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फेल होने जा रहा था मोदी का बड़ा प्लान, SBI सहित इन 5 ने बचाई साख

आखिरी दिन एसबीआई समेत 5 सरकारी कंपनियों ने ऑफर साइज के 50 फीसदी से ज्यादा शेयर खरीद सरकार की साख बचा ली।

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नई दिल्ली.  राजकोषीय घाटे की भरपाई के लिए सरकार ने एक बड़ा प्लान बनाया था। इसके लिए सरकार ने सरकारी कंपनी मिश्र धातु निगम (मिधानि) में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई और कंपनी का आईपीओ जारी किए। लेकिन मिधानि का आईपीओ दो दिन में सिर्फ 62 फीसदी ही सब्सक्राइब हो पाया था। ऐसे में आखिरी दिन एसबीआई समेत 5 सरकारी कंपनियों ने ऑफर साइज के 50 फीसदी से ज्यादा शेयर खरीद सरकार की साख बचा ली। 
 

 

इन कंपनियों ने बचाई साख

- मिधानि आईपीओ के 58 फीसदी शेयर खरीदने वाली सरकारी कंपनियों में एसबीआई, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, एलआईसी और न्यू इंडिया एश्योरेंस को. लिमिटेड शामिल हैं।

 

विदेशी निवेशकों ने नहीं लगाया एक भी पैसा, 1.21 गुना हुआ सब्सक्राइब

आईपीओ को फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एफआईआई) की तरफ से एक भी बिड नहीं मिली। मिश्र धातु निगम का इश्यू 21 से 23 मार्च के दौरान खुला था। आईपीओ आखिरी दिन 1.21 गुना सब्सक्राइब हुआ था। क्यूआईबी कोटा 1.96 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स 12 फीसदी और रिटेल इन्वेस्टर्स का कोटा 72 फीसदी सब्सक्राइब हुआ था। कंपनी इश्यू का प्राइस बैंड 87-90 रुपए तय किया था।

 

मिधानि की कमजोर लिस्टिंग

मिधानि की स्टॉक मार्केट में कमजोर एंट्री हुई। एनएसई पर मिधानी का स्टॉक 3.3 फीसदी डिस्काउंट के साथ 87 रुपए के भाव पर लिस्ट हुआ है। वहीं बीएसई पर स्टॉक 87 रुपए के भाव पर लिस्ट हुआ। लिस्टिंग के लिए मिश्र धातु निगम का इश्यू प्राइस 90 रुपए प्रति शेयर तय किया गया था। 

 

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5170 करोड़ रु का ऑर्डर बुक

 

कंपनी के पास फिलहाल 5,170 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है जिसमें 50 पर्सेंट डिफेंस सेक्टर, 32 पर्सेंट स्पेस और बाकी ऑयल एंड गैस सेक्टर का शेयर है। 2016 से 2021 तक कंपनी के स्पेशियलिटी स्टील, सुपर एलॉय और टाइटेनियम एलॉय की डिमांड में क्रमश: 4%, 9% और 5% की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। मिधानि के पास हैदराबाद में एक प्लांट है। कंपनी ने हरियाणा के रोहतक और आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में नए प्लांट लगाने के लिए अगले तीन साल में 100 करोड़ रुपए खर्च करने का प्लान बनाया है।

 

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बिजनेस मॉड्यूल

 

कंपनी डिफेंस और स्पेस प्रोग्राम्स के लिए जरूरी अलॉय बनाती है। मिसाल के तौर पर यह डिफेंस, स्पेस और एनर्जी सेक्टर के लिए प्रॉडक्ट्स बनाती है जहां बहुत दबाव, ताप और क्षरण होता है। कंपनी के प्रॉडक्ट्स की सबसे बड़ी खरीदार सरकार है, इसलिए उसकी प्राइसिंग पावर लिमिटेड है। कंपनी की फ्यूचर ग्रोथ भी डिफेंस सेक्टर को लेकर बनने वाली सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगी। 

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