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अब कर्जदारों के घरों पर नहीं बजेगा ढोल, वसूली के लिए हाइटेक तरीका अपनाएगा SEBI

नियमों में बदलाव के लिए वित्त मंत्रालय से परामर्श कर रहा है बाजार नियामक

Beating drums to sell attached assets? Sebi flags 'outdated' recovery methods

Beating drums to sell attached assets? Sebi flags 'outdated' recovery methods: किसी नीलामी के लिए डुग-डुगी बजाकर या मुनादी लगाकर जनता को आकर्षिक करने के अपने फायदे होते होंगे, पर बजार विनियामक सेबी को लगता है कि ये तरीके बीते जमाने की बात हो गए हैं और आज के समय में नए तरीकों से अधिक अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं। 

नई दिल्ली। किसी नीलामी के लिए डुग-डुगी बजाकर या मुनादी लगाकर जनता को आकर्षिक करने के अपने फायदे होते होंगे, पर बजार विनियामक सेबी को लगता है कि ये तरीके बीते जमाने की बात हो गए हैं और आज के समय में नए तरीकों से अधिक अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) को शुल्क भरने में चूक करने या आदेश के अनुसार भुगतान न करने वाली इकाइयों की सम्पत्ति बेच कर वसूली करने के अधिकार है। इन अधिकारों की समीक्षा के समय नीलामी के दौरान अपनाए जाने वाले इन पुराने तरीकों की बात सामने आयी।

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सेबी ने कहा-पुराने हुए आयकर अधिनियम के कुछ प्रावधान
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि सेबी जुर्माना, शुल्क, वसूली की राशि या रिफंड के आदेश के संबंध में वसूली के नए नियम तैयार करने के लिए वित्त मंत्रालय से परामर्श कर रहा है। सेबी के पास कर्ज की किस्तें चुकाने में चूक करने वाले निकाय (डिफॉल्टर) की संपत्ति और बैंक खाते जब्त करने, डिफॉल्टर को गिरफ्तार करने या उसे हिरासत में लेने और डिफॉल्टर की चल एवं अचल संपत्तियों के प्रबंधन के लिए किसी को नियुक्त करने का अधिकार है। अधिकारी के अनुसार, सेबी ने सरकार के समक्ष प्रस्तुति में कहा है कि आयकर अधिनियम के कुछ प्रावधान पुराने हो गए हैं, जैसे कि ढोल बजाना और सार्वजनिक नीलामी। अखबारों में विज्ञापन और ई-नीलामी जैसे नए तरीके बेहतर परिणाम दे सकते हैं। सेबी ने वसूली के तेज और प्रभावी तरीकों को अमल में लाने के लिये सरकार को नियमों में आवश्श्यक संशोधन करने को कहा है।

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केंद्र सरकार कर सकती है आईटी अधिनियम में बदलाव
आईटी अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के तहत किसी भी संपत्ति को जब्त करने से पहले किसी जाने-माने स्थान या जब्त की जाने वाली संपत्ति के पास डुग-डुगी पिटवा कर या मुनादी (पुकार) लगवा कर कुर्की आदि के आदेश की घोषणा करनी होती है। इसके अलावा जब्ती के आदेश को उक्त संपत्ति के परिसर में जनता को स्पष्ट रूप से दिखने वाले स्थान पर तथा कर वसूली अधिकारी के कार्यालय के बोर्ड पर चिपकाना होता है। मंत्रालय ने सेबी के सुझाव के जवाब में कहा कि आईटी अधिनियम के वसूली के प्रावधानों को सेबी अधिनियम के तहत संशोधित किया जा सकता है और यह अधिकार केंद्र सरकार के पास है। अत: इसमें संशोधन केंद्र सरकार के बनाए नियमों के आधार पर ही होना चाहिए।

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