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गुजरात इलेक्शन कैंपेन के 48 दिनों में निवेशकों ने कमाए 4 लाख करोड़, इन वजहों से हुआ फायदा

गुजरात के नतीजे मार्केट की उम्मीद के मुताबिक रहे तो स्टॉक मार्केट में आगे भी रैली दिखने को मिलेगी।

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नई दिल्ली. मंगलवार को गुजरात एसेम्बली इलेक्शन का कैंपेन थम गया। गुजरात इलेक्शन कैंपेन मार्केट के लिए फायेमंद साबित हुआ। 25 अक्टूबर को गुजरात चुनाव की तारीख की घोषणा के बाद 48 दिनों में इन्वेस्टर्स ने 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा कमा लिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गुजरात इलेक्शन के रिजल्ट पर मार्केट की नजर टिकी है। गुजरात के नतीजे मार्केट की उम्मीद के मुताबिक रहे तो स्टॉक मार्केट में आगे भी रैली दिखने को मिलेगी।


4.15 लाख करोड़ बढ़ा बीएसई का मार्केट कैप

इलेक्शन कमिशन ने 25 अक्टूबर 2017 को गुजरात एसेम्बली इलेक्शन के तारीख की घोषणा की थी। उस दिन बीएसई पर लिस्टेड कुल कंपनियों का मार्केट कैप 1,41,79,644.23 करोड़ रुपए था। 12 दिसंबर को गुजरात में इलेक्शन कैंपेन बंद हो गया। इस दिन बीएसई का मार्केट कैप 1,45,94,996 करोड़ रुपए रहा। इस तरह गुजरात इलेक्शन कैंपेन के दौरान बीएसई का मार्केट कैप 4,15,351.77 करोड़ रुपए बढ़ा।

 

एक महीने में 65 फीसदी तक बढ़े स्टॉक्स

बीते एक महीने में सीएनएक्स 500 में लिस्टेड कंपनियों के स्टॉक्स में 65 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। सबसे ज्यादा तेजी बॉम्बे रेयॉन फैशन में 64.64 फीसदी आई है। इसके अलावा कोल्टे पाटिल डेवलपर्स में 52.60 फीसदी, जय कॉर्प में 51.14 फीसदी, प्राज इंडस्ट्रीज में 38.03 फीसदी और रेलियगेयर इंटरप्राइज में 36.13 फीसदी रही।


इन फैक्टर्स का मार्केट को मिला सपोर्ट-

 

बीजेपी को पहले से ज्यादा सीटें मिलने की उम्मीद

फॉर्च्यून फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर ने कहा कि गुजरात में बीजेपी की जीत की उम्मीदें ने भी बाजार में जोश भरने का काम किया। शुरुआती दौरा में बीजेपी को वहां पहले से ज्यादा सीटें मिलने के अनुमान से मार्केट में तेजी आई। लेकिन बाद में जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख नजदीक आईँ, वैसे-वैसे बीजेपी के पक्ष में संभावनाएं बदलीं। इससे मार्केट में निगेटिव इम्पैक्ट हुआ और ऊपरी स्तर पर बाजार में मुनाफावसूली का दबाव दिखा। 

 

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कंपनियों की अर्निंग सुधरी

एसएमसी इन्वेस्टमेंट्स एंड एडवाइजर्स लिमिटेड के रिसर्च हेड सचिन सर्वदे ने कहा कि गुजरात इलेक्शन कैंपेन के दौरान गुजरात चुनाव के अलावा कुछ और भी फैक्टर्स सपोर्टिव रहे जिससे मार्केट में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली। इस दौरान कंपनियों के दूसरे क्वार्टर के रिजल्ट जारी हुए, जिसमें कंपनियों की अर्निंग बेहतर रही। यह मार्केट के लिए पॉजिटिव रहा।

 

 

सरकारी रिफॉर्म्स, पैकेज-रेटिंग सुधार का फायदा

कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के वीपी अंबरीश बालिगा ने कहा कि गुजरात इलेक्शन के आस-पास बैकों का रिकैपिटलाइजेशन, मेगा हाईवे प्लान जैसी योजनाओं ने बाजार में जोश भरने का काम किया। वहीं ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भारत की रैंकिंग में सुधार और अमेरिकी ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज द्वारा नवंबर में भारत की रेटिंग बढ़ाए जाने का भी फायदा मिला है।


टॉप 10 में 7 कंपनियों का मार्केट कैप बढ़ा, मारुति टॉप गेनर

48 दिन तक गुजरात इलेक्शन कैंपेन के दौरान देश की टॉप 10 में 7 कंपनियों के मार्केट कैप में बढ़त दर्ज की गई। सबसे ज्यादा फायदा देश की सबसे बड़ी कारमेकर कंपनी मारुति सुजुकी को हुआ। 48 दिन में कंपनी के मार्केट कैप में 38,392.88 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई। 25 अक्टूबर को कंपनी का मार्केट कैप 2,37,791.37 करोड़ रुपए से बढ़कर 2,76,184.25 करोड़ रुपए हो गया। इसके अलावा इस दौरान टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, एचयूएल, एचडीएफसी, इंफोसिस और ओएनजीसी के मार्केट कैप में इजाफा हुआ।

 

वहीं सबसे ज्यादा नुकसान रिलायंस इंस्ट्रीज को हुआ। 25 अक्टूबर को आरआईएल का मार्केट कैप 5,95,644.49 करोड़ रुपए था, जो 48 दिन में 16097.25 करोड़ रुपए घटकर 5,79,547.24 करोड़ रुपए हो गया। इसके अलावा एसबीआई और आईटी का मार्केट कैप भी घटा।

 

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इनका भी दिखा असर

सचिन सर्वदे का कहना है गुजरात इलेक्शन कैंपेन के दौरान मार्केट में इन फैक्टर्स का भी असर दिखा। क्रूड की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने की वजह से मार्केट में गिरावट देखने को मिली। महंगाई बढ़ने की वजह से आरबीआई ने मॉनिटरी पॉलिसी में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, जिसके मार्केट में तेज गिरावट देखने को मिली। मार्केट की नजर फिलहाल गुजरात इलेक्शन के नतीजे पर है। उम्मीद से विपरीत नतीजे पर मार्केट में गिरावट हो सकती है। अगर नतीजे बीजेपी के पक्ष में आए तो मार्केट में रैली आ सकती है।

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