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खास खबर: क्या म्‍यूचुअल फंड खत्म कर रहा है स्टॉक मार्केट का डर, जोखिम पर भारी तो नहीं रिटर्न का गणित

छोटे शहरों से अब म्‍युचुअल फंड में निवेश बढ़ने लगा है।

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नई दिल्‍ली. देश में बचत और निवेश का संसार अभी भी काफी हद तक बैंक और पोस्‍ट ऑफिस तक ही सिमटा हुआ है, जिनमें सेविंग अकाउंट से लेकर एफडी, पीपीएफ और आरडी जैसे परंपरागत विकल्‍प हैं। इसकी वजह भी साफ है- पैसा सुरक्षित, आमदनी सुनिश्चित और जोखिम न के बराबर। लेकिन, बीते कुछ सालों में परंपरागत निवेशक माने-जाने वाले भारतीयों के निवेश व्‍यवहार में बदलाव आया है और वे म्‍युचुअल फंड जैसे विकल्‍प को अपना रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि म्‍युचुअल फंड में निवेश बीते पांच साल में तीन गुना हो गया है। इसमें एक रोचक बात यह है कि छोटे शहरों में म्‍युचुअल फंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। साल 2017-18 में छोटे शहरों से सिर्फ म्‍युचुअल फंड में 4.27 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। म्‍युचुअल फंड दरअसल शेयर बाजार में निवेश का एक कम जोखिम भरा और सरल रास्‍ता है। ऐसे में अब यह सवाल लाजमी है कि क्‍या म्‍युचुअल फंड निवेशकों के बीच से स्टॉक मार्केट का डर खत्‍म कर रहा है और जोखिम पर रिटर्न का गणित भारी पड़ रहा है।

 

 

2017-18 में आया 4.27 लाख करोड़ का निवेश

देश में म्‍युचुअल फंड की शुरुआत 1964 में यूटीआई से हुई थी लेकिन यह खास तबके के लिए ही बने रहे। अब स्थिति बदल रही है और छोटे शहरों तक इसने पहुंच बना ली है। आंकड़े बता रहे हैं कि वर्ष 2017-18 में छोटे शहरों से म्‍युचुअल फंड में 4.27 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है।

 

 

मिल रहा अच्‍छा रिटर्न

इस समय बैंक और पोस्‍ट ऑफिस की स्‍कीम्‍स में 7 से 8 फीसदी के बीच ब्‍याज मिल रहा है। वहीं एक साल में म्‍युचुअल फंड की टॉप लॉर्ज कैप स्‍कीम का रिटर्न 18.3 फीसदी रहा है। इसके अलावा टॉप स्‍मॉल एंड मिड कैप स्‍कीम का रिटर्न 29.8 फीसदी, डायवर्सिफाइड स्‍कीम का 32.6 फीसदी और टैक्‍स सेविंग स्‍कीम का रिटर्न 22.7 फीसदी रहा है।

 

 

छोटे शहरों में बढ़ा 38 फीसदी निवेश

सरकार और सेबी की लगातार कोशिशों के बाद अब म्‍युचुअल फंड में छोटे शहरों की भागीदारी बढ़ने लगी है। एम्‍फी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017-18 में छोटे शहरों से निवेश 38 फीसदी बढ़कर 4.27 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जबकि यह निवेश एक साल पहले 3.09 लाख करोड़ रुपए था। जानकारों के अनुसार पिछले कुछ समय में ऐसे कई फैसले लिए गए हैं, जिनसे म्‍युचुअल फंड में पारदर्शिता बढ़ी है और निवेशकों का रिटर्न सुधरा है।

 

 

हाल-फिलहाल में क्‍या-क्‍या हुए फैसले

पिछले कुछ समय में कई फैसले हुए हैं, जिसमें तीन फैसले काफी अहम रहे हैं। इनमें म्‍युचुअल फंड स्‍कीम का कैटेगराइजेशन, एग्जिट लोड को GST के दायरे में लाना और अतिरिक्‍त एक्‍सपेंस चार्ज को घटाकर 5 बेसिस प्‍वाइंट करना शामिल है। 1 बेसिस प्‍वाइंट का मतलब 0.01 फीसदी होता है।

 

 

GST और एक्‍सपेंस चार्ज घटाना अच्‍छी पहल

अंश फाइनेंशियल एंड इन्‍वेस्‍टमेंट के डायरेक्‍टर दिलीप कुमार गुप्‍ता के अनुसार यह फैसला म्‍युचुअल फंड निवेशकों के हित में और उनका रिटर्न बढ़ेगा। लम्‍बे समय में इसका निवेशकों को बहुत फायदा मिलेगा। उनके अनुसार एग्जिट लोड पर GST और एक्‍सपेंस चार्ज घटाना एक ही सिक्‍के के दो पहलू हैं। जहां एग्जिट लोड के बदले लगाए गए एक्‍सपेंस चार्ज को 30 बेसिस प्‍वाइंट से घटाकर 5 बेसिस प्‍वाइंट करने से निवेशकों का सीधा-सीधा रिटर्न बढ़ जाएगा, वहीं GST से म्‍युचुअल फंड कंपनियां अपनी स्‍कीम से एग्जिट लोड को खत्‍म करने के लिए बाध्‍य होंगी। अभी भी कई आेपेन एंडेड म्‍युुचुअल फंड स्‍कीम में एग्जिट लोड लगाया जा रहा है।

 

 

900 करोड़ रुपए का हो सकता है फायदा

म्‍युचुअल फंड की आसेट अंडर मैनेजमेंट मार्च 2018 में 23 लाख करोड़ रुपए थी, जिसमें से 6 लाख करोड़ रुपए से ज्‍यादा का पोर्टफोलियो इक्विटी स्‍कीम का है। एक्‍सपेंश चार्ज 15 बेसिस प्‍वाइंट घटने से इंडस्‍ट्री को करीब 900 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। इंडस्‍ट्री का यही नुकसान वास्‍तव में निवेशकों का फायदा होगा।

 

 

कैटेगराइजेशन से बढ़ेंगे निवेश के मौके

सेबी ने पिछले साल अक्‍टूबर में म्‍युचुअल फंड के लिए कैटेगराइजेशन के नियम जारी किए थे। इसका सबसे बड़ा फायदा म्‍युचुअल फंड स्‍कीम्‍स की कैटेगरी में समानता लाना था। इससे पहले म्‍युचुअल फंड कंपनियां स्‍कीम को अपने हिसाब से चला रही थीं। इन स्‍कीम में शेयर चुनने के नियमों में स्‍पष्‍टता नहीं होने के चलते कुछ जानकार एक ही स्‍कीम को लार्ज कैप मान रहे थे, तो दूसरे जानकार उसे मिड कैप की स्‍कीम मान लेते थे। इससे निवेशकों में कंफ्यूजन रहता था। अब यह स्थिति दूर हो गई है। म्‍युचुअल फंड कंपनियां इक्विटी और डेट में केवल 36 कैटेगरी में ही स्‍कीम रख सकती है। इसके अलावा म्‍युचुअल फंड स्‍कीम जिस कैटेगरी की होगी, निवेश भी उसी कैटेगरी के नियमों के हिसाब से ही करना होगा।

 

 

क्‍या हुआ फायदा

शेयरखान के वाइस प्रेसिडेंट मृदुल कुमार वर्मा के अनुसार कैटेगराइजेशन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब सामान्‍य लोग भी आसानी से सही स्‍कीम चुन सकते हैं। अगर कोई लॉर्ज कैप स्‍कीम चुनना चाहता है तो वह किसी भी म्‍युचुअल फंड की लॉर्ज कैप स्‍कीम को देख सकता है और अन्‍य लॉर्ज कैप स्‍कीम से उनकी तुलना कर सकता है। पहले यह काम कठिन था।

 

 

ये है छोटे शहरों की परिभाषा

सेबी ने शहरों की भी कैटेगरी बना रखी है। इसमें सबसे बड़े शहरों को T30 और उसके बाद के बड़े शहरों को B30 कहा जाता है। अप्रैल 2018 तक के आंकड़ों के अनुसार T30 शहरों से कुल मिलाकर 1918324 करोड़ रुपए का निवेश आया है, वहीं B30 शहरों से 402443 करोड़ रुपए का निवेश आया है।

 

 

डेट और इक्विटी का अनुपात

T30 शहरों से आए निवेश का 64 फीसदी हिस्‍सा डेट स्‍कीम में और 36 फीसदी इक्विटी में लगा हुआ है। वहीं B30 शहरों में 35 फीसदी निवेश डेट स्‍कीम में और 65 फीसदी हिस्‍सा इक्विटी में लगा हुआ है। इस वक्‍त देश में 42 म्‍युचुअल फंड कंपनियां हैं और यह 23.05 लाख करोड़ रुपए को मैनेज कर रही हैं।

 

 

T30 लिस्‍ट के प्रमुख शहर

सेबी की लिस्‍ट के हिसाब से T30 शहरों में नर्इ दिल्ली (एनसीआर सहित), मुंबर्इ (ठाणे और नवी मुंबर्इ सहित), कोलकाता, चेन्नर्इ, बेंगलुरू, अहमदाबाद, बड़ौदा, चंडीगढ़, हैदराबाद, जयपुर, कानपुर, लखनऊ, पंजिम, पुणे और सूरत शामिल हैं।

 

पिछले 5 साल में तीन गुना बढ़ी इंडस्‍ट्री

म्‍युचुअल फंड के आंकड़े जारी वाली संस्‍था एसोसिएशन ऑफ म्‍युचुअल फंड (एम्‍फी) के अनुसार पिछले 5 साल में म्‍युचुअल फंड इंडस्‍ट्री एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) तीन गुना से ज्‍यादा हो गया है। जहां मार्च 2013 में AUM 7.01 लाख करोड़ रुपए था, वहीं यह मार्च 2018 को 23 लाख करोड़ रुपए के पार निकल गया है। वैसे इस इंडस्‍ट्री ने पहली बार 10 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा मई 2014 में पार किया था

 

 

आंकड़ों पर नजर

 

-मार्च 13 में AMU 7.01 लाख करोड़ रुपए

-मार्च 14 में AMU 9.05 लाख करोड़ रुपए

-मार्च 15 में AMU 11.88 लाख करोड़ रुपए

-मार्च 16 में AMU 13.53 लाख करोड़ रुपए

-मार्च 17 में AMU 18.29 लाख करोड़ रुपए

-मार्च 18 में AMU 23.05 लाख करोड़ रुपए

 

 

7 करोड़ हुई फोलियो की संख्‍या

म्‍युचुअल फंड में हर निवेश को एक फोलियो करते हैं। इनकी संख्‍या फरवरी 2017 तक बढ़कर 6.99 करोड़ हो गई है। जानकारों के अनुसार एक निवेशक के एक से ज्‍यादा फोलियो हो सकते हैं, लेकिन उनका मानना है कि नए निवेशकों की संख्‍या तेजी से बढ़ी है। उनके अनुसार इस काम में सबसे ज्‍यादा मदद सिस्‍टेमैटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान (SIP) ने की है। देश में इस वक्‍त 2.05 करोड़ SIP अकाउंट चल रहे हैं, जो एक रिकॉर्ड है।

 

 

महीना

SIP से आया निवेश

मार्च 2018

7,119 करोड़ रुपए

फरवरी 2018    

6,425 करोड़ रुपए

जनवरी 2018    

6,644 करोड़ रुपए

दिसबंर 2017    

6,222 करोड़ रुपए

नवंबर 2017

5,893 करोड़ रुपए

अक्‍टूबर 2017  

5,621 करोड़ रुपए

सितंबर 2017    

5,516 करोड़ रुपए

अगस्‍त 2017    

5,206 करोड़ रुपए

जुलाई 2017

4,947 करोड़ रुपए

जून 2017    

4,744 करोड़ रुपए

मई 2017

4,584 करोड़ रुपए

अप्रैल  2017    

4,269 करोड़ रुपए

 

नोट : आंकड़े एम्‍फी की साइट से लिए गए हैं।


 
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