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जनवरी में पी-नोट्स इन्‍वेस्‍टमेंट 1.19 लाख करोड़ रहा, साढ़े 8 साल में सबसे कम

भारतीय कैपिटल मार्केट में पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) के जरिए इन्‍वेस्‍टमेंट जनवरी में 1.19 लाख करोड़ रुपए रहा।

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नई दिल्‍ली. भारतीय  कैपिटल मार्केट में पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) के जरिए इन्‍वेस्‍टमेंट जनवरी में 1.19 लाख करोड़ रुपए रहा। यह करीब साढ़े आठ साल में पी-नोट्स से सबसे कम इन्‍वेस्‍टमेंट है। माना जा रहा है कि मार्केट रेग्‍युलेटर सेबी की ओर से इस टूल का दुरुपयोग रोकने के लिए नियमों में की गई सख्‍ती का असर इसके इन्‍वेस्‍टमेंट पर पड़ा है। 

 

अगस्‍त 2009 के बाद सबसे कम इन्‍वेस्‍टमेंट

सेबी के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय मार्केट (इक्विटी, डेट और डेरिवेटिव्‍स) में पी-नोट्स इन्‍वेस्‍टमेंट की कुल वैल्‍यू जनवरी के आखिर में गिरकर 1,19,556 करोड़ रुपए रह गई। इसके पिछले महीने में यह 1,24,810 करोड़ रहा था। अगस्‍त 2009 के बाद से पी-नोट्स के जरिए यह सबसे कम इन्‍वेस्‍टमेंट है। उस समय 1,10,355 करोड़ रुपए का इन्‍वेस्‍टमेंट पी-नोट्स के जरिए हुआ था। 

 

 

जून 2017 से गिर रहा है पी-नोट्स इन्‍वेस्‍टमेंट 

पी-नोट्स इन्‍वेस्‍टमेंट पिछले साल जून से गिर रहा है। सितंबर में भी वह आठ साल से ज्‍यादा के निचले स्‍तर पर आ गया था। हालांकि, अक्‍टूबर में इसमें थोड़ी बढ़ोत्‍तरी हुई लेकिन नवंबर में फिर गिरावट आई। इसके बाद गिरावट का यह सिलसिला इस साल जनवरी तक जारी है। 
 

 

क्‍यों घट रहा है पी-नोट्स इन्‍वेस्‍टमेंट? 

पी-नोट्स इन्‍वेस्‍टमेंट में गिरावट की कई व‍जहें हो सकती हैं। माना जा रहा है कि विवादास्‍पद पी-नोट्स के मिसयूज को रोकने के लिए मार्केट रेग्‍युलेटर सेबी की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। जुलाई 2017 में सेबी ने 1000 डॉलर की फीस वसूलने का सख्‍त नॉर्म्‍स नोटिफाई किया, जो उस प्रत्‍येक इन्‍स्‍ट्रूमेंट पर वसूला जाएगा, जिसका गलत इस्‍तेमाल ब्‍लैकमनी को खपाने से रोकने के लिए किया गया हो। इसके अलावा, सेबी ने एफपीआई को ऐसे नोट्स जारी करने से रोक दिया, जहां एसेट एक डेरिवेटिव है। हालांकि इसमें हेजिंग के लिए इस्‍तेमाल होने वाले एसेट को छूट थी। 
 

क्‍या है पी-नोट्स? 

पी-नोट्स रजिस्‍टर्ड फॉरेन पोर्टफोलियो इन्‍वेस्‍टर्स की ओर से विदेशी इन्‍वेस्‍टर्स को जारी किए जाते हैं, जो भारतीय स्‍टॉक मार्केट में अपने को बिना रजिस्‍टर्ड कराए सीधे वहां इन्‍वेस्‍ट करना चाहते हैं। हालांकि, उन्‍हें भी एक तय प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। 
 
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