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कैपिटल मार्केट में लेनदेन पर लगे सिंगल टैक्‍स, PwC इंडिया का सुझाव

कंसल्‍टसेंसी फर्म पीडब्‍ल्‍यूसी इंडिया ने कैटिपल मार्केट ट्रांजैक्‍शन पर सिंगल टैक्‍स का सुझाव दिया है

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नई दिल्‍ली. कंसल्‍टेेंसी फर्म पीडब्‍ल्‍यूसी इंडिया ने कैटिपल मार्केट ट्रांजैक्‍शन पर सिंगल टैक्‍स का सुझाव दिया है। अभी कैपिटल मार्केट में लेनदेन पर सिक्‍युरिटी ट्रांजैक्‍शन टैक्‍स (एसटीटी) और कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स लगता है। सरकार ने 50 साल से ज्‍यादा पुराने इनकम टैक्‍स कानून को नए सिरे ड्रॉफ्ट करने के लिए एक टॉस्‍क फोर्स बनाया है, जिसे अपने सुझाव पीडब्‍ल्‍यूसी ने दिए हैं। फर्म ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रमोट करने के लिए अनिवासी (नॉन रेजिडेंट्स) के लिए नियम आसान करने की भी बात कही है। 


पिछले साल नवंबर में सरकार ने देश की आर्थिक जरूरतों के अनुसार इनकम टैक्‍स एक्‍ट 1961 को री-ड्रॉफ्ट करने के लिए एक टॉस्‍क फोर्स का गठन किया था। छह सदस्‍यीय इस टॉस्‍क फोर्स के संयोजक सीबीडीटी मेम्‍बर (कानून) अरबिंद मोदी हैं। अन्‍य सदस्‍यों में सीए गिरीश आहूजा, ईएंडवाई के चेयरमैन व रिजनल मैनेजिंग पार्टनर राजीव मेमानी और आईसीआरआईईआर कंसल्‍टेंट मानसी केडिया शामिल हैं। वहीं, मुख्‍य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्‍यम टॉस्‍क फोर्स में स्‍थायी विशेष इन्‍वाइटी हैं। 


PwC इंडिया ने अपने सुझावों में क्‍या कहा? 
अपनी सिफारिशों में पीडब्‍ल्‍यूसी इंडिया ने कहा कि एक ही ट्रांजैक्‍शन पर कई तरह के टैक्‍स से उसकी लागत बढ़ जाती है और वह भारतीय कैपिटल मार्केट से निवेशकों को दूर करता है। इसलिए मौजूदा टैक्‍स स्‍ट्रक्‍चर की बजाय एक सिंगल टैक्‍स सिस्‍टम होना चाहिए। अभी एसटीटी और कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्‍शन पर लगता है। इसके अलावा, टैक्‍स कंसल्‍टेंसी फर्म ने नियमों का पालन कराना आसान करने पर भी जोर दिया है। फर्म का कहना है कि इनकम टैक्‍स और विद्होल्डिंग टैक्‍स के लिए एक सिंगल रिटर्न होना चाहिए, जिससे कि एक कंसॉलिडेटेड असेसमेंट किया जा सकेगा। 

 
नॉन रेजिडेंट्स के लिए आसान हो बिजनेस करना 
नॉन रेजिडेंट्स के लिए बिजनेस आसान करने की बात पीडब्‍ल्‍यूसी ने की है। फर्म का मानना है कि यदि पूरे टैक्‍स रोक दिए गए हैं, तो उन्‍हें भारत में टैक्‍स रिटर्न फाइल करने से छूट होनी चाहिए। अभी यह सिर्फ डिविडेंट और इंटरेस्‍ट इनकम के लिए उपलब्‍ध है। इसके अलावा, पीडब्‍ल्‍यूसी की एक अन्‍य सुझाव में नॉन रेजिडेंट्स टैक्‍सपेयर्स को भारत में ट्रांसफर प्राइसिंग कम्‍प्‍लायंस के दायरे से बाहर रखना भी शामिल है। साथ ही ट्रांसफर प्राइसिंग प्रोविजंस को बेहतर बनाने के लिए विवाद रोकने और उसके समाधान पर भी फर्म ने अपने सुझाव दिए हैं। 

 

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