Home » Market » StocksHow rupee devalued, the story of rupee since Independence. आजादी से अब तक रुपए की कहानी

कभी 4 रुपए से भी कम था एक डॉलर का मूल्य, आज 22 गुना बढ़ 74 पार

Indian Rupee : आजादी से अब तक रुपए की कहानी

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नई दिल्ली। आजादी के बाद जो डॉलर कभी सिर्फ 3.30 रुपए का था, आज वह 73.57 रुपए के बराबर हो गया है। यह अब तक की रुपए की सबसे निचली गिरावट है। काफी समय से रुपए की कीमत लगातार गिरती चली जा रही है। 1947 के बाद से देश दो बार आर्थिक संकट से गुजरा है और रुपए की कीमत दो बार कम की गई है।

 

हले पौंड से मापा जाता था रुपया

कई खबरों में दावा किया गया है कि आजादी के समय भारतीय रुपए और डॉलर की कीमत बराबर थी, जबकि यह सच नहीं है। 1966 तक भारतीय रुपए को ब्रिटिश पौंड की तुलना में मापा जाता था। इस दौरान एक पौंड का मूल्य 13.33 रुपया था, जबकि डॉलर से तुलना में एक पौंड की कीमत 4.05 डॉलर थी। लिहाजा एक डॉलर की कीमत चार भारतीय रुपए से कम थी। 

 

भी हुआ करती थी बहुपक्षीय मुद्रा

जब 1911 में ब्रिटिश शासक जॉर्ज पंचम ने देश में शासन संभाला तो नए रुपए का सिक्का जारी किया गया। धीरे-धीरे ब्रिटिश रुपए की लोकिप्रियता बढ़ने लगी और मुगल साम्राज्य में प्रचलन में आया रुपया चलन से बाहर होता चला गया। व्यापार समुदायों और देश से पलायन करके विदेश में बसने वाले भारतीयों ने ब्रिटिश रुपए का चलन बढ़ाया। सिंध, सीलाेन और बर्मा पर कब्जा करने के बाद अंग्रेजों ने यहां भी रुपए को प्रमुख मुद्रा के तौर पर स्थापित किया।

 

आगे पढ़ें- 1966 तक इन देशों में इस्तेमाल होती रही भारतीय मुद्रा

1966 तक कई देशों ने इस्तेमाल की भारतीय मुद्रा

1947 में देश को आजादी मिलने के बाद भी दुबई व अन्य कई खाड़ी देश 1966 तक भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा छापा गया गल्फ रुपया इस्तेमाल करते रहे। 1950 से 1970 के बीच कोंकण तट पर गोल्ड स्मगलिंग बहुत आम थी। खाड़ी देशों के कई व्यापारी गल्फ में रुपए से सस्ता सोना खरीद कर उसे भारत में स्मगल किया करते थे। लेकिन 1966 में भारतीय मुद्रा की कीमत में गिरावट होने के बाद इन देशों ने अपनी खुद की मुद्रा छापनी शुरू कर दी। अब सिर्फ नेपाल और भूटान ही भारतीय मुद्रा में व्यापार करते हैं।

 

दो बार कम की गई रुपए की कीमत

1965 में पड़े सूखे और भारत-पाक युद्ध के चलते भारत का ट्रेड डेफिसिट बहुत बढ़ गया जिसके चलते भारत ने डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत 58 फीसदी तक कम कर दी। अब एक डॉलर 7.50 रुपए का हो गया। 1955 तक आते-आते एक डॉलर 32.4 रुपए का हो गया। अगल 25 वर्षों तक डॉलर के मुकाबले रुपया धीरे-धीरे अपनी जमीन खोता चला गया। 1990 में गल्फ वॉर के चलते कच्चे तेल के दाम आसमान छूने लगे, सोवियत संगठन का विगठन हो गया। इन सब घटनाओं का असर भारत पर भी पड़ा और यहां बैलेंस ऑफ पेमेंट संकट खड़ा हाे गया। बढ़ती महंगाई और कम वृद्धि दर ने और नुकसान पहुंचाया। जून, 1991 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1,124 डॉलर रह गया। इतने में सिर्फ तीन हफ्ते का आयात किया जा सकता था। लिहाजा जुलाई में रुपए की कीमत फिर घटाई गई। कुल मिलाकर डॉलर के मुकाबले रूपए की कीमत 18.5 फीसदी कम हो गई। अब एक डॉलर 26 रुपए का था।

 

आगे पढ़ें- ऐसे घटती-बढ़ती रही रुपए की कीमत

स्थिर हुआ बाजार

1993 में सरकार ने तय किया कि एक्सचेंज रेट बाजार के मुताबिक तय होगा। पहली बार रुपए की कीमत को घटने-बढ़ने के लिए छोड़ दिया गया। ऐसे में रुपया और नीचे गिरकर 31.37 रुपया प्रति डॉलर पर आ गया। अगले एक दशक तक रुपए की कीमत में 5% की दर से गिरावट होती चली गई। 2002-03 तक रुपए की कीमत 48.40 प्रति डॉलर रह गई।

 

हुआ सुधार लेकिन फिर गिर पड़ा रुपया

इसके बाद FDI और स्टॉक मार्केट में उछाल और IT और BPO सेक्टर में तेज वृद्धि के बाद डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत सुधरनी शुरू हुई। 2007 में रुपऐ की कीमत 37 तक पहुंची, लेकिन 2008 की ग्लोबल इकोनॉमिक क्राइसिस में यह सुधार रुक गया। रुपया लुढ़कता हुआ 51 रुपए प्रति डॉलर के स्तर पर अा गया। तक से अब तक कभी वैश्विक तो कभ्री घरेलू कारणों से रुपये की कीमत लगातार गिरती चली जा रही है।

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