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भगोड़े मेहुल चौकसी को एक और झटका, अगले महीने से गीतांजलि जेम्स के शेयर में ट्रेडिंग होगी बंद

BSE और NSE पर 10 सितंबर से इस कंपनी के शेयर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध नहीं होंगे।

BSE, NSE to suspend trading in Mehul Choksi Gitanjali Gems

नई दिल्ली.   PNB में 13 हजार करोड़ रुपए के घोटाले का आरोपी हीरा कारोबारी मेहुल चौकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स (Gitanjali Gems) को एक और झटका लगा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अगले महीने से गीतांजलि जेम्स के शेयर में ट्रेडिंग सस्पेंड करेगी।  BSE और NSE पर 10 सितंबर से इस कंपनी के शेयर में ट्रेडिंग नहीं होगी। गीतांजलि जेम्स ने जून तिमाही के नतीजों की जानकारी नहीं दी है और स्टॉक एक्सचेंजों ने सेबी के नियमों का हवाला देते हुए इसमें ट्रेडिंग बंद करने का फैसला किया है।

 

BSE और NSE ने दी है मोहलत

हालांकि BSE और NSE की तरफ से यह भी कहा गया है कि निर्धारित तारीख से पहले अगर गीतांजलि जेम्स एक्सचेंज को अपने जून तिमाही नतीजे मुहैया कराती है तो ट्रेडिंग बंद नहीं होगी। BSE के लिए 4 सितंबर और NSE के लिए 5 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई है।

 

8 अन्य कंपनियों भी हुई सस्पेंड

दोनों स्टॉक एक्सचेंजों ने गीतांजलि जेम्स के अलावा एमटेक ऑटो, ईसन रेरोल और पैनोरामिक यूनिवर्सल के शेयर को सस्पेंड किया है। वहीं बीएसई ने थाम्बी मॉड्रन स्पिनिंग मिल्स, इंडो पैसिफिक प्रोजेक्ट्स, हरियाणा फाइनेंशियल कॉरपोरेशन, नोबल पॉलिमर्स और समृद्धि रियल्टी को सस्पेंड किया है। रेग्युलेशन 33 के अंतर्गत कंपनियों को फाइनेंशियल रिजल्ट सब्मिट करना अनिवार्य है।
समृद्धि रियल्टी और नोबल पॉलिमर्स ने फाइनेंशियल रिजल्ट सब्मिट किए हैं लेकिन लागू जुर्माना नहीं चुकाया है। एक्सचेंज ने कहा कि 17 अगस्त से अगले नोटिस तक इन कंपनियों के प्रोमोटर्स होल्जिंग को जब्त कर दिया गया। 

इसके अलावा, निलंबन के 15 दिन बाद, गैर-अनुपालन कंपनियों के शेयरों में व्यापार को केवल छह सप्ताह के लिए हर सप्ताह के पहले कारोबारी दिन जेड समूह में व्यापार-व्यापार-व्यापार आधार पर अनुमति दी जाएगी।

 

जनवरी में सामने आया था 13,000 करोड़ रुपए का घोटाला
बता दें कि 13,000 करोड़ रुपए के PNB घोटाले के दोनों मुख्‍य आरोपी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई दोनों ने मुकदमे दर्ज कर रखे हैं। 2011 में शुरू हुआ यह घोटाला जनवरी 2018 में सामने आया और उसके बाद PNB के अधिकारियों ने जांच एजेंसियों को सूचित किया। नीरव मोदी और मेहुल चौकसी इस घोटाले के सामने आने से 15 दिन पहले ही भारत से फरार हो गए थे। 

 

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