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डाटा लीक में फेसबुक को बड़ा झटका; 6% से ज्यादा टूटा स्टॉक, 2 लाख करोड़ रुपए डूबे

करोड़ों यूजर्स के डाटा लीक के मामले में फेसबुक को तगड़ा झटका लगा है।

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वाशिंगटन/नई दिल्ली. करोड़ों यूजर्स के डाटा लीक के मामले में फेसबुक को तगड़ा झटका लगा है। इस खबर के चलते सोमवार को फेसबुक के स्टॉक में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिससे उसकी मार्केट कैप में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए (32 अरब डॉलर) की कमी आ गई। यह फेसबुक के स्टॉक में 2 महीने की सबसे बड़ी गिरावट है। इस मामले में अमेरिका और कई यूरोपीय देशों की सरकारों ने भी सवाल उठाए हैं।
 
अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों ने उठाए सवाल
न्यूयॉर्क टाइम्स और लंदन के ऑब्जर्वर के अनुसार 2016 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प की मदद करने वाली एक फर्म ‘कैम्ब्रिज एनालिटिकल’ पर लगभग 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स के निजी जानकारी चुराने के आरोप लगे हैं। इस जानकारी को चुनाव के दौरान इस्तेमाल किया गया है। इस खबर के बाद अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों ने भी फेसबुक से जवाब-तलब किया है। इसका खासा असर कंपनी के स्टॉक पर दिखा।
 
6 फीसदी से ज्यादा टूटा स्टॉक
सोमवार को अमेरिकी स्टॉक मार्केट खुलने के साथ ही डाउजोंस पर फेसबुक का शेयर लगभग 5.2 फीसदी गिरकर 175 डॉलर पर आ गया। यह गिरावट बाद में बढ़कर 6 फीसदी से ज्‍यादा हो गई। यह 12 जनवरी के बाद स्टॉक में सबसे बड़ी इंट्रा डे गिरावट है। इससे कंपनी की मार्केट कैप लगभग 32 अरब डॉलर की गिरावट के साथ 500 अरब डॉलर रह गया।
इसका असर फेसबुक के फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग की पर्सनल वेल्थ पर भी पड़ा, जिसमें कुछ ही घंटों के भीतर लगभग 6.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। अमीरों की वेल्थ के बारे में बताने वाले फोर्ब्स के रियल टाइम बिलेनायर इंडेक्स के मुताबिक जुकरबर्ग की पर्सनल वेल्थ लगभग 4.6 अरब डॉलर घटकर 70 अरब डॉलर रह गई।
 
ट्रम्प के कैम्पेन में अहम रोल निभाने वाली कंपनी का आया नाम
बीबीसी के अनुसार फेसबुक के डिप्टी लीगल एडवाइजर पॉल ग्रेवाल ने अपने ब्लॉग में कहा कि इस मामले की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने तक ‘कैम्ब्रिज एनालिटिकल’ का निलंबन जारी रहेगा। इसी फर्म ने ट्रम्प के इलेक्शन कैंपेन में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाया जा सकता है।
 
डाटा बेचने के लगे आरोप
रिपोर्ट्स के अनुसार कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अलैक्जेंडर कोगन ने वर्ष 2015 में एक 'पर्सनालिटी ऐप' बनाया था और उससे चुनाव को लेकर वोटर्स के रुझान और पसंद-नापसंद के बारे में खासी डिटेल्स जुटाई थीं। उन्होंने बाद में डाटा को कैम्ब्रिज ऐनालिटिकल और उसकी मुख्य कंपनी स्ट्रैटजिक कम्युनिकेशंस समेत तीसरी पार्टी को बेच दिया था।
 
ऐप के सहारे हुआ खेल
ग्रेवाल ने कहा, 'हमें जानकारी मिली थी कि प्रोफेसर कोगन ने वर्ष 2013 में योरडिजिटललाइफ नामक ऐप बनाया था और करीब 2.70 लाख लोगों तक इससे पहुंच बनी थी। लोगों ने चुनाव से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर राय दी थी और अन्य लोगों का कॉन्ट्रैक्ट सोर्स और एड्रेस मुहैया कराया था। प्रोफसर कोगन ने डाटा डिलीट नहीं किया और उसे बेच दिया था, जो फेसबुक की नीतियों के खिलाफ है।
 
उठाए जा सकते हैं कानूनी कदम
उन्होंने कहा, 'फेसबुक ने यह सूचना सामने आने पर डाटा को तुरंत डिलीट करने को कहा था। लेकिन डिलीट करने का भरोसा दिलाने के बावजूद डाटा बेच दिया गया, जो ट्रंप की जीत में मददगार साबित हुआ।'
ग्रेवाल ने कहा कि कंपनी के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। इस मामले में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं आई है।

 
 
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