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क्रेडिट एक्सेस ग्रामीण का शेयर 9% डिस्काउंट के साथ लिस्ट, कंपनी ने 1131 करोड़ रु जुटाए

CreditAccess Grameen का शेयर बीएसई पर 8.77 फीसदी के डिस्काउंट के साथ 385 रुपए पर लिस्ट हुआ।

CreditAccess Grameen Makes A Weak Stock Market Debut

नई दिल्ली. स्टॉक मार्केट में गुरुवार को एक और स्टॉक की लिस्टिंग हुई। क्रेडिट एक्सेस ग्रामीण (CreditAccess Grameen) का शेयर बीएसई पर 8.77 फीसदी के डिस्काउंट के साथ 385 रुपए पर लिस्ट हुआ। । क्रेडिट एक्सेस ग्रामीण ने लिस्टिंग के लिए 422 रुपए का इश्यू प्राइस तय किया था। लिस्टिंग के बाद क्रेडिट एक्सेस ग्रामीण का शेयर 414.80 रुपए तक ऊपर गया। CreditAccess Grameen का आईपीओ 2.21 गुना सब्सक्राइब हुआ था। क्यूआईबी कोटा 5 गुना से ज्यादा भरा था जबकि रिटेल कोटा पूरा नहीं भर पाया था।

 

जानें कंपनी के बारे में 
क्रेडिट एक्सेस ग्रामीणइलाकों में गरीब महिलाओं को छोटे कर्ज बांटने के कारोबार में है। कंपनी की देश के 8 राज्यों के 132 जिलों में प्रेजेंस है। ये 8 राज्य कर्नाटक, महाराष्‍ट्र, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, मध्‍य प्रदेश, ओडीशा, केरल और गोवा व पुड्डूचेरी हैं। कंपनी की कुल 516 शाखाएं और 4544 लोन ऑफिसर हैं। कंपनी ज्वांइट लाइबिलिटी ग्रुप मॉडल के तहत कर्ज देती है। क्रिसिल रिसर्च स्टडी के अनुसार यह मार्च 2017 तक ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो के मामले में इंडिया की तीसरी सबसे बड़ी NBFC-MFI है। 
 

कैसी है फाइनेंशियल स्थिति
फाइनेंशियल ईयर 2015 से 2018 के बीच कंपनी की कुल इनकम 48 फीसदी कंपाउंडिंग एनुअल ग्रोथ रेट के हिसाब से बढ़ी है। जबकि इस दौरान नेट इंटरेस्ट 54 फीसदी कंपाउंडिंग एनुअल ग्रोथ रेट के हिसाब से बढ़ी है। कंपनी का मुनाफा 37 फीसदी कंपाउंडिंग एनुअल ग्रोथ रेट के दर से बढ़ा है। फाइनेंशियल ईयर 2013 से 2018 के दौरान कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट सालाना 57 फीसदी की दर से बढ़कर 4,975 करोड़ रुपए हो गया है। कंपनी की एसेट क्वालिटी बेहतर है। फंसे कर्ज की समस्या कम है। 

 

कर्ज देने का मॉडल
रोबस्ट कस्टमर सेलेक्शन और रिस्क मैनेजमेंट पॉलिसी के चलते एसेट क्वालिटी हेल्दी है। एनपीए की समस्या बहुत कम है। रूरल इलाके में डीप पेनिट्रेशन के चलते और डाइवर्सिफाई पोर्टफोलियो के चलते कंपनी का बिजनेस मॉडल बेहतर है। कर्ज देने के लिए एक ग्रुप की उनके परिजनों की संख्या और परिवार की इनकम के आधार पर आय के अनुसार पहचान की जाती है। इसके बाद एकल क्षमता के आधार पर कर्ज दिया जाता है। मगर कर्ज चुकाने की देनदारी पूरे समूह की होती है। इससे कर्ज डूबने की आशंका कम रहती है। 

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