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Q4 में टेलिकॉम कंपनियों के नतीजे कमजोर रहने का अनुमान, पहली बार Airtel को हो सकता है घाटा

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बार एयरटेल को पहली बार घाटा उठाना पड़ सकता है।

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नई दिल्ली.  टेलिकॉम सेक्टर की बड़ी कंपनियां आने वाले हफ्तों में चौथी तिमाही का रिजल्ट घोषित करने वाली हैं। इस सेक्टर में कड़ी चुनौती की वजह से टेलिकॉम कंपनियों का तिमाही नतीजा खराब रहने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्राइसिंग, टफ कॉम्पिटीशन और ऑफर्स की वजह से कंपनियों की लागत बढ़ी है, जबकि अर्निंग पर दबाव है। इंडस्ट्री में प्राइसिंग वार अभी भी चल रहा है। ऐसे में चौथी तिमाही के नतीजों पर इसका असर देखने को मिलेगा। वहीं, एयरटेल को पहली बार घाटा उठाना पड़ सकता है।

 

 

बता दें कि रिलायंस जियो इफेक्ट से बने प्राइसिंग प्रेशर के चलते जहां आइडिया को लगातार 5 तिमाही से घाटा हो रहा है, वहीं एयरटेल का प्रॉफिट लगातार घट रहा है। जबकि पिछले क्वार्टर में जियो ने पहली बार प्रॉफिट दर्ज किया था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि न सिर्फ फाइनेंशियल ईयर 2018 की चौथी तिमाही, बल्कि मौजूदा फाइनेंशियल के पहले 2 तिमाही भी कंपनियों की अर्निंग पर दबाव रहेगा। हालांकि, एक बार कंसोलिडेशन पूरा हो जाने पर इंडस्ट्री में 3 बड़े प्लेयर रह जाएंगे और रिसोर्जेस का इस्तेमाल बेहतर कर पाएंगे। ऐसे में लंबी अवधि के लिहाज से इंडस्ट्री का आउटलुक बेहतर है। 

 

पहली बार एयरटेल को हो सकता है घाटा
 ट्रेडस्विफ्ट ब्रोकिंग के डायरेक्टर संदीप जैन ने कहा कि रिलायंस जियो के जबरदस्त ऑफर से दूसरी टेलिकॉम कंपनियों के ऑपरेटिंग मैट्रिक्स पर दबाव बन गया। टेलिकॉम कंपनियों को अपना कस्टमर बेस बनाए रखने के लिए डेटा स्पीड बेहतर रखने और वर्चुअल नेटवर्क प्लेटफॉर्म को मजबूत रखने पर काम करने का दबाव है। जियो के सस्ते टैरिफ प्लान की वजह से पहली बार देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल को चौथे क्वार्टर में घाटा उठाना पड़ सकता है क्योंकि जियो का मार्केट शेयर बढ़कर 14 फीसदी हो गया है। आइडिया को लगातार 5 तिमाही से घाटा हो रहा है। 

 

कैसे गिरा दूसरी कंपनियों का मुनाफा
रिलायंस जियो की मार्केटिंग स्ट्रैटजी ने भारती एयरटेल और आइडिया समेत दूसरे टेलिकॉम कंपनियों का मार्केट बिगाड़ दिया है। जियो इफेक्ट से सेक्टर में प्राइस वार छिड़ा, जिससे इंडस्ट्री पर न केवल कर्ज का बोझ बढ़ा है, एयरटेल, आइडिया और आरकॉम जैसी कंपनियों के लिए मुनाफा कमाना मुश्किल हो गया है। वहीं, जियो का दिसंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 504 करोड़ रुपए रहा है। 

 

Airtel

 

तिमाही मुनाफा % में घटा एक साल पहले
Q4 2017 373 करोड़ 71.7% एक साल पहले
Q1 2018 367 करोड़ 75% 1462 करोड़
Q2 2018 343 करोड़ 76% 1461 करोड़
Q3 2018 306 करोड़  39% 504 करोड़
Q4 2018 - - -


 

Idea

 

तिमाही घाटा एक साल पहले
Q4 2017 327.9 करोड़  451.9 करोड़ मुनाफा
Q1 2018 816 करोड़ 217 करोड़ मुनाफा
Q2 2018 1106 करोड़ 91.5 करोड़ मुनाफा
Q3 2018 1285 करोड़  384 करोड़ घाटा
Q4 2018 - -
 

 

अगले 3-4 क्वार्टर तक अर्निंग पर रहेगा दबाव
सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, टेलिकॉम सेक्टर में कड़ी चुनौती की वजह से कंपनियों की कमाई अभी तीन-चार क्वार्टर तक खराब रहने का अनुमान है। टेलिकॉम इंडस्ट्री में जारी कट-थ्रोट कॉम्पिटीशन से चार्जेज कम हुआ है जिससे कंज्यूमर को तो फायदा हुआ, लेकिन कंपनियों का मुनाफा घट गया है। आने वाले महीनों में टेलिकॉम कंपनियों का दबाव कम नहीं होने वाला है।

 

बदलाव के दौर में है इंडस्ट्री 
स्टैलियन एसेट्स डॉट कॉम के सीआईओ अमीत जेसवानी का कहना है कि टेलिकॉम सेक्टर ने पिछले सालों में 3 दौर देखे हैं। एक 2001 से 2009 के बीच जब एयरटेल, आइडिया जैसी प्रमुख 5 कंपनियां बाजार में थीं। वो दौर मुनाफे का था, जिसे देखकर 2008 से 2016 सितंबर तक यूनीनॉर, एयरसेल जैसी कुछ और कंपनियां भी बाजार में आ गईं। जहां से कॉम्पिटीशन बढ़ गया। पहले 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के बाद कुछ कंपनियां बंद हो गईं। फिर सितंबर 2016 में जियो के आने के बाद से इंडस्ट्री में बड़े बदलाव हुए। डाटा वार शुरू हुआ, जिसके बाद इंडस्ट्री पर प्राइसिंग प्रेशर आ गया। इसका नतीजा कंसोलिडेशन के रूप में आया और आगे 3 बड़े प्लेयर ही रह जाने के उम्मीद हैं। उनका कहना है कि इंडस्ट्री पर कम से कम 6 से 8 महीने प्राइसिंग प्रेशर अभी बना रहेगा। 

 

8 से घटकर रह गई सिर्फ 3 कंपनी
2001 से 2009 के बीच देश में एयरटेल, रिलायंस कम्युनिकेशंस, हच, आइडिया टेलिकॉम सेक्टर में थी। लेकिन 2008-09 के बाद इनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई और एयरसेल, यूनिनॉर और टेलिनॉर जैसी कंपनियां टेलिकॉम सेक्टर में कदम रखीं थी। लेकिन 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के बाद कुछ कंपनियां बंद हो गई और मार्केट में सिर्फ पुरानी कंपनियां ही टिकी रहीं।
2016 रिलायंस जियो की एंट्री के बाद रिलायंस कम्युनिकेशंस, एयरसेल, टाटा टेलिसर्विसेज का पत्ता साफ हो गया। जियो के फ्री वाइस कॉल औऱ इंटरनेट के ऑफर के आगे कंपनियां नहीं टिक सकी और उनको अपना कारोबार बंद करना पड़ा। वहीं जियो को टक्कर देने के लिए वोडाफोन और आइडिया व एयरटेल और टाटा टेलिसर्विसेज मर्ज कर गई। मार्केट में भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और रिलायंस जियो जैसे बड़े नाम ही रह गए हैं। 

 

 

कंपनियों पर दो तरह का दबाव

सीओएआई के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज के मुताबिक, टेलिकॉम कंपनियां दो तरह के दबाव का सामना कर रही हैं। पहला, भारी छूट की पेशकश करने के बाद दरों में बढ़ोतरी करने से जुड़ा तथा दूसरा विभिन्न सेवाओं के मूल्य के आधार पर प्रतिस्पर्धी होने में तेजी आना।

 

जारी रहेगा इंडस्ट्री पर जियो का दबाव
इंडस्ट्री में प्रतियोगिता इस तरह से बढ़ गई है कि कंपनियां अभी भी नए-नए आकर्षक प्लान ऑफर कर रही हैं। जिसका मतलब है कि प्राइसिंग वार अभी खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में कम से कम 1 साल अभी सेक्टर पर दबाव कम होता नहीं दिख रहा है। नए निवेश या दूसरे मसलों पर आगे सरकार किस तरह के कदम उठाती है, यह देखना भी अहम होगा। 

 

सरकार ने दिया राहत पैकेज 
कर्ज में दबी टेलिकॉम कंपनियों को राहत देते हुए सरकार ने नीलामी में खरीदे गए स्पेक्ट्रम के पेमेंट के लिए 10 की बजाए 16 साल का समय कर दिया है। वहीं, एक सर्किल में स्पेक्ट्रम होल्डिंग की सीमा 25 से 35 फीसदी हो गई है। हालांकि लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज जैसी कुछ जरूरी डिमांड अभी भी नहीं मानी गई है।

 

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50 हजार करोड़ निवेश की जरूरत

घरेलू रेटिंग एजेंसी इकरा ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा था कि टेलिकॉम सेक्टर को स्टेबल होने के लिए हर साल 50 हजार करोड़ रुपए निवेश की जरूरत है। इकरा की रिपोर्ट के अनुसार टेलिकॉम सेक्टर पर दबाव बना हुआ है, जिसकी मुख्‍य वजह जियो से बढ़ता कॉम्पिटीशन है। टेलिकॉम इंडस्ट्री मुश्किल के दौर से गुजर रही है। जिसकी वजह से फाइनेंशियल ईयर 2018 में उनके मुनाफे में कमी आ सकती है।


6.5 लाख करोड़ निवेश की तलाश में सरकार 
सरकार को उम्‍मीद है कि नेशनल टेलिकॉम पॉलिसी 2018 के जरिए वित्तीय दबाव झेल रही इंडस्ट्री फिर से ग्रोथ के रास्‍ते पर आ जाएगी। बता दें कि ट्राई ने नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी 2018 की सिफारिश करते वक्‍त कहा था कि उसका उद्देश्‍य सेक्‍टर में 2022 तक 100 अरब डॉलर यानी 6.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश बढ़ाने का है। वहीं, इस पॉलिसी का उद्देश्‍य इस सेक्‍टर में 20 लाख नई नौकरियां पैदा करना है। 

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