Home » Market » Stockshe earned over Rs 1 lakh monthly after left Rs 15000 job

वर्मीकम्पोस्ट बनाकर हर महीने 1.5 लाख रु कमा रहे हैं पुरुषोत्तम, सरकारी ट्रेनिंग के बाद शुरू किया था कारोबार

15 हजार की नौकरी छोड़ने के बाद शुरू किया था अपना बिजनेस।

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नई दिल्ली.  एक ओर जहां युवा इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट में अपना करियर बनाने पर जोर दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे शख्स हैं जो खेती-बाड़ी में हाथ आजमा रहे हैं। इस क्षेत्र में वो न सिर्फ अपना करियर बना रहे हैं, बल्कि अच्छी-खासी कमाई भी कर रहे हैं। बिहार के रहने वाले कुमार पुरुषोत्तम ऐसे ही शख्स है जिन्होंने 15 हजार की नौकरी छोड़ वर्मीकम्पोस्ट (केंचुए से खाद) बनाने का अपना बिजनेस शुरू किया और आज वो मंथली 1.50 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं। खास बात ये है कि उन्होंने अपना बिजनेस सरकारी ट्रेनिंग लेने के बाद शुरू किया था।

 

नौकरी छोड़ शुरू किया बिजनेस

बिहार शरीफ के रहने वाले कुमार पुरुषोत्तम ने मनीभास्कर को बताया कि उन्होंने एग्रीकल्चर से ग्रैजुएशन किया है। फिर 1999 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एमएससी किया। M.Sc करने के बाद 15 हजार रुपए की मंथली सैलरी पर एनजीओ से करियर की शुरुआत की। यहां काम से उनको काफी अनुभव प्राप्त हुआ। काम का अनुभव होने के बाद अपना बिजनेस शुरू करने का मन बनाया, लेकिन क्या और कैसे शुरू करना यह उनको पता नहीं था। बिजनेस शुरू करने का आइडिया सरकारी ट्रेनिंग के बाद आया था।

 

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सरकारी ट्रेनिंग का उठाया फायदा

 

पुरुषोत्तम ने बताया कि इस दौरान उनको सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाए जा रहे ट्रेनिंग प्रोग्राम के बारे में पता चला। उन्होंने झारखंड में एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस सेंटर्स से दो महीने की ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग के दौरान उनको स्किल डेवलपमेंट और मैनेजेरियल स्किल्स एक्टिविटी की जानकारी मिली। यहीं से वर्मीकम्पोस्ट की मांग और कंसल्टेंसी सर्विसेज के फायदे को देखते हुए 2007 में उन्होंने कुमार वर्मीकम्पोस्ट की शुरुआत की।

 

लोन लेकर की शुरुआत

पुरुषोत्तम में कहा कि वर्मीकम्पोस्ट की शुरुआत के लिए उन्होंने पहले 10 लाख रुपए लोन लेने का प्लान बनाया था, लेकिन बजट बढ़ने की वजह से लोन रकम 20 लाख रुपए तक पहुंच गया। इस लोन पर उनको सरकार की तरफ से सब्सिडी भी मिली। उनका कहना है कि लोन अधिकांश हिस्सा चुकता कर दिया है। अभी करीब 1.50 लाख रुपए तक का लोन बकाया है।

 

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सालाना 300 टन वर्मीकम्पोस्ट का है प्रोडक्शन

 

कुमार वर्मीकम्पोस्ट यूनिट झारखंड की राजधानी रांची में स्थित है। उनका कहना है कि वो सालाना 300 टन वर्मीकम्पोस्ट का प्रोडक्शन कर रहे हैं, जो इसे बढ़ाकर 500 टन सालाना करना चाहते हैं। 200 टन के अतिरिक्त प्रोडक्शन के लिए वो यूनिट की संख्या बढ़ा रहे हैं। उनका बिजनेस फिलहाल झारखंड तक ही सीमित हैं। लेकिन वो अब अपना बिजनेस बिहार में भी बढ़ाना चाहते हैं।

 

गोबर से बनाता है वर्मीकम्पोस्ट

वर्मीकम्पोस्ट को बनाने में गोबर का इस्तेमाल ज्यादा होता है। इसके अलावा सड़े-गले पत्ते, स्ट्रा आदि को गोबर में मिक्स करने के बाद उसमें केंचुओं को डाला जाता है। केंचुए का अपशिष्ट वर्मीकम्पोस्ट कहलाता है।

 

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मंथली 1.5 लाख रुपए है इनकम

 

उन्होंने 1000 से ज्यादा वर्मीकम्पोस्ट प्रोडक्शन यूनिट स्थापित करने में किसानों की मदद की है। उनकी कंपनी किसानों को प्रशिक्षित करने के साथ केंचुए की सप्लाई भी करती है। उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 85 लाख रुपए है। जिस पर उनको सारे खर्च घटाकर 20 फीसदी का प्रॉफिट हो जाता है। इस हिसाब से वो हर महीने करीब 1.50 लाख रुपए की इनकम कर लेते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी कंपनी में लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करवाए हैं।

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