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3000 करोड़ का घोटाला: बैंक ऑफ महाराष्ट्र के MD और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पावर छीने

मराठे और गुप्ता को 3000 करोड़ के DSK ग्रुप लोन डिफॉल्ट मामले पुणे पुलिस के इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने गिरफ्तार किया था।

BoM divests MD R P Marathe and ED R K Gupta of their powers

नई दिल्ली.  बैंक ऑफ महाराष्ट्र बोर्ड (बीओएम) के बोर्ड ने सीईओ एंड एमडी रविंद्र मराठे और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आरके गुप्ता को तत्काल प्रभाव से उनकी शक्तियां छीन ली हैं। मराठे और गुप्ता को 3000 करोड़ के DSK ग्रुप लोन डिफॉल्ट मामले पुणे पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने गिरफ्तार किया था। फिलहाल, दोनों बेल पर हैं।   

 

इन मामलों में केस दर्ज हुआ
बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने एक्सचेंज को बताया कि एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एसी रावत को उनकी जगह पुणे स्थित बैंक के हेडक्वार्टर में नियुक्त किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने दिवालिया हो चुके डीएसके ग्रुप को गलत तरीके से लोन दिलवाने में मदद की थी। पुणे पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने अरेस्ट किए गए लोगों पर चीटिंग, फोर्जरी, क्रिमिनल कॉन्सिपिरेंसी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। बैंक के पूर्व सीएमडी सुशील मुहनोत को जयपुर से अरेस्ट किया गया था। पुलिस ने जांच में पाया है कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र के सीईओ रविंद्र मराठे समेत बैंक के कई अधिकारियों ने दिवालिया हो चुके बिल्डर डीएस कुलकर्णी को लोन दिलाने में मदद की। रिपोर्ट्स के अनुसार बैंक अधिकारियों को उनके दिवालिए होने की जानकारी थी।

 

124 प्रॉपर्टीज अटैच करने के लिए जारी हुआ था नोटिफिकेशन
बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र के 2 ऑफिशियल के अलावा जो लोग अरेस्ट हुए हैं, उनमें इनमें डीएसके ग्रुप के सीए सुनील घाटपांडे, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के वाइस प्रेसिडेंट राजीव नेवासकर और बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र के जोनल मैनेजर नित्यानंद देशपांडे शामिल हैं। पिछले महीने महाराष्‍ट्र सरकार ने कुलकर्णी, उनकी वाइफ और डीएसके ग्रुप के अधिाकारियों से जुड़ी 124 प्रॉपर्टीज, 276 बैंक अकाउंट और 46 व्हीकल्स अटैच करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था। 

 

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