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सरप्लस प्रोडक्शन से शुगर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव, स्टॉक्स से दूर रहने की सलाह

ऐसे में निवेशकों को फिलहाल शुगर स्टॉक्स में निवेश से बचना चाहिए।

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नई दिल्ली.  इस बार देश में बंपर शुगर प्रोडक्शन का अनुमान है। सरप्लस प्रोडक्शन देश की शुगर कंपनियों  के लिए मुसीबत बन सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी शुगर के एक्सपोर्ट पर रोक है। ऐसे में ज्यादा प्रोडक्शन से डिमांड के मुकाबले सप्लसई ज्यादा रहने से चीनी की कीमतें नीचे आएंगी। शुगर प्राइस में कमी और लिमिटेड डिमांड का असर शुगर कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा। ऐसे में निवेशकों को फिलहाल शुगर स्टॉक्स से दूर रहने की सलाह है। 

 

डिमांड से ज्यादा शुगर प्रोडक्शन
इंडस्ट्री की शीर्ष संस्था इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने चालू वर्ष (2017-18) में शुगर का प्रोडक्शन 29.5 मि‍लि‍यन टन रहने का अनुमान जताया है, जो पि‍छले अनुमान से 13 फीसदी ज्यादा है। इस्मा के डिप्टी हेड शुगर पॉलिसी, स्टैटिस्टिक्स काशी विश्वनाथन का कहना है कि इस साल देश में शुगर प्रोडक्शन डिमांड से 4.5 मिलियन टन ज्यादा है। उन्होंने कहा कि 2017-18 में शुगर प्रोडक्शन 29.5 मि‍लि‍यन टन रहने का अनुमान है, जबकि डोमेस्टिक कंजम्पशन करीब 25 मिलियन टन रहने की उम्मीद है।

 

एक महीने में 40% तक टूटे स्टॉक
ज्यादा शुगर प्रोडक्शन के अनुमान ने शुगर कंपनियों के स्टॉक पर दबाव बनाया है। पिछले एक महीने में शुगर कंपनियों के स्टॉक्स 40 फीसदी तक टूटे हैं।

 

 

 

कंपनी स्टॉक में गिरावट (फीसदी में)
इंडिया सुक्रोज 32.58%
द्वारिकेश शुगर 30.21%
बलरामपुर चीनी मिल्स 27.74%
अवध शुगर 23.64%
धामपुर शुगर 23.37%
उत्तम शुगर 22.68%
मवाना शुगर 20.81%

 

कीमतों पर बना है दबाव 
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि प्रोडक्शन मौजूदा अनुमान से ज्यादा रहता है तो शुगर की कीमतों पर फिर से प्रेशर देखने को मिल सकता है। असल में अभी एक्सपोर्ट पर रोक है। ऐसे में सरप्लस शुबर बाहर की बाजारों में जाने की बजाए घरेलू बाजार में रहेगा। डिमांड के मुकाबले सप्लाई ज्यादा रहने से चीनी की कीमतें गिरेंगी। इससे कंपनियों के मार्जिन पर निगेटिव असर होगा। 

 

स्टॉक्स से दूर रहने की सलाह
ट्रेडस्विफ्ट ब्रोंकिंग के डायरेक्टर संदीप जैन का कहना है कि ज्यादा शुगर प्रोडक्शन के अनुमान से शुगर स्टॉक्स पर दबाव है। प्रोडक्शन बढ़ने से शुगर की कीमतों पर प्रेशर बना है जिससे आने वाले नतीजों में कंपनियों के मार्जिन पर असर दिख सकता है। उन्होंने निवेशकों को फिलहाल शुगर स्टॉक्स से दूर रहने की सलाह दी है।

 

इंडस्ट्री को ये है उम्मीद 
इस्मा के डिप्टी हेड शुगर पॉलिसी, स्टैटिस्टिक्स काशी विश्वनाथन का कहना है कि फिलहाल शुगर के एक्सपोर्ट पर रोक लगी हुई है। शुगर का एक्सपोर्ट फिर शुरू करने की मांग सरकार से की है। यदि सरकार शुगर का एक्सपोर्ट करने की छूट देती है तो इससे सरप्लस शुगर बाहर होने से डोमेस्टिक मार्केट में सुधार आएगी। एक्सपोर्ट से शुगर मिलों को अतिरिक्त कैश फ्लो मिलेगा, जिससे गन्ना किसानों को गन्ना मूल्य के पेमेंट में सुधार किया जा सकेगा और गन्ना बकाए में कमी आएगी। सरप्लस स्टॉक कम होने से मार्केट का सेंटीमेंट्स इंप्रूव होगा और कंपनियों को नुकसान कम होगा।

आगे पढ़ें, कहां हुआ सबसे ज्यादा प्रोडक्शन...........

 

यूपी-महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा प्रोडक्शन
इस्मा के अनुसार चीनी के बड़े प्रोड्यूसर राज्य उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में अक्टूबर-फरवरी के दौरान क्रमशः 73.9 लाख टन, 84.2 लाख टन और 33.5 लाख टन प्रोडक्शन हुआ। इस्मा ने कहा कि अगले 6-7 महीनों के दौरान देश से 15 लाख टन चीनी का एक्सपोर्ट होना चाहिए, क्योंकि आउटपुट 2017-18 (अक्टूबर-सितंबर) की तुलना में ज्यादा रहने का अनुमान है।

 

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