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रिटायरमेंट के बाद 60 दिन की ली ट्रेनिंग, खड़ा किया 35 लाख रु का कारोबार

नौकरी से रिटायर होने के बाद न सिर्फ अपना बिजनेस शुरू किया, बल्कि वो इससे अच्छी खासी कमाई भी कर रहे हैं।

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नई दिल्ली.  अपने देश में रिटायरमेंट के बाद लोग काम करना पसंद नहीं करते हैं। रिटायरमेंट के बाद लोग घर पर अपने परिवार के साथ वक्त बिताने की सोचते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो रिटायरमेंट के बाद अपना बिजनेस शुरू करने का  जज्बा रखते हैं और वो अपना एक अलग मुकाम भी खड़ा कर रहे है। हरियाणा के रहने वाले राजकुमार खरब भी ऐसे ही शख्स हैं जिसने नौकरी से रिटायर होने के बाद न सिर्फ अपना बिजनेस शुरू किया, बल्कि वो इससे अच्छी खासी कमाई भी कर रहे हैं।

 


बुढ़ापे में 2 महीने का किया कोर्स

 

जिन लोगों को घर बैठकर परिवार के साथ होने चाहिए, वो नए आइडिया के साथ बाजार में उतर रहे हैं। राजकुमार खरब हरियाणा के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर के पद पर थे। नौकरी से रिटायर होने के बाद ऑर्गेनिक फार्मिंग में खुद का एंटरप्राइज खोलना चाहते थे। पर इस बार में उनको ज्यादा जानकारी नहीं थी। इसलिए 2015 में उन्होंने करनाल स्थित इंडियन सोसायटी ऑफ एग्रीबिजनेस प्रोफेशनल्स (ISAP) के तहत एग्री-क्लिनिक एंड एग्री-बिजनेस सेंटर्स को ज्वाइन किया। यहां पर उन्होंने 2 महीने का कोर्स किया। यहां उनको मार्केट सर्वे, प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने के साथ अन्य बिजनेस डेवलपमेंट के बारे में जानकारी मिली। कोर्स पूरा होने के बाद उन्होंने अपना खुद का बिजनेस शुरू किया और आज उनके बिजनेस का सालाना टर्नओवर 35 लाख रुपए हो गया है। इनकी सफलता की कहानी एग्रीकल्चरल ट्रेनिंग देने वाली भारत सरकार की संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मैनेजमेंट (मैनेज) की वेबसाइट से ली गई है।

 

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मार्केट में उतारा ऑर्गेनिक गुड़

 

एग्रीक्लिनिक से ट्रेनिंग पूरा होने के बाद उनको अपना बिजनेस शुरू करना था। इसके लिए उन्होंने मार्केट में सर्वे कर जानना चाहा कि लोग बाजार में नया क्या खोज रहे हैं और बिजनेस का मौका कहां है। उन्होंने पाया कि बाजार में जो गुड़ मिल रहा है वो अच्छी क्वालिटी का नहीं है और उसमें मिठास भी नहीं है। एग्री फील्ड में काम करने का अनुभव होने की वजह से उन्होंने आर्गेनिक गुड़ बाजार में लॉन्च करने का फैसला किया। फिर एआरबी ऑर्गेनिक जैगरी की शुरुआत हुई।

 

 

बिना लोन शुरू किया बिजनेस

राजकुमार ने अपने बिजनेस की शुरुआत बिना लोन से की। उन्होंने बिजनेस शुरू करने लिए अपनी जमा-पूंजी लगाई। उन्होंने 20 एकड़ की जमीन को ऑर्गेनिक खेती के लिए तैयार किया। जहां आज ऑर्गनिक तरीके से गन्ने की खेती होती है। अपने साथ उन्होंने अन्य किसानों को भी ऑर्गेनिक खेती के फायदे के बारे में बताया। वो एक खास तकनीक से गुड़ बनाते हैं औऱ उनके इस तकनीक को हरियाणा के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट से लाइसेंस मिला हुआ है।


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सालाना 35 लाख रु है टर्नओवर

 

ऑर्गेनिक गुड़ की डिमांड बाजार में अच्छी है। बाजार में ऑर्गेनिक गन्ने के रस को भी अच्छी कीमत मिल जाती है, जिससे प्रॉफिट मार्जिन बेहतर हो जाता है। वो अपनी तकनीक को दूसरे किसानों और स्मॉल स्केल फैक्ट्रियों को बेचकर भी कमाई कर रहे हैं। इसके अलावा वो कमर्शियल मॉडल पर बायोगैस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी चला रहे हैं। उनके बिजनेस का सालाना टर्नओवर 35 लाख रुपए है।

 

 

ग्रो ऑर्गेनिक, बाय ऑर्गेनिक

 

राजकुमार इस प्रकार के मॉडल डेवलप कर ग्रामीण युवाओं और पारंपरिक रूरल एंटरप्राइज को नया जीवन देकर उन्हें वाणिज्यिक रूप से प्रतिस्पर्धी बना रहे है। उभरते एग्रीप्न्योर्स के लिए उनका का संदेश है- ऑर्गेनिक उपजाएं, ऑर्गेनिक खरीदें और अगली पीढ़ी के लिए

प्लेनेट को बचाओ।

 

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