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अटल सरकार का कार्यकाल प्राइवेटाइजेशन का था गोल्डन पीरियड, मारुति सहित कई कंपनियों का हुआ निजीकरण

1999 से 2004 के बीच अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान पीएसयू कंपनियों के प्राइवेटाइजेशन का गोल्डन पीरियड रहा।

Golden period of privatisation in atal govt

नई दिल्ली.  पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 93 साल की उम्र में गुरुवार को दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। 1999 से 2004 के बीच अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान पीएसयू कंपनियों के प्राइवेटाइजेशन का गोल्डन पीरियड रहा। वाजपेयी हमेशा से इस बात के पक्षधर थे कि बिजनेस में सरकार की भूमिका कम से कम होनी चाहिए। इसलिए उन्होंने अपनी सरकार में अलग से डिसइन्वेस्टमेंट डिपार्टमेंट बनाया था। उनके कार्यकाल में देश की सबसे बड़ी कार मेकर कंपनी मारुति सुजुकी समेत अन्य कंपनियों का निजीकरण हुआ था।

 

अरूण शौरी बने थे डिसइन्वेस्टमेंट डिपार्टमेंट के हेड

पीएसयू कंपनियों में सरकार की दखलनदाजी कम करने और कंपनियों के बेहतर परफॉर्मेंस और ग्रोथ के लिए अटल बिहारी वाजपेयी ने अलग से डिसइन्वेस्टमेंट डिपार्टमेंट बनाया था। एनडीए सरकार ने अलग से कैबिनेट कमिटी ऑन डिसइन्वेस्टमेंट (CCD) का निर्माण किया जिसके हेड अरूण शौरी थे।  इसका मकसद सरकारी कंपनियों में सरकारी हिस्सेदारी कम करना और ट्रांजैक्शन जल्द से जल्द पूरा करना था।

 

इन कंपनियों का हुआ निजीकरण

वाजपेयी सरकार के दौरान भारत एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO), हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, मारुति उद्योग लिमिटेड, मॉर्डन फूड इंडस्ट्रीज लिमिटेड, एचडीएल लिमिटेड, सीएमसी लिमिटेड,  इंडिया पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) होटल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के अंतर्गत 2 होटल यूनिट्स और इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ITDC) के 17 होटल प्राइवेट कंपनियों को बेचे गए।

 

सरकार के खिलाफ ही खड़े हुए थे सहयोगी दल

एनडीए सरकार के निजीकरण के फैसले के खिलाफ उनके ही सहयोगी दलों ने विपक्ष की भूमिका निभाई। सरकारी कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ वाम दलों ने भी विरोध जताया था। मई 2004 चुनाव में एनडीए की हार के साथ निजीकरण की कतार में खड़ी अन्य पीएसयू कंपनियों की स्ट्रैटजिक सेल रूक गई थी।

 

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