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2 महीने के कोर्स से 5 लाख कमा रहा है सालाना, आप भी उठा सकते हैं फायदा

आइए जानते हैं इस शख्स के बारे में...

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नई दिल्ली.  खेती से आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार तत्पर है। इसलिए सरकार ने खेती को एक करियर के रूप में बनाने के लिए अनेकों कोर्स शुरू किए हैं। इसके अलावा एग्री प्रोडक्ट्स का बिजनेस करने के बारे में भी जानकारी दे रही है। ऐसे कोर्स को कर लोग अच्छी-खासी कमाई भी कर रहे हैं। झारखंड के एक शख्स ने सरकार द्वारा शुरू किए गए 2 महीने का कोर्स किया और आज वो सालाना 5 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं। आइए जानते हैं इस शख्स के बारे में...

 

झारखंड के विजय भारथ ने moneybhaskar.com से बातचीत में बताया कि उन्होंने एग्रीकल्चर में पोस्ट ग्रैजुएशन किया है। पोस्ट ग्रैजुएशन करने के बाद वो एग्रीकल्चर में अपना करियर बनाना चाहते थे। 2002 में झारखंड में भारत सरकार की योजना एग्रीक्लिनिक, एग्री बिजनेस सिस्टम शुरू थी। इसके तहत सरकार एग्रीकल्चर से जुड़े कोर्स कराती है। जिसका फायदा उठाया और उन्होंने 2 महीने का कोर्स किया। इस कोर्स को करने के बाद अब वो खेती के बारे में फिल्म्स के माध्यम से किसानों को ट्रेनिंग देते हैं।

 

आगे पढ़ें- कैसे देते हैं ट्रेनिंग

 

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2 महीने का कोर्स करने के बाद विजय ने किसानों को ट्रेनिंग देने की सोची। खेती से कैसे किसानों को जोड़ें इसके लिए उन्होंने मोबाइल बस सर्विस जिसे MASS की शुरुआत की। यह एक चलता-फिरता एग्रीकल्चर स्कूल है, जिसमें किसानों को एग्री की जानकारी, ट्रेनिंग और एग्री सर्विसेज के बारे में जानकारी दी जाती है। इसके लिए उन्होंने लोन लेकर एक बस खरीदी और इस बस को ट्रेनिंग के लिए मोडिफाइड किया। इसके अंदर उन्होंने प्रोजेक्टर, स्क्रीन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड, इंटरनेट और क्रॉप संबंधित सीडी मौजूद हैं।


आगे पढ़ें- एक दिन में 100 किसानों को देते हैं ट्रेनिंग

विजय का कहना है कि किसान मजबूरी में खेती कर रहे हैं। खेती से किसानों को जोड़ने और एग्रीकल्चर को ग्लैमराइज करने के लिए वो आगे आए हैं। वो अपने मोबाइल एग्रीकल्चर स्कूल के जरिए गांव में पहुंचते हैं और किसानों में खेती के बारे में रुझान पैदा करते हैं। वो यह काम 10 सालों से करते आ रहे हैं। वो एक दिन में एक गांव में 100 किसानों को ट्रेन करते हैं।

 

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विजय कहते हैं कि वो जिस गांव में ठहरते हैं, वहां ट्रेनिंग देने के बाद खेतों में जाकर किसानों की परेशानियों को समझते हैं और उन्हें दूर करने की कोशिश करते हैं। वो एक गांव में कम से कम 3 दिन रूकते हैं और प्रैक्टिकल के साथ थ्योरेटिकल ट्रेनिंग देते हैं। वो अबतक 1.80 लाख किसानों को ट्रेंड कर चुके हैं। उनको काम करते हुए 14 साल हो गए हैं। इनके पास अभी तीन बसे हैं। वो अब तक गया, नवादा, रोहतास, पटना, भोजपुर आदि स्थानों में किसानों को ट्रेनिंग दे चुके हैं।

 

कैसे होती है कमाई

विजय का कहना है कि ट्रेनिंग के लिए वो किसानों से कोई चार्ज नहीं लेते हैं। वो आत्मा, नाबार्ड, कुछ भारत सरकार की योजानाओं और एग्रीकल्चर डिपार्मेंट के लिए काम करते हैं। इसके एवज में वो इन संस्थाओं से कंसल्टेंसी चार्ज लेते हैं। इससे उन्हें मंथली 35 से 40 हजार रुपए की कमाई हो जाती है।

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