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16 महीने के हाई पर पहुंचा FPI आउटफ्लो, अप्रैल में निकाले 15,500 करोड़ रु

नई दिल्ली.  फॉरेन इन्वेस्टर्स ने अप्रैल महीने में भारतीय कैपिटल मार्केट से 15,500 करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की है, जो पिछले 16 महीने में सबसे ज्यादा आउटफ्लो है। ग्लोबल क्रूड प्राइस तेजी और सरकारी सिक्युरिटीज यील्ड्स में बढ़ोतरी निकासी की मुख्य वजह है। मार्च में इक्विटी में 11,654 करोड़ रुपए का निवेश और इसी अवधि के दौरान डेट मार्केट से 9,000 करोड़ रुपए की निकासी के बाद यह हुआ है। इसके पहले, फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई) ने फरवरी महीने में भारतीय कैपिटल मार्केट (इक्विटी और डेट) से 11,674 करोड़ रुपए निकाले थे।

 

मार्केट से निकाले 15,500 करोड़ रु

डिपॉजिटरी डाटा के मुताबिक, एफपीआई ने अप्रैल महीने में इक्विटीज से 5,552 करोड़ रुपए जबकि डेट मार्केट से 10,036 करोड़ रुपए की निकासी है। इस तरह उन्होंने कुल मिलाकर 15,558 करोड़ रुपए बाजार से निकाले हैं।

 

दिसंबर 2016 के बाद सबसे ज्यादा निकासी

दिसंबर 2016 के बाद एफपीआई की बाजार से सबसे ज्यादा निकासी है। दिसंबर 2016 में एफपीआई ने मार्केट से 27,000 करोड़ रुपए निकाले थे। इस साल अभी तक, एफपीआई ने 7,100 करोड़ रुपए इक्विटी से और 14,700 करोड़ रुपए डेट मार्केट से निकाले हैं।

 

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एफपीआई आउटफ्लो की ये है वजह-

 

यील्ड्स और क्रूड प्राइस में तेजी का असर

रिलायंस सिक्युरिटीज के हेड ऑफ रिसर्च राकेश तार्वे के मुताबिक, घरेलू मार्केट में यील्ड्स में बढ़ोतरी की वजह से एफपीआई इंडियन डेट मार्केट से अपना पैसा निकाल रहे हैं। वहीं क्रूड की बढ़ती कीमतों से भारतीय इकोनॉमिक का मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंट्ल में कमजोरी औऱ ग्लोबल यील्ड्स में बढ़ोतरी से इक्विटी से अपना निवेश निकाले हैं। 

इसके अलावा, आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एफपीआई ने प्रॉफिट बुकिंग की है।

 

निवेशकों का सतर्क रुख

प्रभुदास लिलाधर के सीईओ अजय बोडके का कहना है कि अमेरिका-ईरान और कर्नाटकर चुनावों के आउटकुम से पहले निवेशक सावधानी बरत रहे हैं। उन्होंने कहा, सबसे पहले अमेरिका द्वारा ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने पर ग्लोबल स्तर पर क्रूड ऑयल कीमतें बढ़ने की संभावना है क्योंकि ईरान क्रूड के सबसे बड़े सप्लायर्स में से एक है। इससे भारत सहित सभी ऑयल इम्पोर्ट्स इकोनॉमी पर असर पड़ेगा और सीएडी, फिस्कल डेफिसिट, इम्पोर्टेड इंफ्लेशन पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा जो इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए हेडविंड बनेगा।

दूसरा, कर्नाटक चुनावों में बीजेपी के पक्ष में नतीजे नहीं आने से विपक्ष सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करेगा जो सरकार के फ्यूचर रिफॉर्म्स में अवरोधक बन सकता है। इसके उलट, बीजेपी के पक्ष में परिणाम आने पर 18 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के अगले दौर में गति आगे बढ़ाने पर फोकस करेगा।

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