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बदल गए हैं म्‍युचुअल फंड के नाम, चेक करें अपनी स्‍कीम

सेबी के नियमों के चलते म्‍युचुअल फंड कंपनियां अपनी स्‍कीम्‍स का नाम बदल रही हैं, इसलिए इन्‍हें चेक करना जरूरी है।

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नई दिल्‍ली. सेबी ने पिछले साल अक्‍टूबर में म्‍युचुअल फंड कंपनियों के लिए नए नियम जारी किए थे। अब हर म्‍युचुअल फंड कंपनी इक्विटी और डेट में केवल 36 कैटेगरी में ही स्‍कीम जारी रख सकती है। इसके अलावा म्‍युचुअल फंड स्‍कीम जिस कैटेगरी की होगी उसको अपना निवेश भी उसी हिसाब से करना होगा। सेबी के इन नियमों के चलते म्‍युचुअल फंड कंपनियां अब अपनी स्‍कीम्‍स का नाम बदल रही हैं, और उनकी निवेश की रणनीति भी नए नियमों के हिसाब से तय कर रही हैं। यह प्रक्रिया म्‍युचुअल फंड कंपनियों ने शुरू कर दी है, और अपनी स्‍कीम के नाम बदलना शुरू कर‍ दिया है। इसके साथ ही निवेश की रणनीति भी बदली जा रही है। ऐसे में म्‍युचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए अपडेट रहना जरूरी है, जिससे उनको अच्‍छा रिटर्न मिल सके। 

 

 

निवेश रणनीति बदलने से बदल जाता है रिटर्न

फाइनेंशियल एडवाइजर फर्म बीपीएन फिनकैप के डायरेक्‍टर एके निगम के अनुसार इक्विटी म्‍युचुअल फंड में निवेश आमतौर पर अपनी रिस्‍क लेने की क्षमता के अनुसार किया जाता है। ऐसे में अगर म्‍युचुअल फंड स्‍कीम अपनी निवेश की रणनीति बदल रही है तो यह जानना जरूरी है। जैसे HDFC प्रूडेंस की अभी तक निवेश की रणनीति थी कि वह 75 फीसदी तक ही इक्विटी में लगाएगी और बाकी पैसा डेट इंस्‍ट्रूमेंट में लगाएगी, लेकिन अब यह 100 फीसदी इक्विटी या 100 फीसदी तक डेट में लगा सकती है। इससे कम रिस्‍क लेने वालों को दिक्‍कत हो सकती है, क्‍योंकि उनका पूरा पैसा इक्विटी में लग सकता है। ऐसे में उनको अपने निवेश पर विचार करने की जरूरत है। ऐसा ही कई अन्‍य स्‍कीम के साथ है, जिसको निवेशकों को जानना चाहिए। 

 

 

सबसे ज्‍यादा AMU वाली 4 इक्विटी स्‍कीम के बदले हुए नाम

 

पुराना नाम

HDFC प्रुडेंस फंड

पुरानी निवेश की रणनीति

40 से 75 फीसदी तक इक्विटी और बाकी डेट में

नया नाम

HDFC बैलेंस्‍ड एडवांटेज फंड

नई निवेश की रणनीति

100 फीसदी तक इक्विटी में

AMU

36594 करोड़ रुपए



 

पुराना नाम

ICICI प्रुडेंसियल बैलेंस्‍ड

पुरानी निवेश की रणनीति

65 से 80 फीसदी तक इक्विटी और बाकी डेट में

नया नाम

ICICI प्रूडेंसियल इक्विटी एंड डेट फंड

नई निवेश की रणनीति

इसमें कोई परिवर्तन नहीं

AMU

27602 करोड़ रुपए



 

पुराना नाम

SBI मैग्‍नम बैलेंस्‍ड

पुरानी निवेश की रणनीति

50 फीसदी तक इक्विटी और बाकी डेट में

नया नाम

SBI इक्विडी हाइब्रिड

नई निवेश की रणनीति

65 से 80 फीसदी इक्विटी में बाकी इक्विटी डेरिवेटिव्‍स में

AMU

21802 करोड़ रुपए



 

पुराना नाम

HDFC बैलेंस्‍ड

पुरानी निवेश की रणनीति

48 से 72 फीसदी तक इक्विटी में बाकी डेट में

नया नाम

HDFC हाइब्रिड इक्विटी

नई निवेश की रणनीति

65 से 80 फीसदी इक्विटी में बाकी इक्विटी डेरिवेटिव्‍स में

AMU

20401 करोड़ रुपए



 

सबसे ज्‍यादा AMU वाली 3 डेट स्‍कीम के बदले हुए नाम

 

पुराना नाम

बिड़ला सनलाइफ कैश प्‍लस

पुरानी निवेश की रणनीति

90 फीसदी तक मनी मार्केट इंस्‍ट्रूमेंट में, बाकी डेट में

नया नाम

बिड़ला सनलाइफ लिक्विड फंड

नई निवेश की रणनीति

इसमें कोई बदलाव नहीं

AMU

31621 करोड़ रुपए



 

पुराना नाम

रिलायंस लिक्विड फंड ट्रेजरी

पुरानी निवेश की रणनीति

80 से 100 फीसदी तक मनी मार्केट इंस्‍ट्रूमेंट में, बाकी डेट में

नया नाम

रिलायंस अल्‍ट्रा शार्ट ड्यूरेशन फंड

नई निवेश की रणनीति

100 फीसदी डेट एंड मनी मार्केट इंस्‍ट्रूमेंट में

AMU

22888 करोड़ रुपए



 

पुराना नाम

ICICI प्रूडेंशियल फ्लैक्‍सबिल इनकम फंड

पुरानी निवेश की रणनीति

10 से 100 फीसदी तक मनी मार्केट इंस्‍ट्रूमेंट में, बाकी डेट में

नया नाम

ICICI प्रूडेंशियल सेविंग फंड

नई निवेश की रणनीति

100 फीसदी डेट एंड मनी मार्केट इंस्‍ट्रूमेंट में

AMU

19806 करोड़ रुपए

 

डाटा : 31 मार्च 2018 तक का। AMU यानी आसेट अंडर मैनेजमेंट।



 

आगे पढ़ें : कैसे पड़ेगा निवेशकों पर असर

 

 

 



आप पर क्‍या होगा असर
च्‍वॉइस ब्रोकिंग के प्रेसीडेंट अजय केजरीवाल के अनुसार सेबी के इस बदलाव के बाद म्‍युचुअल फंड को कैटेगरी के हिसाब से पहचानना आसान हो जाएगा। अगर कोई निवेशक लार्ज कैप कैटेगरी की स्‍कीम में निवेश करना चाहता है, तो हर लार्ज कैप स्‍कीम में AMFI की वेबसाइट पर डाली गई लिस्‍ट के अनुसार ही कंपनियों में निवेश होगा। अभी MF कंपनियां अपने हिसाब से लार्ज कैप या मिड कैप की कंपनी में निवेश कर देती थीं।
 

 

 

AMFI ने जारी की M-कैप के हिसाब से लिस्‍ट 
सेबी के सर्कुलर के अनुसार एसोसिएशन ऑफ म्‍युचुअल फंड इन इंडिया (AMFI) ने लार्ज कैप, मिड कैप और स्‍मॉल कैप कंपनियों की सूची तैयार करके अपनी बेवसाइट पर अपलोड कर दी है। अब म्‍युचुअल फंड कंपनियों को अपनी स्‍कीम की कैटेगरी के अनुसार इसी लिस्‍ट से निवेश के लिए शेयर को चुनना होगा। वर्तमान स्‍कीम में अगर कंपनियां इस लिस्‍ट के अनुसार नहीं हैं, तो उनको इसमें बदलाव करना होगा। AMFI हर छह माह में इस लिस्‍ट को अपडेट करेगी और MF कंपनियां को इस लिस्‍ट के अनुसार ही निवेश करना होगा। 
 

 

किस कैटेगरी में कितनी कंपनियां
सेबी ने तय किया है मार्केट कैप के लिहाज से टॉप 100 कंपनियों को लार्ज कैप कंपनियां कहा जाएगा। इसके बाद 150 कंपनियों को मिड कैप कंपनियां कहा जाएगा, बाकी कंपनियां स्‍मॉल कैप कंपनियों की लिस्‍ट में शामिल मानी जाएगी।

 

 

अब यह होंगे इन्‍वेस्‍टमेंट के नियम
-सेबी ने अपने सर्कुलर में हर कैटेगरी में कैसे निवेश होगा, यह भी तय किया है। अब म्‍युचुअल फंड कंपनियां लार्ज कैप फंड में न्‍यूनतम 80 फीसदी तक निवेश लार्ज कैप कंपनियों में और बाकी निवेश अन्‍य आसेट क्‍लास में कर सकेंगीं।
 
-इसी तरह लार्ज एंड मिड कैप स्‍कीम में कंपनियां न्‍यूनतम 35 फीसदी निवेश लार्ज कैप कंपनियों और न्‍यूनतम 35 फीसदी निवेश मिडकैप कंपनियों में करना होगा। बाकी निवेश अन्‍य आसेट क्‍लास में किया जाएगा।
 
-इसी प्रकार मिड कैप फंड अपनी स्‍कीम में न्‍यूनतम 65 फीसदी निवेश मिड कैप कंपनियों में करना अनिवार्य होगा।

 

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