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मार्च क्वार्टर में बैंक ऑफ बड़ौदा को 3102 करोड़ रुपए का घाटा, बैड लोन्स बढ़ने का असर

बैड लोन्स में बढ़ोत्तरी से सरकार के स्वामित्व वाले बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) को तगड़ा झटका लगा है।

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नई दिल्ली.
बैड लोन्स में बढ़ोत्तरी से सरकार के स्वामित्व वाले बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) को मार्च, 2018 में समाप्त क्वार्टर के दौरान 3,102.34 करोड़ रुपए का नेट लॉस हुआ है। वहीं एक साल पहले समान अवधि के दौरान बैंक को 154.72 करोड़ रुपए   का नेट प्रॉफिट हुआ था। 

 

 

बैंड लोन्स के लिए 7052 करोड़ रु की प्रोविजनिंग 
बैंक द्वारा की गई रेग्युलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017-18 के चौथे क्वार्टर के दौरान बैंक की बैड लोन्स के लिए प्रोविजनिंग बढ़कर 7,052.53 करोड़ रुपए हो गई, जबकि बीते साल समान अवधि के दौरान यह आंकड़ा 2,425.07 करोड़ रुपए रही थी। 
वहीं बैंक की कुल इनकम घटकर 12,735.16 करोड़ रुपए रही, जबकि मार्च, 2017 में समाप्त क्वार्टर के दौरान यह आंकड़ा 12,852.44 करोड़ रुपए रही थी। 

 

 

ग्रॉस एनपीए 56,480 करोड़ रुपए 
वहीं 31 मार्च, 2018 तक ग्रॉस एडवांसेस की तुलना में नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) या बैड लोन्स बढ़कर 12.26 फीसदी होने से बैंक की एसेट क्वालिटी ज्यादा खराब हो गई, जबकि 31 मार्च 2017 तक यह आंकड़ा 10.46 फीसदी रहा था। वैल्यू में बात करें तो बैंक का ग्रॉस एनपीए बढ़कर 56,480.39 करोड़ रुपए हो गया, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 42.718.70 करोड़ रुपए था।

 

 

नेट एनपीए 23,482 करोड़ रुपए 
वहीं वित्त वर्ष 2017-18 के अंत तक बैंक का नेट एनपीए 5.49 फीसदी (23,482.65 करोड़ रुपए) हो गया, जबकि एक साल पहले समान अवधि में यह आंकड़ा 4.72 फीसदी (18,080.18 करोड़ रुपए) रहा था। बैंक ने कहा कि शुक्रवार को हुई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में 2017-18 के लिए कोई डिविडेंड का ऐलान नहीं किया गया। 

 

 

10 हजार करोड़ रु जुटाने की योजना
इसके साथ ही बोर्ड ने मार्च, 2019 तक 10 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त फंड या जरूरत पड़ने पर उससे भी ज्यादा जुटाने की मंजूरी दी। 
इसमें से 6 हजार करोड़ रुपए कई तरह से कॉमन इक्विटी कैपिटल के माध्यम से जुटाया जाना है और 4 हजार करोड़ रुपए के लिए देश या विदेश में एडिशनल टियर 1/2 कैपिटल इंस्ट्रुमेंट्स जारी  किए जाएंगे। 

 

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