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FPI ने डेट मार्केट में निवेश किए 3935 करोड़, स्टेबल करंसी का असर

नई दिल्ली.  फॉरेन इन्वेस्टर्स ने एक पखवाड़े में इंडियन डेट मार्केट में 3,935 करोड़ रुपए निवेश किए हैं। स्टेबल करंसी और आकर्षक बॉन्ड यील्ड्स डेट मार्केट में निवेश बढ़ने की वजह है। डेट मार्केट में यह निवेश पिछले दो महीने में 12,750 करोड़ रुपए की निकासी के बाद हुआ है। घरेलू स्तर पर ब्याज दर में बढ़ोतरी के साथ क्रूड प्राइस और फिस्कल डेफिसिस बढ़ने से रुपए में कमजोरी वजह है। इसके उलट, फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई) ने जनवरी में 8,500 करोड़ रुपए निवेश किए थे।

 

डेट मार्केट का आउटलुक हुआ बेहतर

 

डिपॉजिटरी डाटा के मुताबिक, 2 से 13 अप्रैल के दौरान एफपीआई ने डेट मार्केट में 3,935 करोड़ रुपए (60.5 करोड़ डॉलर) निवेश किए। मॉर्निंगस्टार इंडिया के सीनियर एनालिस्ट मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि स्टेबल करंसी और बॉन्ड यील्ड्स के आकर्षक लेवल की वजह से एफपीआई भारतीय बॉन्ड्स में वैल्यू खोज रहे हैं। हालिया सरकारी सिक्युरिटीज में एफपीआई लिमिट बढ़ाने से फिक्स्ड इनकम सेग्मेंट में निवेश बढ़ा है।

 

प्रभुदास लीलाधर के सीईओ औऱ चीफ पोर्टफोलियो मैनेजर अजय बोदके का कहना है कि आरबीआई द्वारा मॉनिटरी पॉलिसी में मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में रिटेल इंफ्लेशन का टारगेट कम कर 4.7-5.1 फीसदी करने से डेट मार्केट का आउटलुक बेहतर हुआ है। फरवरी 2018 में आरबीआई ने 5.1-5.6 फीसदी इंफ्लेशन का अनुमान जताया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा, आरबीआई ने 2018-19 में सरकारी सिक्युरिटीज में एफपीआई लिमिट 5.5 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी किया है।

 

1085 करोड़ स्टॉक से निकाले

इसके उलट, फॉरेन इन्वेस्टर्स ने इस दौरान इक्विटी मार्केट से 1,085 करोड़ रुपए निकाले हैं। अमेरिका औऱ चीन में ट्रेड वार से ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच फॉरेन इन्वेस्टर्स ने घरेलू स्टॉक मार्केट से निकासी की। वहीं घरेलू स्तर पर पॉलिटिकल डेवलपमेंट, हाई वैल्युएशन और स्टॉक्स से कमाई पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स ने सेंटीमेंट्स खराब किया।

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