैं। उनका बिजनेस देश भर में फैला है। पेड़ को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने के दौरान काफी सावधानी रखनी होती है। पेड़ के चारों ओर एक मीटर के दायरे में 3 फीट तक गड्ढा खोदा जाता है। इसके बाद पेड़ को निकालकर ट्रांसपोर्ट द्वारा दूसरे स्थान पर भेजा जाता है, जहां उसे दोबारा लगाना है। पेड़ की जड़ों पर रूट प्रोमोटिंग हार्वेस्ट केमिकल लगाया जाता है ताकि पेड़ बढ़ सके।

 

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10 हजार से 1 लाख होता है खर्च

 

रामचंद्र कहते हैं कि एक पेड़ को शिफ्ट करने का कॉस्ट पेड़ की साइज, दूसरी जगह पेड़ को शिफ्ट करने की दूरी आदि फैक्टर्स पर निर्भर करता है। रामचंद्र बताते हैं कि इसकी शुरुआत 10 हजार रुपए से होती है, लेकिन हम एक पेड़ के लिए 1 लाख रुपए भी चार्ज करते हैं।

 

खड़ा किया करोड़ों का बिजनेस

 

2009 में शुरू हुई उनकी कंपनी का बिजनेस अब करोड़ों में हो गया है। पिछले साल कंपनी का टर्न ओवर 2.5 करोड़ रुपए था। रामचंद्र कहते हैं कि टर्नओवर पर 25% तक प्रॉफिट हो जाता है। उनका दावा है कि इस तरह का बिजनेस देश में शुरू करने वाले वो पहले शख्स हैं।

 

कैसे मिलता है काम

वो बताते हैं कि सरकारी टेंडर के जरिए या फिर प्राइवेट कंपनियों के जरिए उनको काम मिलता है। देश में इस तरह के काम करने वाले गिने-चुने 4-5 फर्म ही हैं।

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