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रिटेल इन्वेस्टर्स ने करा दी ब्रोकिंग फर्म्स की चांदी, 11 महीने में दिया 1200% तक रिटर्न

रिटेल इन्वेस्टर्स की बढ़ती भागीदारी से इस साल घरेलू स्टॉक मार्केट ने नई ऊंचाइयों को छुआ है।

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नई दिल्ली.  स्टॉक मार्केट में रिटेल इन्वेस्टर्स की बढ़ती हिस्सेदारी ने ब्रोकिंग फर्म की चांदी कर दी है। पिछले 11 महीन  में ब्रोकिंग फर्म के स्टॉक ने 1200 फीसदी तक रिटर्न दिया है। ब्रोकिंग फर्म के बेहतर परफॉर्मेंस की एक बड़ी वजह उनका मौके को देखकर अपनी बिजनेस स्ट्रैटेजी बदलना रहा है। इन कंपनियों ने रिटेल इन्वेस्टर्स की जरूरत को समझते हुए अच्छी तरह से अपने को डाइवर्सिफाई किया। जिसका फायदा उन्हें पूरे साल मिला है।

 

 

11 महीने में सेंसेक्स-निफ्टी 24 फीसदी तक बढ़े

इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ाए जाने को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से बीते 11 महीने में घरेलू स्टॉक मार्केट ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। सेंसेक्स जहां पहली बार 33 हजार के आंकड़े को पार करते हुए 33865.95 अंक का ऑलटाइम हाई बनाया। वहीं निफ्टी भी पहली बार 10,400 के आंकड़े को पार किया। निफ्टी ने 10,490.45 अंक का रिकॉर्ड स्तर बनाया। 11 महीने में सेंसेक्स 23.30 फीसदी और निफ्टी 23.65 फीसदी बढ़ा है।


स्ट्रैटजी बदलने का मिला फायदा

SMC इन्वेस्टमेंट्स एंड एडवाइजर्स लिमिटेड के रिसर्च हेड सचिन सर्वदे का कहना है कि 2008 के बाद ब्रोकरेज कंपनियों ने अपनी स्ट्रैटजी में बदलाव किया है। पहले इन कंपनियों की अर्निंग सिर्फ ब्रोकिंग पर निर्भर रहती थी। लेकिन अब ब्रोकिंग कंपनियां ब्रोकिंग के अलावा म्युचुअल फंड्स, इंश्योरेंस, रियल एस्टेट में डील करने लगी हैं। इससे उनका रेवेन्यू बढ़ा है। जिससे कंपनियों के मुनाफे में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।

 

फाइनेंशियल अवेयरनेस बढ़ी

सर्वदे के मुताबिक, पहले के मुकाबले अब लोगों में फाइनेंशियल अवेयरनेस बढ़ी है। लोग अब अपने बचत पर मिलने वाले रिटर्न को लेकर जागरुक हुए हैं। फाइनेंशियल अवेयरनेस बढ़ने की वजह से लोगों का रुझान अब इक्विटी की तरफ बढ़ा है। इसका फायदा ब्रोकिंग कंपनियों को मिली है।

 

एसआईपी अकाउंट्स की संख्या 1.73 करोड़ हुई

फाइनेंशियल अवेयरनेस बढ़ने की वजह से इस साल अक्टूबर महीने तक एसआईपी अकाउंट्स की संख्या 1.73 करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के डाटा के अनुसार, साल के पहले 7 महीने में एसआईपी के जरिए म्युचुअल फंड में निवेश 34,887 करोड़ रुपए हुआ है। पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में एसआईपी इंफ्लो में 47 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

एएमएफआई डाटा के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2017-18 में औसतन प्रत्येक महीने में म्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने 8.86 लाख एसआईपी अकाउंट जोड़े हैं। अक्‍टूबर में इक्विटी म्‍युचुअल फंड में 16 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा का निवेश आया है।


ब्रोकिंग कंपनियों का वैल्युएशन बढ़ा

फॉर्च्युन फिस्कल के डायरेक्ट जगदीश ठक्कर ने कहा कि बीते कुछ सालों में ब्रोकिंग कंपनियों का वैल्युएशन बढ़ा है। जिससे निवेशकों का ध्यान ब्रोकिंग कंपनियों पर बढ़ा। वहीं पीई इन्वेस्टर्स का भरोसा ब्रोकिंग फर्म पर बढ़ा है। जिसका इनको फायदा मिला।

 


आगे पढ़ें- इन कंपनियों में मिले 1200% रिटर्न

- सिक्‍योरिटीज, कमोडिटीज और करंसी ब्रोकिंग सर्विस देने वाली अग्रणी कंपनी इंडियाबुल्स वेंचर्स में साल 2017 के पहले 11 महीने में 1221 फीसदी का रिटर्न मिला है। 31 दिसंबर 2016 को स्टॉक की कीमत 20.50 रुपए थी, जो 30 नवंबर को बढ़कर 271 रुपए पर पहुंच गई। सितंबर क्वार्टर में कंपनी का प्रॉफिट 173.29 फीसदी बढ़कर 18.42 करोड़ रुपए रहा। सेल 53.89 फीसदी बढ़कर 30.44 करोड़ रुपए रही।

 

- करीब दो दशक से फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में काम कर रही एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसज लिमिटेड के स्टॉक में 324.55 फीसदी की ग्रोथ रही। 31 दिसंबर 2016 को स्टॉक 56.60 रुपए पर बंद हुआ। वहीं 30 नवंबर को स्टॉक 240.30 रुपए के भाव पर बंद हुआ। इस तरह 11 महीने में स्टॉक में 342 फीसदी का रिटर्न मिला। सितंबर क्वार्टर में कंपनी का प्रॉफिट पिछले साल 1.15 करोड़ रुपए की तुलना में बढ़कर 4.20 करोड़ रुपए रहा।

 

- स्टॉक्स, कमोडिटीज एंड करंसी में ट्रेडिंग करने ब्रोकिंग फर्म अरिहंत कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के स्टॉक में 276.52 फीसदी का रिटर्न मिला है। 11 महीने स्टॉक 46 रुपए से बढ़कर 173.20 रुपए के भाव पर पहुंच गया है। वहीं सितंबर क्वार्टर में कंपनी का मार्केट कैप पिछले साल समान क्वार्टर में 6.72 करोड़ रुपए से बढ़कर 6.88 करोड़ रुपए रहा है। वहीं कंपनी की बिक्री 24.96 करोड़ रुपए से बढ़कर 30.83 करोड़ रुपए रही।

 

- जानी-मानी ब्रोकिंग फर्म एडलवाइस फाइनेंशियल सर्विसेज के स्टॉक में बीते 11 महीने में 200 फीसदी तक की ग्रोथ रही। इस दौरान स्टॉक 97.60 रुपए से बढ़कर 293.75 रुपए के भाव पर पहुंच गया। अर्निंग में बढ़ोतरी से सितंबर क्वार्टर में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 45 फीसदी बढ़कर 209 करोड़ रुपए रहा। वहीं इस दौरान कंपनी की आय 2015 करोड़ रुपए रही।

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