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Budget Impact: MF इन्वेस्टर्स पर टैक्स का बोझ कम करेगा ग्रोथ फंड, फायदे के लिए ऐसे बदले स्ट्रैटजी

बजटः MF इन्वेस्टर्स पर टैक्स का बोझ कम करेगा ग्रोथ फंड, बदलनी होगी स्ट्रैटजी

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नई दिल्ली। म्युचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट करने वालों को वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बड़ा झटका दिया है। इसके चलते अब निवेशकों को लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा, वहीं डिविडेड पर 10 फीसदी के हिसाब से टैक्स लगेगा। अभी तक लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन टैक्स नहीं लगता था। टैक्स नियमों में इन बदलावों से निवेशकों का रिटर्न काफी कम हो जाएगा। जानकारों की राय है कि अगर निवेशकों ने स्मार्ट रणनीति नहीं बनाई तो नुकसान होगा।

 

 

बजट में ये हैं बदलाव के प्रस्ताव
लोगों की उम्मीद के विपरीत वित्तमंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट प्रस्ताव में टैक्स के बोझ से राहत देने की जगह करों का बोझ बढ़ दिया है। अभी तक शेयर बाजार और इक्विटी म्युचुअल फंड में लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन का लाभ मिल रहा था। इस नियम के अनुसार जो भी निवेश एक साल (365 दिन) से ज्यादा का होता था, उस पर अगर कोई फायदा है तो वह पूरी तरह टैक्स फ्री होता था, जो अभी तक नहीं था। इसके अलावा निवेशकों को इक्विटी म्युचुअल फंड की स्कीम में मिलने वाले डिविडेंड पर अब 10 फीसदी टैक्स लगेगा।

 

 

बजट प्रस्ताव से कैसे होगा नुकसान
सीए और टैक्स सलाहकार पवन कुमार जायसवाल के अनुसार म्युचुअल फंड के निवेशकों को अपनी टैक्स की जिम्मेदारी कम करने के लिए अपनी निवेश रणनीति में बदलाव करना होगा। प्रस्तावित टैक्स बदलाव के बाद म्युचुअल फंड की डिविडेंड देनी वाली स्कीम्स में निवेश से कम कमाई होगी। इसका कारण है कि मिलने वाले डिविडेंड का काफी बड़ा भाग सरकार के पास चला जाएगा। उन्होंने कहा कि इसको इस तरह समझा जा सकता कि अगर अभी तक किसी म्युचुअल फंड स्कीम के पास अगर 100 रुपए डिविडेंड बांटने के लिए होता था तो वह पूरा पैसा डिविडेंड के रूप में बांट देती थी। नए कर प्रस्ताव के बाद इन 100 रुपए में से अब 10 रुपए टैक्स के रूप में सरकार के पास चला जाएगा और बाकी 90 रुपए निवेशकों के बीच बंटेगा। इससे डिविडेंड के रूप में होने वाले फायदे में सीधे सीधे करीब 10 फीसदी का नुकसान हो जाएगा।

 

 

अब क्या करें निवेशक
सीए पवन जायसवाल के अनुसार म्युचुअल फंड निवेशकों को अब डिविडेंड ऑप्शन की जगह ग्रोथ ऑप्शन ही लेना चाहिए। इससे उनका कम से कम 10 फीसदी नुकसान बच जाएगा। ग्रोथ ऑप्शन में निवेशक जब पैसों की जरूरत हो उसे निकाल सकता है। ऐसे में अगर वह अपना लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का कुछ हिस्सा निकालेगा तो उसे पहले एक लाख रुपए तक लाभ पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की छूट मिलेगी। इस प्रकार उसको मिलने वाला पूरा पैसा टैक्स फ्री हो जाएगा। अगर वह अपना फायदा एक लाख रुपए से ज्यादा निकालता है तो उसे केवल 10 फीसदी ही टैक्स देना होगा। इस तरीके से वह अपनी टैक्स की जिम्मेदारी खुद ही तय सकता है, जबकि डिविडेंड ऑप्शन में उसे ऐसा करने का मौका नहीं होगा।

 

 

पहले से अगर डिविडेंड ऑप्शन में हैं तो क्या करें इन्वेस्टर्स
फाइनेंशियल एडवाइजर फर्म बीपीएन फिनकैप के डायरेक्टर एके निगम के अनुसार अगर कोई नया निवेश कर रहे हैं तो उसे ग्रोथ आप्शन में करना अच्छा विकल्प है। लेकिन अगर पहले से ही डिविडेंड ऑप्शन में निवेश है तो ऐसे निवेशक बढ़े हुए टैक्स से राहत पाने के लिए 31 मार्च 2018 के पहले इसे ग्रोथ ऑप्शन में बदल सकते हैं। ऐसे में उन्हें नई टैक्स व्यवस्था में नए सिरे से जाने का मौका मिलेगा। 1 अप्रैल 2018 से नई टैक्स प्रणाली लागू हो जाएगी, फिर नए टैक्स के नियमों के अनुसार आपकी टैक्स देनदारी बनेगी। ऑप्शन बदलने की लिए लोगों को अपना डिविडेंड ऑप्शन में किया गया निवेश पहले बेचना होगा फिर उसे दोबारा ग्रोथ ऑप्शन में लगाना होगा।

 

 

टैक्स सेवर म्युचुअल फंड के निवेशक क्या करें
टैक्स सेविंग म्युचुअल फंड में निवेश तीन साल के लिए लॉक रहता है, इस कारण इसे बीच में नहीं निकाला जा सकता है। लेकिन अगर किसी का लॉकइन पूरा हो गया और वह अभी भी निवेशित है, तो वह अपने इस निवेश को बेच कर पूरा फायदा टैक्स फ्री ले सकता है। बाद में इस पैसे को कहीं भी निवेश किया जा सकता है।

 

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