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पौधों का 'टॉनिक' बनाकर 50 हजार रु मंथली कमा रहे हैं हरिदास, सरकारी ट्रेनिंग के बाद 1 लाख में शुरू किया था कारोबार

हरिदास अंगूर की खेती के साथ अन्य फलों की खेती करते हैं।

he developed plant growth regulator and earns Rs 50000 monthly

नई दिल्ली.  जिस तरह इंसान को नूट्रीएंट्स की जरूरत होती है, उसी तरह से पौधों को भी बढ़ने के लिए कुछ नूट्रीएंट्स की जरूरत होती है। अगर ये नूट्रीएंट्स एक निश्चित समय तक न मिलें तो पौधा सूख जाता है। किसानों के साथ खुद इस परेशानी का सामना करने वाले हरिदास कुंभर ने पौधों के लिए एक खास 'टॉनिक' तैयार करने की सोची और फिर कई सालों के रिसर्च के बाद प्लांट ग्रोथ रेग्युलेटर्स (PGR) बनाने में सफलता हासिल की। इसके लिए उन्होंने सरकार के एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस सेंटर से ट्रेनिंग ली और सिर्फ 1 लाख निवेश कर अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं।

 

कैसे मिला 'टॉनिक' बनाने का आइडिया

महाराष्ट्र के सांगली जिले के निवासी हरिदास कुंभर ने मनी भास्कर को बताया कि वो खुद अंगूर की खेती करते हैं। खेती के दौरान उन्होंने गौर किया कि जितनी मेहनत वो कर रहे हैं, उस हिसाब से उनको रिटर्न नहीं मिल रहा है। समय पर खाद, पानी देने के बावजूद पौधे अच्छी तरह विकसित नहीं हो रहे हैं। साथ ही उनमें फल भी ज्यादा नहीं आ रहे हैं और उपज की क्वालिटी भी अच्छी नहीं है। इसलिए उनको उपज का वाजिब दाम नहीं मिल रहा था। इसके निदान के लिए उन्होंने कुछ रिसर्च किए और फिर पौधों के लिए टॉनिक बनाने का आइडिया मिला।

 

एग्री बिजनेस सेंटर से ली ट्रेनिंग

पौधों के लिए पीजीआर बनाने के वास्ते हरिदास ने सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाए जा रहे प्रोग्राम एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस सेंटर्स से ट्रेनिंग ली। वहां पर उन्होंने विभिन्न पौधों के ग्रोथ के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के बारे में जाना। उन्हें मालूम चला कि इंसान की तरह ही पौधों को भी बढ़ने, प्रजनन और अन्य कार्यों के लिए अतिरिक्त नूट्रीएंट्स की जरूरत होती है। इसके मिलने पर पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और फल भी ज्यादा मिलते हैं।

 

1 लाख रुपए से की शुरुआत

ट्रेनिंग लेने के बाद हरिदास ने प्लांट ग्रोथ रेग्युलेटर्स बनाने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। खुद की जमीन पर 1 लाख रुपए से मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाए। फिर मल्टीएक्सेल नाम से पीजीआर बनाने का काम शुरू किया। उनका कहना है कि बाजार में उनके प्रोडक्ट को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। महाराष्ट्र के दो जिलों में 1500 से ज्यादा किसानों ने इस प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया है और उनकी उपज 30 फीसदी बढ़ी है।

 

सालाना कमाते हैं 6 लाख रुपए

हरिदास प्लांट ग्रोथ रेग्युलेटर्स बनाकर सालाना 6 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं। उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 20 लाख रुपए है। उनका कहना है कि सारे खर्च काटकर इस पर उनको 30 फीसदी तक प्रॉफिट मिल जाता है। उनका यह प्रोडक्ट फिलहाल सांगली के आप-पास के जिलों में ही बिक्री के लिए उपलब्ध है। अपने बिजनेस को बढ़ाने की उनकी कोई प्लानिंग नहीं है। उनका कहना है कि वो छोटे स्तर पर यह प्रोडक्ट बना रहे हैं। व्यापक स्तर पर प्रोडक्शन के लिए ज्यादा इन्वेस्टमेंट की जरूरत होगी। इसलिए अभी इस पर ध्यान नहीं है।

 

इस्तेमाल करने की क्या है विधि

उनके मुताबिक, पीजीआर का इस्तेमाल करने का सबसे आसान तरीका ड्रेंचिंग है। इस विधि से पीजीआर का इस्तेमाल करने पर पौधों का समुचित विकास होता है।

 

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